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Rohtak News: मोहनलाल बड़ौली को हराकर सांसद बने सतपाल ब्रह्मचारी, 21816 मतों से बाजी मारी

Wed, 05 Jun 2024 02:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2024 02:45 AM IST
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Satpal Brahmachari becomes MP by defeating Mohanlal Baroli, won by 21816 votes
सोनीपत। लोकसभा चुनाव में भाजपा से हुए कड़े मुकाबले के बाद कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी ने भाजपा के मोहनलाल बड़ौली को 21816 मतों से हरा दिया। कांग्रेस ने सोनीपत में 10 साल बाद फिर वापसी की है। सतपाल को 548682 तो भाजपा के मोहनलाल को 526866 मत मिले। नौ में छह विधानसभा सीट जीतकर भी भाजपा हार गई। 22 प्रत्याशियों में 20 की जमानत जब्त हो गई है। बहुजन समाज पार्टी के उमेश कुमार ने 12822 वोट लेकर तीसरा स्थान पाया। इनेलो के अनूप दहिया को 11523 तो जजपा के भूपेंद्र मलिक को 7820 वोट मिले।लोकसभा सीट पर मतगणना के साथ ही करीबी मुकाबला दिखाई देने लगा था। शुरुआत से ही भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर रही। सुबह 8 बजे शुरू हुए मतदान के पहले व दूसरे राउंड से ही कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी ने बढ़त बनानी शुरू कर दी थी। दोपहर को सोनीपत विधानसभा की गिनती शुरू हुई तो वह अचानक मोहनलाल से पिछड़ते दिखाई दिए, लेकिन अंत के सभी राउंड में वह लगातार लीड को बढ़ाते चले गए। आखिर में 21816 मत से वह जीतने में कामयाब रहे। सतपाल को भूपेंद्र हुड्डा का गढ़ कहे जाने वाले बरोदा से सबसे बड़ी लीड मिली, जबकि जुलाना व खरखौदा की लीड ने उनकी जीत आसान बना दी। सोनीपत विधानसभा क्षेत्र की सबसे बड़ी जीत मोहनलाल बड़ौली ने दर्ज, लेकिन राई, गन्नौर, गोहाना विधानसभाओं से वह जीतने में कामयाब रहे, लेकिन अपेक्षित लीड नहीं ले पाने के कारण आखिरी के राउंड में लगातार पिछड़ते गए। वहीं सतपाल ब्रह्मचारी ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा की हार का बदला ले लिया है। पिछले चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भाजपा के रमेश कौशिक से 164864 वोट से हार गए थे। रमेश कौशिक को 587664 तो हुड्डा को 4228800 वोट मिले थे।
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सतपाल ब्रह्मचारी की जीत के तीन कारण



1. कांग्रेस के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का रणनीति बदलना निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने जाट बाहुल सीट पर जींद क्षेत्र के ब्राह्मण चेहरे को मैदान में उतारा।
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2. पिछली बार भूपेंद्र हुड्डा को जींद के तीनों हलकों से हार का सामना करना पड़ा था। जींद क्षेत्र से पहली बार कोई प्रत्याशी सोनीपत का सांसद बन पाया है।
3. सतपाल ब्रह्मचारी के ब्राह्मण होने का भी फायदा मिला। उन्हें ब्राह्मणों के साथ जाटों के वोट मिले।


मोहनलाल बड़ौली की हार के तीन कारण

1़ भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण भितरघात रहा। पार्टी के सांसद व विधायक पर भाजपा प्रत्याशी ने शुरुआत में भितरघात के आरोप लगाए थे।
2. राई विधानसभा का विधायक होते हुए मोहनलाल बड़ौली कई कारणों से अपने ही क्षेत्र के मतदाताओं के निशाने पर रहे।

3. मोहनलाल बड़ौली केवल मोदी व राम मंदिर के नाम पर वोट मांगते रहे जबकि राई में अपने कार्यों का मतदाताओं के सामने जिक्र तक नहीं किया।
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