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Rohtak News: माजरा गांव में सीवर लाइन तो बिछा दी पर कनेक्शन देना भूल गया निगम
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16सीटीके27...पार्षद परीक्षित।
मनोज कुमार
रोहतक। माजरा गांव में निगम ने करोड़ों रुपये खर्च कर सीवर लाइन तो बिछा दी, लेकिन कनेक्शन देना भूल गया। नगर निगम ने आधी-अधूरी व्यवस्था में ही सीवर लाइन जन स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी निगम से नहीं पूछा कि ग्रामीणों को कनेक्शन दिए जाने हैं या नहीं और कब्जा ले लिया।
विभागों की कई माह तक अनदेखी के बाद ग्रामीणों ने स्वयं ही प्लंबर बुलाकर सीवर के कनेक्शन कराने शुरू कर दिए। इसका खामियाजा पूर्व सूबेदार महाबीर सिंह और उनके दो बेटे दीपक व लक्ष्मण को जान गंवाकर चुकाना पड़ा। उनके घर में भी प्लंबर से ही कनेक्शन कराया गया था। तीनों पिता-पुत्रों की मौत के बाद अब माजरा गांव के घर-घर में इस बात पर चर्चा है कि कनेक्शन दोबारा कराया जाए। मगर यहां भी पेच फंसा हुआ है। मार्केट से प्लंबर को बुलाकर पाइप आदि समेत एक हजार रुपये में कनेक्शन हो जाता है, जबकि प्रशासन कनेक्शन के एवज में 7 से 8 हजार रुपये वसूलता है।
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मानकों के अनुरूप नहीं हुए कनेक्शन
निगम और जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से यदि सीवर में कनेक्शन किया जाता तो 6 से 8 इंच का पाइप लगाया जाता है, जबकि ग्रामीणों ने जब कनेक्शन कराया तो 3 से 4 इंच के ही पाइप लगाकर अस्थायी तौर पर ही कनेक्शन करवा लिए। गांव में ज्यादातर लोगों ने इसी तरह से कनेक्शन करवाए हुए हैं।
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अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान और ग्रामीणों ने कनेक्शन मांगा नहीं
ग्रामीणों से बात की तो पता चला कि अधिकारियों ने कभी कनेक्शन देने की बात नहीं की तो ग्रामीणों ने भी कनेक्शन की मांग नहीं की। स्वयं प्लंबर बुलाकर अपना काम कर रहे थे। इसके अलावा, यह भी बताया कि आवेदन करने के बाद कई औपचारिकताएं पूरी करने के लिए विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि गांव में प्लंबर एक कॉल पर 800 रुपये में ही कनेक्शन कर देता है।
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क्या कहते हैं ग्रामीण
कनेक्शन के लिए किसी भी विभाग के अधिकारी ने कोई जानकारी नहीं दी और न ही ग्रामीणों ने कभी उनसे मांग की। प्लंबर को चंद रुपये देकर सीधे कनेक्शन करा लिए जाते हैं।
- महेश कुमार, माजरा गांव।
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लंबी प्रक्रिया के कारण लोग सीवर का कनेक्शन कराने के लिए निगम और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास नहीं जाते हैं। फिर एक बार में आवेदन करने पर काम भी नहीं होता है।
- शशिपाल, माजरा गांव।
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नगर निगम ने जब अमृत योजना के तहत सीवर की निविदा जारी की थी, उसी समय गलती रही थी। यदि सीवर लाइन के साथ-साथ एजेंसी को कनेक्शन देने का काम दिया जाता तो ऐसी घटना न होती। अभी भी जनस्वास्थ्य विभाग को पहल करके कम से कम राशि में कनेक्शन करने चाहिए।
- परीक्षित देशवाल, पार्षद वार्ड नंबर-14 रोहतक।
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निगम ने सीवर लाइन बिछाई थी। इसके बाद इसे जनस्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया था। ऐसे में आगे की जिम्मेदारी विभाग की बनती है।
- डाॅ. आनंद शर्मा, आयुक्त, नगर निगम।
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रोहतक। माजरा गांव में निगम ने करोड़ों रुपये खर्च कर सीवर लाइन तो बिछा दी, लेकिन कनेक्शन देना भूल गया। नगर निगम ने आधी-अधूरी व्यवस्था में ही सीवर लाइन जन स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी निगम से नहीं पूछा कि ग्रामीणों को कनेक्शन दिए जाने हैं या नहीं और कब्जा ले लिया।
विभागों की कई माह तक अनदेखी के बाद ग्रामीणों ने स्वयं ही प्लंबर बुलाकर सीवर के कनेक्शन कराने शुरू कर दिए। इसका खामियाजा पूर्व सूबेदार महाबीर सिंह और उनके दो बेटे दीपक व लक्ष्मण को जान गंवाकर चुकाना पड़ा। उनके घर में भी प्लंबर से ही कनेक्शन कराया गया था। तीनों पिता-पुत्रों की मौत के बाद अब माजरा गांव के घर-घर में इस बात पर चर्चा है कि कनेक्शन दोबारा कराया जाए। मगर यहां भी पेच फंसा हुआ है। मार्केट से प्लंबर को बुलाकर पाइप आदि समेत एक हजार रुपये में कनेक्शन हो जाता है, जबकि प्रशासन कनेक्शन के एवज में 7 से 8 हजार रुपये वसूलता है।
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मानकों के अनुरूप नहीं हुए कनेक्शन
निगम और जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से यदि सीवर में कनेक्शन किया जाता तो 6 से 8 इंच का पाइप लगाया जाता है, जबकि ग्रामीणों ने जब कनेक्शन कराया तो 3 से 4 इंच के ही पाइप लगाकर अस्थायी तौर पर ही कनेक्शन करवा लिए। गांव में ज्यादातर लोगों ने इसी तरह से कनेक्शन करवाए हुए हैं।
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अधिकारियों ने नहीं दिया ध्यान और ग्रामीणों ने कनेक्शन मांगा नहीं
ग्रामीणों से बात की तो पता चला कि अधिकारियों ने कभी कनेक्शन देने की बात नहीं की तो ग्रामीणों ने भी कनेक्शन की मांग नहीं की। स्वयं प्लंबर बुलाकर अपना काम कर रहे थे। इसके अलावा, यह भी बताया कि आवेदन करने के बाद कई औपचारिकताएं पूरी करने के लिए विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि गांव में प्लंबर एक कॉल पर 800 रुपये में ही कनेक्शन कर देता है।
क्या कहते हैं ग्रामीण
कनेक्शन के लिए किसी भी विभाग के अधिकारी ने कोई जानकारी नहीं दी और न ही ग्रामीणों ने कभी उनसे मांग की। प्लंबर को चंद रुपये देकर सीधे कनेक्शन करा लिए जाते हैं।
- महेश कुमार, माजरा गांव।
लंबी प्रक्रिया के कारण लोग सीवर का कनेक्शन कराने के लिए निगम और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास नहीं जाते हैं। फिर एक बार में आवेदन करने पर काम भी नहीं होता है।
- शशिपाल, माजरा गांव।
नगर निगम ने जब अमृत योजना के तहत सीवर की निविदा जारी की थी, उसी समय गलती रही थी। यदि सीवर लाइन के साथ-साथ एजेंसी को कनेक्शन देने का काम दिया जाता तो ऐसी घटना न होती। अभी भी जनस्वास्थ्य विभाग को पहल करके कम से कम राशि में कनेक्शन करने चाहिए।
- परीक्षित देशवाल, पार्षद वार्ड नंबर-14 रोहतक।
निगम ने सीवर लाइन बिछाई थी। इसके बाद इसे जनस्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया था। ऐसे में आगे की जिम्मेदारी विभाग की बनती है।
- डाॅ. आनंद शर्मा, आयुक्त, नगर निगम।

16सीटीके27...पार्षद परीक्षित।

16सीटीके27...पार्षद परीक्षित।