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सिलसिलेवार बम धमाकों का केस : नहीं मिल रहे गवाह, पुलिस ने दाखिल की रिपोर्ट
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रोहतक। शहर के अंदर 25 साल पहले हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के आरोपी अब्दुल करीम टुंडा की सोमवार को जिला अदालत में ऑनलाइन पेशी हुई। राजस्थान की अजमेर जेल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम न होने के कारण ऑनलाइन तकनीकी एप के माध्यम से पेशी करवाई गई। साथ ही पुलिस ने अदालत में एक रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें बताया कि केस के गवाह बार-बार प्रयास के बावजूद नहीं मिल रहे। उनकी सार्वजनिक सूचना जारी की जाए। अब मामले की अगली सुनवाई 6 जून को होगी।
मामले के अनुसार 1997 में शहर की पुरानी सब्जी मंडी में शाम के समय अचानक सब्जी की फड़ी पर धमाका हुआ, जिसमें तीन-चार लोग घायल हो गए। इससे मंडी में हड़कंप मच गया। थोड़ी देर बाद किला रोड पर एक रेहड़ी के ऊपर रखे बम से धमाका हो गया। एक साथ दो धमाकों से पुलिस प्रशासन सकते में आ गया। दो साल बाद केस में दिल्ली पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया, जिसे रोहतक लाया गया। उसने खुलासा किया था कि धमाकों के पीछे अब्दुल करीम टुंडा का हाथ है। युवक बाद में अदालत से साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गया, जबकि टुंडा पाकिस्तान के कराची शहर में जाकर रहने लगा। 2015 में दिल्ली की विशेष टीम ने उसे नेपाल बार्डर से दबोच लिया। तभी से उसके खिलाफ जिला अदालत में शहर थाने में दर्ज दो धमाकों का केस चल रहा है। पहले टुंडा यूपी के गाजियाबाद की डासना जेल में बंद था। अब उसे राजस्थान की अजमेर जेल में शिफ्ट किया गया है। केस के अंदर धमाके के समय बना गए आम जनता में से गवाह नहीं मिले हैं। अदालत के अंदर पुलिस ने रिपोर्ट दाखिल करके मांग की है कि गवाहों की सूचना सार्वजनिक की जाए, ताकि पुलिस उन तक पहुंच कर गवाही के लिए अदालत द्वारा जारी पत्र दे सके।
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मामले के अनुसार 1997 में शहर की पुरानी सब्जी मंडी में शाम के समय अचानक सब्जी की फड़ी पर धमाका हुआ, जिसमें तीन-चार लोग घायल हो गए। इससे मंडी में हड़कंप मच गया। थोड़ी देर बाद किला रोड पर एक रेहड़ी के ऊपर रखे बम से धमाका हो गया। एक साथ दो धमाकों से पुलिस प्रशासन सकते में आ गया। दो साल बाद केस में दिल्ली पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया, जिसे रोहतक लाया गया। उसने खुलासा किया था कि धमाकों के पीछे अब्दुल करीम टुंडा का हाथ है। युवक बाद में अदालत से साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गया, जबकि टुंडा पाकिस्तान के कराची शहर में जाकर रहने लगा। 2015 में दिल्ली की विशेष टीम ने उसे नेपाल बार्डर से दबोच लिया। तभी से उसके खिलाफ जिला अदालत में शहर थाने में दर्ज दो धमाकों का केस चल रहा है। पहले टुंडा यूपी के गाजियाबाद की डासना जेल में बंद था। अब उसे राजस्थान की अजमेर जेल में शिफ्ट किया गया है। केस के अंदर धमाके के समय बना गए आम जनता में से गवाह नहीं मिले हैं। अदालत के अंदर पुलिस ने रिपोर्ट दाखिल करके मांग की है कि गवाहों की सूचना सार्वजनिक की जाए, ताकि पुलिस उन तक पहुंच कर गवाही के लिए अदालत द्वारा जारी पत्र दे सके।
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