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नोटबंदी के 50 दिन पूरे, पटरी पर नहीं लौटी जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 29 Dec 2016 02:09 AM IST
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दो हजार के नोट लेकर फुटकर के लिए घूम रहे हैं लोग
- फोटो : amar ujala
नोटबंदी को लागू हुए बुधवार को 50 दिन पूरे हो गए, लेकिन इसकी वजह से शुरू हुई लोगों की परेशानियां दूर नहीं हो पाईं हैं। जबकि इतने दिनों में सरकार की ओर से 60 से अधिक नियम लागू किये गए। लोगों को दिनभर और रात में भी बैंकों और एटीएम की कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। इक्का-दुक्का स्थानों को छोड़कर हालात जस के तस हैं। नकदी के लिए दिन निकलते ही लोग बैंकों में पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। इसके बावजूद पैसे मिलने की कोई गारंटी नहीं होती है। तमाम दावों के बावजूद सभी बैंकों के अधिकतर एटीएम बंद पड़े हैं। शहर में आठ-दस एटीएम यदि चलते भी हैं तो लंबी कतार लग जाती है।
नोटबंदी को सफल बनाने के लिए सरकार ने कैशलेस सिस्टम लागू करने पर जोर दिया, लेकिन इसे भी लागू नहीं किया जा सका है। हालांकि, शासन प्रशासन की ओर से इस बारे में जागरूक जरूर किया जा रहा है, लेकिन अधिकतर लोगों ने इसे नहीं अपनाया है। इसी तरह ऑनलाइन और चेक से भुगतान के लिए लोगों को जागरूक किया गया, लेकिन इसे भी पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। बैंकों ने अपने-अपने एप जारी किए। फिर भी न तो बैंकों में लाइन कम हुई न ही एटीएम में। कारोबारियों ने बैंकों में स्वैप मशीनों के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन मशीनें नहीं मिल पा रही हैं।
हो रही है फुटकर की समस्या
नकदी के बाद फुटकर की समस्या खड़ी हो गई है। दिन भर लाइन में लगने के बाद जिन लोगों को बैंकों की ओर से पैसे मिल रहे हैं उन्हें फुटकर के लिए भटकना पड़ रहा है। अधिकतर बैंकों से उपभोक्ताओं को दो हजार रुपये के नोट दिए जा रहे हैं। दो हजार के नोट लेकर जब लोग बाजारों में जा रहे हैं तो फुटकर की समस्या आ रही है। दो हजार के फुटकर भी जल्दी नहीं मिल रहे हैं। स्वैप मशीनें सिर्फ बैंकों और पेट्रोल पंपों पर ही नजर आ रही हैं।
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शैक्षणिक संस्थान भी नहीं हो पाए कैशलेस
नोटबंदी के बाद एमडीयू समेत कई कॉलेज खुद को कैशलेस होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। यूनिवर्सिटी हो या कॉलेज अथवा अन्य शैक्षणिक संस्थान कोई भी पूरी तरह से कैशलेस नहीं हुआ है। हालांकि, प्रयास चल रहे हैं।
रेलवे और रोडवेज में नहीं पहुंची स्वैप मशीन
रेलवे और रोडवेज ऐसे विभाग हैं जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग यात्राएं करते हैं और भुगतान करते हैं। लेकिन यात्रियों को स्वैप मशीन की सुविधा न तो रेवले में मिल रही है न ही रोडवेज में। लोगों के टिकट कैश लेकर ही काटे जा रहे हैं।
कुछ ही दुकानों पर उपलब्ध है स्वैप मशीन
बाजार में सर्राफा की दुकानों और बड़े व्यापारियों के पास ही स्वैप मशीन और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मौजूद है। कई बड़ी कपड़ा दुकानों और बर्तन समेत अन्य दुकानों पर न तो स्वैप मशीनें हैं न ही ऑनलाइन भुगतान की सुविधा है। इन दुकानों पर जब बैंक से दो हजार रुपये के नोट लेकर ग्राहक जाता है तो उसे फुटकर के लिए भटकना पड़ता है।
पुलिस नहीं कैशलेस
पुलिस विभाग भी नहीं हो पाया है कैशलेस। चालान काटने के लिए केवल एक जगह स्वैप मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा पुलिस लाइन से लेकर सड़क पर किसी भी जगह चालान कैश में भुगतना पड़ रहा है।
यह बोले अधिकारी
पचास दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन अभी कोई नया आदेश नहीं आया है। जैसे ही कोई नया आदेश आएगा, उसी के अनुसार काम किया जाएगा।
- नरेश बंसल, लीड बैंक अधिकारी, पंजाब नेशनल बैंक
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नोटबंदी को सफल बनाने के लिए सरकार ने कैशलेस सिस्टम लागू करने पर जोर दिया, लेकिन इसे भी लागू नहीं किया जा सका है। हालांकि, शासन प्रशासन की ओर से इस बारे में जागरूक जरूर किया जा रहा है, लेकिन अधिकतर लोगों ने इसे नहीं अपनाया है। इसी तरह ऑनलाइन और चेक से भुगतान के लिए लोगों को जागरूक किया गया, लेकिन इसे भी पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है। बैंकों ने अपने-अपने एप जारी किए। फिर भी न तो बैंकों में लाइन कम हुई न ही एटीएम में। कारोबारियों ने बैंकों में स्वैप मशीनों के लिए आवेदन कर रखा है, लेकिन मशीनें नहीं मिल पा रही हैं।
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हो रही है फुटकर की समस्या
नकदी के बाद फुटकर की समस्या खड़ी हो गई है। दिन भर लाइन में लगने के बाद जिन लोगों को बैंकों की ओर से पैसे मिल रहे हैं उन्हें फुटकर के लिए भटकना पड़ रहा है। अधिकतर बैंकों से उपभोक्ताओं को दो हजार रुपये के नोट दिए जा रहे हैं। दो हजार के नोट लेकर जब लोग बाजारों में जा रहे हैं तो फुटकर की समस्या आ रही है। दो हजार के फुटकर भी जल्दी नहीं मिल रहे हैं। स्वैप मशीनें सिर्फ बैंकों और पेट्रोल पंपों पर ही नजर आ रही हैं।
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शैक्षणिक संस्थान भी नहीं हो पाए कैशलेस
नोटबंदी के बाद एमडीयू समेत कई कॉलेज खुद को कैशलेस होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। यूनिवर्सिटी हो या कॉलेज अथवा अन्य शैक्षणिक संस्थान कोई भी पूरी तरह से कैशलेस नहीं हुआ है। हालांकि, प्रयास चल रहे हैं।
रेलवे और रोडवेज में नहीं पहुंची स्वैप मशीन
रेलवे और रोडवेज ऐसे विभाग हैं जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग यात्राएं करते हैं और भुगतान करते हैं। लेकिन यात्रियों को स्वैप मशीन की सुविधा न तो रेवले में मिल रही है न ही रोडवेज में। लोगों के टिकट कैश लेकर ही काटे जा रहे हैं।
कुछ ही दुकानों पर उपलब्ध है स्वैप मशीन
बाजार में सर्राफा की दुकानों और बड़े व्यापारियों के पास ही स्वैप मशीन और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मौजूद है। कई बड़ी कपड़ा दुकानों और बर्तन समेत अन्य दुकानों पर न तो स्वैप मशीनें हैं न ही ऑनलाइन भुगतान की सुविधा है। इन दुकानों पर जब बैंक से दो हजार रुपये के नोट लेकर ग्राहक जाता है तो उसे फुटकर के लिए भटकना पड़ता है।
पुलिस नहीं कैशलेस
पुलिस विभाग भी नहीं हो पाया है कैशलेस। चालान काटने के लिए केवल एक जगह स्वैप मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा पुलिस लाइन से लेकर सड़क पर किसी भी जगह चालान कैश में भुगतना पड़ रहा है।
यह बोले अधिकारी
पचास दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन अभी कोई नया आदेश नहीं आया है। जैसे ही कोई नया आदेश आएगा, उसी के अनुसार काम किया जाएगा।
- नरेश बंसल, लीड बैंक अधिकारी, पंजाब नेशनल बैंक