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Rohtak News: 15 दिन में आश्रम के सात मरीजों ने तोड़ा दम, छह की मौत पीजीआईएमएस में हुई

Sun, 20 Oct 2024 04:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 20 Oct 2024 04:51 PM IST
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Seven patients of the ashram died in 15 days, six died in PGIMS
रोहतक। सेक्टर-चार स्थित हरिओम सेवादल के सहारा आश्रम एक बार फिर चर्चा में है। आश्रम में तीन माह बाद एक बार फिर सात लोगों के मरने की खबर सामने आई है। इनमें छह ने पीजीआई के बेड पर और एक ने आश्रम में दम तोड़ा है जबकि दो मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है। आश्रम प्रशासन ने मरीजों के बेहतर इलाज का दावा किया है कि यह सभी मरीज हादसे में घायल हुए थे और शुरू से ही नाजुक हालत बनी हुई है।
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दरअसल, हरिओम सेवादल के सहारा आश्रम की ओर से पीजीआईएमएस में आने वाले बेसहारा मरीजों की देखभाल करता है। जिससे उन मरीजों का न सिर्फ डॉक्टरों से अच्छा इलाज कराता है और उनकी सेवा में भी कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है। मगर इसी साल जुलाई में एक दिन में तीन मरीजों की माैत होने पर सवाल खड़े हो गए थे और अब 15 दिन में सात मरीजों ने दम तोड़ दिया है। इनमें कैलाश नाम के मरीज ने शुक्रवार को दम तोड़ा है जबकि बाकी छह ने पांच से 15 अक्तूबर तक दम तोड़ा था। हालांकि यह मरीज पीजीआई में ही दाखिल थे और उनका वहीं पर इलाज चल रहा था। वहीं पर आश्रम की ओर से उनकी सेवा की जा रही थी। संस्था के संचालकों का दावा है कि उनकी ओर से मरीजों की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही थी, लेकिन इन मरीजों को किडनी, लीवर समेत हादसे में बुरी तरह घायल थे और उनके शरीर के अंदर के कई पार्ट्स भी लगभग अंतिम स्थिति में थे। इससे उनकी मौत हुई है।
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दो मरीजों की हालत अभी गंभीर

आश्रम की ओर से जिन मरीजों की सेवा की जा रही है, उनमें अभी दो मरीजों की हालत गंभीर है और उनके साथ कभी भी कोई घटना हो सकती है।


जुलाई में एक दिन में तीन लोगों की हुई थी मौत
10 जुलाई को हरिओम सेवादल के सहारा आश्रम में एक साथ तीन लोगों की मौत हो गई थी। मौत के बाद यह आश्रम चर्चा में आया था और अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। मगर प्रशासन ने इस आश्रम को लेकर बेहतर व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया है। जिससे यहां के मरीजों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।
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जिला प्रशासन नही लेता संज्ञान

जिले में कई आश्रमों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से इनमें बेहतर सुविधाओं को लेकर कोई कदम नहीं उठाता है। जबकि आश्रमों की ओर से भी लगातार मांग की जाती रही है कि सरकारी अस्पतालों में बैठने वाले डॉक्टरों की डयूटी एक दिन के लिए आश्रम में लगा दी जाए। जिससे उनको बेड पर ही अच्छा इलाज मिल सके।



पीजीआईएमएस में बेसहारा मरीजों की देखभाल आश्रम की ओर से की जाती है। इनमें छह मरीजों ने 15 दिन में इलाज के दौरान पीजीआईएमएस में ही दम तोड़ा है। जबकि कैलाश नामक मरीज ने शुक्रवार को शरीर त्याग दिया। सभी मरीज सड़क हादसों में घायल होकर पीजीआईएमएस आए थे। वहीं पर आश्रम की ओर से उनकी देखभाल की जा रही थी और हालत भी नाजुक थी।

संजय खुराना, सहारा आश्रम संचालक




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