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Rohtak News: बच्चों में 20 तो बड़ों में 60 वर्ष आयु में अधिक दिखता है सरकोमा कैंसर

Wed, 22 Jul 2026 06:10 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Wed, 22 Jul 2026 06:10 PM IST
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Sarcoma cancer is more commonly observed in children aged 20 and adults aged 60.
संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहतक। स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति एचके अग्रवाल ने मंगलवार को सरकोमा एवं हड्डी के कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और उचित उपचार से कैंसर रोगी पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। हड्डी में सूजन, शरीर में गांठ या लगातार दर्द कैंसर के संभावित लक्षण हो सकते हैं। इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
यह कार्यक्रम हड्डी रोग विभाग के विभागाध्यक्ष रूप सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इसमें बच्चों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए सरकोमा के लक्षणों को समझाया। कुलपति ने बताया कि पीजीआई में हर प्रकार के कैंसर का उपचार उपलब्ध है।
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कुलसचिव ने सरकोमा को एक दुर्लभ कैंसर बताया। यह वयस्कों में करीब एक फीसदी और बच्चों में 15 से 20 फीसदी ठोस कैंसर होता है। इसके सौ से अधिक प्रकार होते हैं इसलिए इसका उपचार विशेषज्ञ केंद्र में ही होना चाहिए।
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पीजीआई हड्डी एवं कोमल ऊतक ट्यूमर के उपचार केंद्रों में से एक है। यहां हर महीने 15 से 20 छोटे-बड़े हड्डी व कोमल ऊतक के ट्यूमर के सफल ऑपरेशन किए जाते हैं। यह रोग बच्चों में 10 से 20 वर्ष और बड़ों में 50 से 60 वर्ष की आयु में अधिक देखा जाता है।
आधुनिक उपचार और जांच
हड्डी व कोमल ऊतक ट्यूमर के रोगियों की विशेष जांच हड्डी रोग ओपीडी के कमरा संख्या 30 में होती है। यह जांच हर सोमवार और वीरवार को की जाती है। विभाग में अंग बचाने वाली सर्जरी जैसी अत्याधुनिक विधियां उपयोग की जा रही हैं। इनमें धातु प्रत्यारोपण और जैविक पुनर्निर्माण भी शामिल हैं।


निशुल्क इलाज और लाभ
धातु प्रत्यारोपण सर्जरी में कैंसर वाली हड्डी हटाकर विशेष धातु का जोड़ लगाया जाता है। निजी अस्पतालों में इस पर 10 से 15 लाख रुपये खर्च आते हैं लेकिन आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र रोगियों को यह सुविधा निशुल्क दी जा रही है। कार्यक्रम में सरकोमा से ठीक हुए रोगियों को सम्मानित किया गया। पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए।
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