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Rohtak News: गांधरा की रिंकू के जीवन की किरण बना स्वयं सहायता समूह
Thu, 11 Dec 2025 12:38 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 11 Dec 2025 12:38 AM IST
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28 गांधरा गांव में महिलाओं को जूतों की बिक्री करती नई किरण स्वयं सहायता समूह की सदस्य रिंकू
रोहतक। गांधरा गांव की रहने वाली रिंकू ने न तो एबीए की और न ही पहले उनका व्यापार से दूर-दूर तक नाता था लेकिन महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने मार्केटिंग करना सीखने कर हाल ही में 15 दिनों में 140 जोड़ी जूतों की बिक्री कर 8 हजार रुपये की आमदनी भी कर ली है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम कर रही रिंकू 10वीं कक्षा पास हैं। वे बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2017 में नई किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। उनके स्वयं सहायता समूह के तहत आमदनी बढ़ाने के लिए इस बार उन्होंने 164 जोड़ी जूतों की बिक्री करनी है। आत्मविश्वास से भरी रिंकू का कहना है कि आगामी दिनों में इनकी बिक्री भी करेंगी। समूह के तहत उन्होंने महिलाओं व बच्चों के जूतों की बिक्री की।
इससे पहले उन्होंने प्याज की बिक्री भी की थी। उन्होंने 30 क्विंटल प्याज 20 दिन में ही बेच दिए थे। उन्होंने अकेले ही 6 हजार रुपये आमदनी की। अधिकारियों की ओर से समूह की महिलाओं को मार्केटिंग के गुर सिखाते हुए अगस्त में राजस्थान से लाया गया प्याज उनको बिक्री के लिए दिया गया जिसमें वे खरी उतरीं।
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इस कार्य में उनके साथ कविता, पिंकी व सुनीता भी शामिल रहीं। इसके बाद से उनको मार्केटिंग करनी आ गई और अब उनके समूह को मिली वस्तुओं की बिक्री कर रही हैं। बिक्री के लिए उन्होंने किसी बड़े प्रचार साधन का सहारा नहीं लिया बल्कि समूह की महिलाओं के माध्यम से ही जूतों की बिक्री की है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम कर रही रिंकू 10वीं कक्षा पास हैं। वे बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2017 में नई किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। उनके स्वयं सहायता समूह के तहत आमदनी बढ़ाने के लिए इस बार उन्होंने 164 जोड़ी जूतों की बिक्री करनी है। आत्मविश्वास से भरी रिंकू का कहना है कि आगामी दिनों में इनकी बिक्री भी करेंगी। समूह के तहत उन्होंने महिलाओं व बच्चों के जूतों की बिक्री की।
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इससे पहले उन्होंने प्याज की बिक्री भी की थी। उन्होंने 30 क्विंटल प्याज 20 दिन में ही बेच दिए थे। उन्होंने अकेले ही 6 हजार रुपये आमदनी की। अधिकारियों की ओर से समूह की महिलाओं को मार्केटिंग के गुर सिखाते हुए अगस्त में राजस्थान से लाया गया प्याज उनको बिक्री के लिए दिया गया जिसमें वे खरी उतरीं।
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इस कार्य में उनके साथ कविता, पिंकी व सुनीता भी शामिल रहीं। इसके बाद से उनको मार्केटिंग करनी आ गई और अब उनके समूह को मिली वस्तुओं की बिक्री कर रही हैं। बिक्री के लिए उन्होंने किसी बड़े प्रचार साधन का सहारा नहीं लिया बल्कि समूह की महिलाओं के माध्यम से ही जूतों की बिक्री की है।