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Rohtak News: शहर की बेटी का आइडिया नेशनल अवाॅर्ड के लिए चयनित
Sun, 30 Mar 2025 01:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 30 Mar 2025 01:54 AM IST
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फोटो-29सीटीके58 भूमिका। स्रोत: परिजन
रोहतक। शहर के सेक्टर 36-ए की बेटी भूमिका का आइडिया नेशनल इंस्पायर अवॉर्ड के लिए हुआ है। यह आइडिया भूमिका ने सवा साल पहले उस समय भेजा था, जब वह मोखरा स्थित माॅडल स्कूल संस्कृति स्कूल की 10वीं कक्षा में पढ़ती थीं। अब कुरुक्षेत्र में सुपर-100 के तहत नीट की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं, साथ ही 11वीं की परीक्षा दी है।
सेक्टर-36 निवासी परविंदर सिंह ने बताया कि वह मोखरा स्थित मॉडल संस्कृति स्कूल में पीजीटी के तौर पर कार्यरत हैं। उनकी बेटी भूमिका ने दिव्यांग और बीमार लोगों के लिए वाहन के अंदर घूमने वाली सीट का आइडिया ऑनलाइन भेजा था। तीन दिन पहले अब पत्र आया है कि आइडिया इंस्पायर अवॉर्ड मानक प्रतियोगिता के तहत नेशनल स्तर पर चयनित हुआ है। भूमिका ने बताया कि बीमार व्यक्ति को अगर कहीं जाना होता है तो उसके लिए गाड़ी में बैठने से लेकर अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वाहन के अंदर सीट को इस तरह से तैयार किया जाए कि बैठते समय सीट बटन दबाते ही बाहर आ जाए। अब 11वीं की परीक्षा दे चुकी भूमिका ने बताया कि एक बार वह स्कूल जा रही थी। उसने देखा कि बीमार व्यक्ति को काफी मशक्कत के बाद वाहन में बैठाया जा रहा है। तभी उसने सोचा कि क्यों न मरीज को, जिस सीट पर बैठाया जा रहा है, उसे ऐसे तैयार किया जाए कि वह बाहर आ जाए।
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सेक्टर-36 निवासी परविंदर सिंह ने बताया कि वह मोखरा स्थित मॉडल संस्कृति स्कूल में पीजीटी के तौर पर कार्यरत हैं। उनकी बेटी भूमिका ने दिव्यांग और बीमार लोगों के लिए वाहन के अंदर घूमने वाली सीट का आइडिया ऑनलाइन भेजा था। तीन दिन पहले अब पत्र आया है कि आइडिया इंस्पायर अवॉर्ड मानक प्रतियोगिता के तहत नेशनल स्तर पर चयनित हुआ है। भूमिका ने बताया कि बीमार व्यक्ति को अगर कहीं जाना होता है तो उसके लिए गाड़ी में बैठने से लेकर अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वाहन के अंदर सीट को इस तरह से तैयार किया जाए कि बैठते समय सीट बटन दबाते ही बाहर आ जाए। अब 11वीं की परीक्षा दे चुकी भूमिका ने बताया कि एक बार वह स्कूल जा रही थी। उसने देखा कि बीमार व्यक्ति को काफी मशक्कत के बाद वाहन में बैठाया जा रहा है। तभी उसने सोचा कि क्यों न मरीज को, जिस सीट पर बैठाया जा रहा है, उसे ऐसे तैयार किया जाए कि वह बाहर आ जाए।
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