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सुरक्षित इंटरनेट डे आज : संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले रुकें, जांचें और आगे बढ़ें

Wed, 11 Feb 2026 02:55 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 02:55 AM IST
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Safer Internet Day today: Stop, check and proceed before clicking on suspicious links
रोहतक। इंटरनेट का गलत प्रयोग कर साइबर ठग रोज 6.90 लाख रुपये खातों से निकाल रहे हैं। जिले में 25 माह में एक लाख से ज्यादा ठगी की 266 एफआईआर दर्ज की गई हैं। साइबर एक्सपर्ट निशांत का कहना है कि संदिग्ध कॉल रिसीव करने या लिंक पर क्लिक करने से पहले रुकें, जांच करें और तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें। ऐसा कर साइबर ठगी से बच सकते हैं।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में साइबर एक्सपर्ट निशांत ने बताया कि 70 प्रतिशत मामलों में ठग लालच देकर आम लोगों को अपने जाल में फंसाते हैंं। जैसे लॉटरी का झांसा, निवेश में कमीशन, वर्क फ्रोम होम व नौकरी लगने का लालच देना शामिल हैं। दूसरा, सीबीआई, पुलिस या दूसरी केंद्रीय एजेंसी के नाम पर डर दिखाकर हाउस अरेस्ट किया जाता है। तीसरा, 10 प्रतिशत मामलों में गलत फाइल डाउनलोड करवाकर वारदात की जा रही हैं।
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साइबर ठगी के तरीके
पहचान चोरी करना : साइबर ठग निजी जानकारी चोरी कर ठगी को अंजाम देता है। उदाहरण के तौर पर व्यक्ति विशेष के परिचित तीसरे व्यक्ति को झांसे में लेकर ठगना।
रिकाॅर्ड चोरी करना : बैंक की एप, रिकाॅर्ड या मिलते-जुलते कागजात भेजकर ठगी करना।
वेबसाइट हैक : हैकर दूसरे की वेबसाइट पर एक्सेस और कंट्रोल पा लेता है। वह वेबसाइट की जानकारी में हेरफेर या बदलाव भी कर सकता है। यह पॉलिटिकल मकसद पूरा करने या पैसे के लिए किया जा सकता है।
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पासवर्ड अटैक : पासवर्ड अटैक कंप्यूटर सिस्टम सिक्योरिटी के लिए एक तरह का खतरा है जहां हैकर अटैक कर आमतौर पर पासवर्ड का एक्सेस पाने के तरीके आजमाते हैं। वे पासवर्ड प्रोग्राम का गलत अंदाजा लगाकर सही पासवर्ड ढूंढते हैं और सिस्टम में एंट्री पा लेते हैं।
ब्लूटूथ सर्फिंग : साइबर ठग बिना इजाजत जानकारी ले लेता है। इसके लिए ब्लूटूथ की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है।
सॉफ्टवेयर पायरेसी : साइबर ठग असली प्रोग्राम की गैरकानूनी कॉपी करके या असली जैसा दिखाने के लिए प्रोडक्ट की नकली कॉपी बनाकर ठगी करते हैं।
ट्रोजन अटैक: यह एक बिना इजाजत वाला प्रोग्राम है। इसमें हैकर किसी दूसरे के कंप्यूटर पर कंट्रोल कर लेता है। इससे दूसरे के कंप्यूटर में इंस्टॉल करने का सबसे आम तरीका ईमेल के जरिए है।
स्कैम : इन्वेस्टमेंट, वर्क फ्रॉम होम या टास्क पूरा करना।
एपीके फाइल : ई-चालान, आरटीओ चालान या शादी का कार्ड भेजने के नाम पर एपीके फाइल भेजकर गैर कानूनी तरीके से डाउनलोड करवाना।
ऑनलाइन ग्रूमिंग : नाबालिगों के साथ ऑनलाइन गलत आचरण करना। साथ ही इंटरनेट से मोबाइल पर प्राइवेट व पर्सनल वीडियो भेजना।
जालसाजी : डिजिटल मीडियम का इस्तेमाल करके चेक जारी करना।
कंप्यूटर में तोड़फोड़ : मैलवेयर की मदद से कंप्यूटर पर कंट्रोल करना।
जान-पहचान का दिखावा करना और फिर पैसे मांगना।
मेट्रिमोनियल साइट्स फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेशन या क्रेडिट कार्ड फ्रॉड।
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यूं बचें साइबर क्राइम से
कम से कम 12-16 अक्षरों का मजबूत पासवर्ड बनाएं। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (प्रमाणीकरण) लागू करें। इसमें लॉगिन के लिए पासवर्ड के अलावा मोबाइल पर ओटीपी आएगा। इससे अकाउंट सुरक्षित रहेगा। संदिग्ध लिंक या ई-मेल पर क्लिक न करें। सोशल मीडिया पर जन्मतिथि, पता या फोन नंबर सार्वजनिक न रखें। पब्लिक वाई-फाई से बचें, एंटीवायरस सॉफ्टवेयर अपडेट रखें। स्क्रीन टाइम सीमित रखें और साइबर बुलिंग की रिपोर्ट करें, डिवाइस पर स्क्रीन लॉक और सॉफ्टवेयर अपडेट हमेशा चालू रखें। माता-पिता कंट्रोल एप का उपयोग करें और सकारात्मक ऑनलाइन व्यवहार अपनाकर बच्चों पर नजर रखें।
ठगी की सूचना जितनी जल्द 1930 पर देंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक
2024 में साइबर ठगी की वारदात रोकने व ठगों को गिरफ्तार करने के लिए सेक्टर-14 में जिलास्तरीय साइबर क्राइम थाना खोला गया। अधिकारियों ने तय किया कि एक लाख की ठगी तक की एफआईआर इस थाने में दर्ज होंगी। इससे कम की ठगी की एफआईआर क्षेत्र के थानों में होंगी। 25 माह में साइबर क्राइम थाने में 266 एफआईआर दर्ज हुई हैं। इसमें 53.20 करोड़ से ज्यादा की राशि ठगी गई। एक्सपर्ट का कहना है कि ठगी की सूचना जितनी जल्दी हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दी जाती है, पैसे वापस मिलने उतनी संभावना ज्यादा रहती है, क्योंकि पुलिस उस अकाउंट को फ्रीज करवा देती है जिसमें राशि जाती है। साइबर केसों में रिकवरी 50 प्रतिशत से भी कम है।

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एक लाख से ज्यादा की ठगी
साल 2024 में 75, वर्ष 2025 में 175, वर्ष 2026 में एक लाख से ज्यादा की ठगी की अभी तक 16 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।
वर्जन
किसी भी प्रक्रिया को करने पहले सोच-विचार करें। इसके बाद जांच पड़ताल करें। कहीं जालसाजी तो नहीं हो रही। इसके बाद आगे बढ़ें। साथ में मजबूत पासवर्ड बनाकर सतर्क रहते हुए साइबर क्राइम से बच सकते हैं। - एसआई निशांत, साइबर क्राइम थाना
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