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Rohtak News: श्राद्ध... कल से पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और पिंडदान करें

Mon, 16 Sep 2024 11:30 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 16 Sep 2024 11:30 PM IST
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Shraddha... From tomorrow, perform Tarpan and Pind Daan for the satisfaction of ancestors
16सीटीके26....पंडित सुनील शास्त्री (सामड़)। संवाद
रोहतक। पितृपक्ष 18 सितंबर से शुरू हो रहा है। पंडित और आचार्य ने सनातन धर्म और शास्त्रों के मान्यताओं के अनुसार पितरों को प्रसन्न करने की विधि विधान सुझाए हैं। दुर्गा भवन मंदिर के आचार्य मनोज मिश्रा के अनुसार पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और अन्य तरह के दान किए जाते हैं। श्राद्ध तिथि पर सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं। साफ कपड़े पहनकर पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध और दान का संकल्प लें। श्राद्ध होने तक कुछ न खाएं।
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18 सितंबर बुधवार से श्राद्ध पक्ष प्रारंभ हो रहा है। श्राद्ध पक्ष पर नित्य प्रति तर्पण का विधान है। कहते हैं कि 16 दिन लगातार तर्पण करने से पितृ तृप्त होते हैं और अपने कुल की उन्नति का रास्ता खोलते हैं। पितृपक्ष पर सुबह नहा धोकर एक लोटे पर जल, दूध, जौ, तिल, गंगाजल और कुशा लेकर पितरों के निमित्त 16 दिनों तक तर्पण करना चाहिए। तर्पण करने से पितृ देव जल्द तृप्त होते हैं और प्रसन्न होकर अपने कुल की उन्नति दूध और पुत्र की वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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वहीं पंडित सुनील शास्त्री (सामड़) ने बताया कि पिंडदान का मतलब होता है पितरों को भोजन दान देना। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज गाय, कुआं, कुत्ता, चींटी व देवताओं के रूप में आकर भोजन ग्रहण करते हैं। इसलिए पितृपक्ष के दौरान भोजन के पांच अंश निकालने का विधान है। पिंडदान के दौरान खासकर पहले दिन मृतक के निमित्त जौ या चावल के आटे को गूंथकर गोल आकृति वाले पिंड बनाए जाते हैं, इसलिए इसे पिंडदान कहा जाता है। जो काम श्रद्धा से किया जाए वही श्राद्ध है। पितृ और प्रेत के निमित्त उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धा पूर्वक जो अर्पित किया जाए वह श्राद्ध है।

16सीटीके26....पंडित सुनील शास्त्री (सामड़)। संवाद

16सीटीके26....पंडित सुनील शास्त्री (सामड़)। संवाद

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