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Rohtak News: सेशन कोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला, सबूत मिटाने पर धारा ही जोड़ना पर्याप्त नहीं

Sun, 03 Nov 2024 12:26 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2024 12:26 AM IST
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Sessions Court overturns the decision of the trial court, adding a section on erasing evidence is not enough
रोहतक। पोर्न साइट पर रोहतक के वकील का मोबाइल नंबर डालने के मामले में स्थानीय अदालत का निर्णय आया है। नौ साल से चल रहे मामले में निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए सेशन कोर्ट ने कहा है कि सबूत नष्ट होने पर केवल धारा जोड़ने से ही संतुष्ट होना उचित नहीं। ट्रायल कोर्ट नए सिरे से मामले की सुनवाई करे। शिकायतकर्ता ट्रायल कोर्ट को बताए कि जिस सिम को पुलिस नष्ट बताकर बरामद नहीं कर सकी, उसको आरोपी अब भी प्रयोग कर रहा है। मामले की निचली कोर्ट में 9 दिसंबर को सुनवाई होगी।
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याचिकाकर्ता एवं पीड़ित वकील ने अदालत को बताया कि 2015 में गुजरात के अहमदाबाद निवासी रितेष पटेल ने फर्जी कंपनी बनाकर ऑनलाइन कारोबार का झांसा देकर उससे डेढ़ लाख रुपये ठग लिए। उसने जो ऑनलाइन काम करने के बाद सात-आठ लाख रुपये कमाए थे, वे भी हड़प लिए। जब उसने कानूनी कार्रवाई शुरू की तो आरोपी ने उसका मोबाइल नंबर अलग-अलग पोर्न साइट पर डाल दिया। इससे उसे काफी मानसिक परेशानी हुई। सिविल लाइन थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 2018 में आरोपी रितेष पटेल को गिरफ्तार कर लिया, साथ ही अदालत में चार्जशीट दाखिल की। चालान में केवल आईटी एक्ट के तहत आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई। बताया गया कि जो सिम पोर्न साइट पर नंबर डालने के लिए प्रयोग किया गया है, उन दोनों नंबर को आरोपी ने नष्ट कर दिया है। पीड़ित का कहना है कि पुलिस ने उसके साथ हुई लाखों रुपये की धोखाधड़ी व कंपनी के फर्जी कागजात को लेकर कोई सबूत नहीं जुटाए, जबकि वह सीडी तक पुलिस को उपलब्ध करवा चुका था। उसी समय पीड़ित ने ट्रायल कोर्ट में अर्जी दी कि पुलिस को आदेश दिए जाएं कि मामले की आगे भी जांच करे। सुनवाई के बाद मई 2023 में ट्रायल कोर्ट ने अर्जी स्वीकार नहीं की। पीड़ित ने सेशन कोर्ट में इसकी अपील की। अब एएसजे अनिल कौशिक की अदालत ने 28 अक्तूबर को फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि कोर्ट में सुनवाई व दलीलों में यह बात सामने आई है कि पुलिस जांच के दौरान एक सिम नंबर को कभी जब्त नहीं किया गया। कहा गया कि सिम को नष्ट कर दिया गया है, जबकि अपीलकर्ता के वकील का तर्क है कि आरोपी अब भी सिम का उपयोग कर रहा है। इसलिए इस तथ्य की जांच की आवश्यकता है। कोर्ट का केवल इस बात पर संतुष्ट होना उचित नहीं है कि सिम नष्ट कर दिया गया है, इसलिए सबूतों को नष्ट करने के लिए आईपीसी की धारा 201 जोड़ी गई। यह अदालत मई 2023 में निचली अदालत में दिए गए आदेश को रद्द करती है। साथ ही ट्रायल कोर्ट को उपरोक्त टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए आवेदन पर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश भी दिया गया है। 9 दिसंबर को याचिकाकर्ता ट्रायल में पेश हो सकता है।
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असली मोबाइल नंबर की जगह नष्ट किए बिहार व महाराष्ट्र के पते के नंबर
पीड़ित वकील का कहना है कि पुलिस ने अपनी चालान रिपोर्ट में आरोपी के दो सिम नष्ट बताए हैं, उनमें एक बिहार व दूसरा महाराष्ट्र के पते पर लिया गया है। जबकि जो मोबाइल नंबर आरोपी ने प्रयोग किया था, उसे अब भी प्रयोग कर रहा है। साइबर जांच टीम की रिपोर्ट के बावजूद पुलिस ने असली मोबाइल नंबर को को जब्त नहीं किया। जबकि निचली अदालत में जमानत के बाद आरोपी ट्रायल कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुआ था। उस समय आरोपी ने उसी मोबाइल नंबर का प्रयोग किया, जो पहले फर्जीवाड़ा करते समय प्रयोग किया था।
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