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Rohtak News: ग्रामीण चौकीदारों ने मांगों को लेकर किया प्रदर्शन
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10jjrp14 झज्जर लघु सचिवालय में अपनी मांगो को लेकर तहसीलदार को ज्ञापन देते हुए ग्रामीण सफाई कर्
झज्जर। जिले के ग्रामीण चौकीदार ने मांगों को लेकर बुधवार को लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। इसकी अध्यक्षता नरेश व संचालन दया किशन ने किया। प्रदर्शन के बाद तहसीलदार को सरकार के नाम का ज्ञापन सौंपा गया। जिला प्रधान राजेंद्र सुलोदा ने कहा कि सरकार ग्रामीण चौकीदारों की तरफ अनदेखा कर रही है।
बार-बार धरना प्रदर्शन करने के बावजूद केवल 11 हजार रुपये देती है, जिसमें ग्रामीण चौकीदारों का गुजरा होना बड़ा मुश्किल है। ग्रामीण चौकीदार 24 घंटे कार्य करता है। शासन से लेकर प्रशासन तक और गांव के अंदर जन-जन तक जाकर लोगों को मुनादी के जरिए सूचना देने का काम करता है। पटवारी के साथ खेतों की गिरदावरी करवाना, पुलिस थाना से आए हुए कर्मचारियों के साथ गांव में साथ रहने के काम भी ग्रामीण चौकीदार करता है।
बदले में केवल 11 हजार रुपये दिए जाते हैं। किसी कारण से ग्रामीण चौकीदार की मृत्यु हो जाने पर 10 लाख रुपए दिए जाएं, ताकि उसके परिवार का गुजारा हो सके। जो खाली पद हैं, उनको जल्द से जल्द भरा जाए, ग्रामीण चौकीदारों को पक्का किया जाए। जब तक पक्का नहीं करती न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये दिया जाए। सरकार की 12 तारीख को जो कैबिनेट बैठक है, उसमें ग्रामीण चौकीदारों की मांग को पूरा किया जाए अन्यथा आने वाले विधानसभा के चुनाव में इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।
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बार-बार धरना प्रदर्शन करने के बावजूद केवल 11 हजार रुपये देती है, जिसमें ग्रामीण चौकीदारों का गुजरा होना बड़ा मुश्किल है। ग्रामीण चौकीदार 24 घंटे कार्य करता है। शासन से लेकर प्रशासन तक और गांव के अंदर जन-जन तक जाकर लोगों को मुनादी के जरिए सूचना देने का काम करता है। पटवारी के साथ खेतों की गिरदावरी करवाना, पुलिस थाना से आए हुए कर्मचारियों के साथ गांव में साथ रहने के काम भी ग्रामीण चौकीदार करता है।
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बदले में केवल 11 हजार रुपये दिए जाते हैं। किसी कारण से ग्रामीण चौकीदार की मृत्यु हो जाने पर 10 लाख रुपए दिए जाएं, ताकि उसके परिवार का गुजारा हो सके। जो खाली पद हैं, उनको जल्द से जल्द भरा जाए, ग्रामीण चौकीदारों को पक्का किया जाए। जब तक पक्का नहीं करती न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये दिया जाए। सरकार की 12 तारीख को जो कैबिनेट बैठक है, उसमें ग्रामीण चौकीदारों की मांग को पूरा किया जाए अन्यथा आने वाले विधानसभा के चुनाव में इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।
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