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Rohtak News: कारगिल युद्ध में समुंदर सिंह ने रेंगते हुए उड़ाया था दुश्मन का बंकर
Sat, 27 Jun 2026 04:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sat, 27 Jun 2026 04:12 AM IST
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01-रोहतक के सांघी में बने शहीद समुंदर सिंह के स्मारक स्थल पर मौजूद पत्नी सरोज बाला, भाई रामफल ह
- फोटो : संवाद
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रोहित राठौर
रोहतक। कारगिल युद्ध में तोलोलिंग की ऊंचाई, सामने दुश्मन की मशीनगन और सीने में लगती गोलियां फिर भी कदम नहीं रुक पाए थे। सांघी गांव के समुंदर सिंह 18 ग्रेनेडियर्स के वो जांबाज थे जिन्होंने रेंगकर दुश्मन का बंकर उड़ाया और घुसपैठियों को ढेर कर तोलोलिंग पॉइंट फतह किया था।
शहीद समुंदर सिंह की पत्नी सरोज बाला बताती हैं कि उन्हें 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में जिम्मेदारी मिली थी। 1999 के कारगिल युद्ध में उनकी यूनिट को तोलोलिंग पॉइंट पर कब्जा करने का टास्क मिला था। उन्होंने बताया कि 3 मई 1999 को दुश्मन की घुसपैठ का पता चला और भारतीय सेना ने घुसपैठियों को भारतीय इलाके से खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया था।
उन्होंने बताया कि 18 ग्रेनेडियर्स के सैनिकों को 2 जून 1999 को तोलोलिंग पर कब्जा करने के लिए हमला करने का आदेश मिला था। लेफ्टिनेंट कर्नल आर विश्वनाथन के नेतृत्व में हुए हमले ने दुश्मन को पूरी तरह से चौंका दिया था।
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यह हमला 15,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई वाले मुश्किल भरे रास्ते और इलाके से किया गया था। नायक समुद्र सिंह उस ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम का हिस्सा थे। 2 जून को घुसपैठियों से आमने-सामने की लड़ाई में लेफ्टिनेंट कर्नल विश्वनाथन सहित कई जवान शहीद हो गए थे। संवाद
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15 अगस्त 1999 को मरणोपरांत सेना मेडल से किया गया था सम्मानित
सरोज बाला बताती हैं कि 2 जून को नायक समुंदर सिंह ने तीन जवानों के साथ 8-10 घुसपैठियों वाले तोलोलिंग के बंकर पर धावा बोल दिया। इसी दौरान समुंदर सिंह को सीने के ऊपर दाहिने कंधे के नीचे एक गोली लगी थी लेकिन इसके बाद भी दुश्मन के बंकर में ग्रेनेड फेंका और बचे हुए घुसपैठियों को मार गिराया था। वहीं, फिर एक एलएमजी का ब्रसट लगने से 2 जून की रात देश की रक्षा करते हुए वे शहीद हो गए थे। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने पर समुंदर सिंह को 15 अगस्त 1999 को मरणोपरांत सेना मेडल से राष्ट्रपति की ओर से सम्मानित किया गया था।
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शहीद परिवार को नहीं मिल पाई ट्रेनों में एयर कंडीशनर यात्रा की सुविधा
शहीद समुंदर के भाई रामफल हुड्डा ने बताया कि पत्नी सरोज बाला, बेटा अर्जुन हुड्डा, पुत्रवधू शिखा और पौत्र ध्रुव हुड्डा सेक्टर-14 में रह रहे हैं। अर्जुन मार्केटिंग बोर्ड में कनिष्ठ अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। रामफल हुड्डा ने बताया कि रेल सुविधा के लिए परिवार को एयर कंडीशनर यात्रा की सुविधा नहीं मिल पाई। इसके लिए फौज की ओर से पास के माध्यम कोटा दिया जाता है। वहीं, एयर कंसेशन पास सुविधा भी शहीद सैनिक के परिवार को नहीं मिल पाई है।
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रोहतक। कारगिल युद्ध में तोलोलिंग की ऊंचाई, सामने दुश्मन की मशीनगन और सीने में लगती गोलियां फिर भी कदम नहीं रुक पाए थे। सांघी गांव के समुंदर सिंह 18 ग्रेनेडियर्स के वो जांबाज थे जिन्होंने रेंगकर दुश्मन का बंकर उड़ाया और घुसपैठियों को ढेर कर तोलोलिंग पॉइंट फतह किया था।
शहीद समुंदर सिंह की पत्नी सरोज बाला बताती हैं कि उन्हें 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में जिम्मेदारी मिली थी। 1999 के कारगिल युद्ध में उनकी यूनिट को तोलोलिंग पॉइंट पर कब्जा करने का टास्क मिला था। उन्होंने बताया कि 3 मई 1999 को दुश्मन की घुसपैठ का पता चला और भारतीय सेना ने घुसपैठियों को भारतीय इलाके से खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया था।
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उन्होंने बताया कि 18 ग्रेनेडियर्स के सैनिकों को 2 जून 1999 को तोलोलिंग पर कब्जा करने के लिए हमला करने का आदेश मिला था। लेफ्टिनेंट कर्नल आर विश्वनाथन के नेतृत्व में हुए हमले ने दुश्मन को पूरी तरह से चौंका दिया था।
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यह हमला 15,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई वाले मुश्किल भरे रास्ते और इलाके से किया गया था। नायक समुद्र सिंह उस ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम का हिस्सा थे। 2 जून को घुसपैठियों से आमने-सामने की लड़ाई में लेफ्टिनेंट कर्नल विश्वनाथन सहित कई जवान शहीद हो गए थे। संवाद
15 अगस्त 1999 को मरणोपरांत सेना मेडल से किया गया था सम्मानित
सरोज बाला बताती हैं कि 2 जून को नायक समुंदर सिंह ने तीन जवानों के साथ 8-10 घुसपैठियों वाले तोलोलिंग के बंकर पर धावा बोल दिया। इसी दौरान समुंदर सिंह को सीने के ऊपर दाहिने कंधे के नीचे एक गोली लगी थी लेकिन इसके बाद भी दुश्मन के बंकर में ग्रेनेड फेंका और बचे हुए घुसपैठियों को मार गिराया था। वहीं, फिर एक एलएमजी का ब्रसट लगने से 2 जून की रात देश की रक्षा करते हुए वे शहीद हो गए थे। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने पर समुंदर सिंह को 15 अगस्त 1999 को मरणोपरांत सेना मेडल से राष्ट्रपति की ओर से सम्मानित किया गया था।
शहीद परिवार को नहीं मिल पाई ट्रेनों में एयर कंडीशनर यात्रा की सुविधा
शहीद समुंदर के भाई रामफल हुड्डा ने बताया कि पत्नी सरोज बाला, बेटा अर्जुन हुड्डा, पुत्रवधू शिखा और पौत्र ध्रुव हुड्डा सेक्टर-14 में रह रहे हैं। अर्जुन मार्केटिंग बोर्ड में कनिष्ठ अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। रामफल हुड्डा ने बताया कि रेल सुविधा के लिए परिवार को एयर कंडीशनर यात्रा की सुविधा नहीं मिल पाई। इसके लिए फौज की ओर से पास के माध्यम कोटा दिया जाता है। वहीं, एयर कंसेशन पास सुविधा भी शहीद सैनिक के परिवार को नहीं मिल पाई है।

01-रोहतक के सांघी में बने शहीद समुंदर सिंह के स्मारक स्थल पर मौजूद पत्नी सरोज बाला, भाई रामफल ह- फोटो : संवाद

01-रोहतक के सांघी में बने शहीद समुंदर सिंह के स्मारक स्थल पर मौजूद पत्नी सरोज बाला, भाई रामफल ह- फोटो : संवाद