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Rohtak News: भरपेट खाने के लिए हॉकी खेलने वाली रोशनी ने झारखंड को बनाया राष्ट्रीय स्कूली हॉकी में चैंपियन
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27सीटीके25... रोशनी। संवाद
रोहतक। प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। फिर परिस्थितियां भले विपरीत ही क्यों न हो। झारखंड टीम को अपने दम पर 68वीं राष्ट्रीय स्कूली हॉकी स्पर्धा में चैंपियन का खिताब दिलाने वाली रोशनी कुछ ऐसी ही प्रतिभा की धनी है। फाइनल में शानदार प्रदर्शन करने वाली इस खिलाड़ी ने स्पर्धा में कुल 14 गोल दागे। यह किसी खिलाड़ी का स्पर्धा में सबसे अधिक स्कोर रहा। उसके आक्रमक खेल से ही टीम ने लगातार जीत हासिल की। चैंपियन ट्राफी जीतने पर इस खिलाडी को वूमेन ऑफ टूनार्मेंट के खिताब से नवाजा गया। इस उपलब्धि के लिए अमर उजाला ने खिलाड़ी से विशेष बातचीत की।
मूलरूप से झारखंड के तोरपा खंड के गांव उयूर निवासी रोशनी ने बताया कि वह पिछले पांच साल से हॉकी खेल रही है। पहली बार 11 साल की उम्र में (वर्ष 2019) उसने हाॅकी थामी थी। उस समय गांव या आसपास होने वाले खेलों में जीतने पर खिलाड़ियों को अच्छा खाना दिया जाता था। इस खाने के लिए नंगे पांव कच्चे मैदान पर लड़कों के साथ हॉकी खेली। जीत के बाद मिलने वाला भोजन पेट भर कर खाती। पांच भाई बहनों के लिए किसान पिता अभिराम के लिए पर्याप्त भोजन जुटाना भी मुश्किल था। ऐसे में खेलना बेहतर विकल्प लगा और लड़कों के बीच हॉकी लेकर उतर गई। समय के साथ खेल सुधरा। स्कूल की टीम में जगह मिली। प्रदर्शन से कोच प्रभावित हुए और यहां राष्ट्रीय स्तरीय स्पर्धा तक खेलने का अवसर मिला।
भारतीय कप्तान सलीमा से मिली प्रेरणा
कच्ची मिट्टी के मैदान में तैयारी कर एस्ट्रोटर्फ तक पहुंची रोशनी अब तक रांची लीग व सब जूनियर प्रतियोगिता में खेल चुकी है। यहां भी इसका प्रदर्शन शानदार रहा। रोशनी ने बताया कि वह भारतीय महिला टीम की कप्तान सलीमा टेटे से प्रेरित है। सलीमा व रोशनी दोनों एक ही इलाके की रहने वाली हैं। पहली बार रोशनी व सलीमा की मुलाकात खेल विभाग की ओर से करीब चार साल पूर्व लगाए गए शिविर में मुलाकात हुई थी। यहीं वह उससे प्रभावित हुई।
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मनदीप केरकेट्टा को मैन ऑफ द मैच
ओडिशा के मनदीप केरकेट्टा को मैन ऑफ द मैच चुने गए। इस खिलाड़ी ने प्रतियोगिता में कुल 10 गोल किए। क्वार्टर फाइनल मैच में दो व सेमीफाइनल मैच में एक गोल किया। उन्होंने बताया कि यहां का खाना-पान व मौसम शानदार है। चारों ओर हरियाली नजर आती है। यहां आकर हरियाणवी संस्कृति को करीब देखने व समझने का मौका मिला। स्पर्धा में हुआ स्वागत सत्कार भी हमेशा याद रहेगा। खेल के साथ नए दोस्त मिले। नया सीखने का मौका मिला।
झारखंड की शांति कुमारी का संघर्ष भी कम नहीं
राष्ट्रीय स्कूली हाॅकी स्पर्धा में 12 गोल दागने वाली झारखंड की शांति कुमारी का संघर्ष भी कम नहीं है। इस खिलाड़ी ने बताया कि उसके पिता उनके साथ नहीं रहते हैं। मां दूसरों के घरों में काम कर परिवार चलाती है। मां ने आर्थिक तंगी के साथ बड़ी मुश्किल से हम चार भाई बहनों को स्कूल तक पहुंचाया है। यहां पढ़ाई के साथ मैंने हॉकी खेलना शुरू किया। स्कूल से खेल का सामान मिलता है। कोच भी मदद करते हैं। शांति को हरियाणा का स्वागत सत्कार ही नहीं, खान-पान भी खूब पसंद आया।
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मूलरूप से झारखंड के तोरपा खंड के गांव उयूर निवासी रोशनी ने बताया कि वह पिछले पांच साल से हॉकी खेल रही है। पहली बार 11 साल की उम्र में (वर्ष 2019) उसने हाॅकी थामी थी। उस समय गांव या आसपास होने वाले खेलों में जीतने पर खिलाड़ियों को अच्छा खाना दिया जाता था। इस खाने के लिए नंगे पांव कच्चे मैदान पर लड़कों के साथ हॉकी खेली। जीत के बाद मिलने वाला भोजन पेट भर कर खाती। पांच भाई बहनों के लिए किसान पिता अभिराम के लिए पर्याप्त भोजन जुटाना भी मुश्किल था। ऐसे में खेलना बेहतर विकल्प लगा और लड़कों के बीच हॉकी लेकर उतर गई। समय के साथ खेल सुधरा। स्कूल की टीम में जगह मिली। प्रदर्शन से कोच प्रभावित हुए और यहां राष्ट्रीय स्तरीय स्पर्धा तक खेलने का अवसर मिला।
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भारतीय कप्तान सलीमा से मिली प्रेरणा
कच्ची मिट्टी के मैदान में तैयारी कर एस्ट्रोटर्फ तक पहुंची रोशनी अब तक रांची लीग व सब जूनियर प्रतियोगिता में खेल चुकी है। यहां भी इसका प्रदर्शन शानदार रहा। रोशनी ने बताया कि वह भारतीय महिला टीम की कप्तान सलीमा टेटे से प्रेरित है। सलीमा व रोशनी दोनों एक ही इलाके की रहने वाली हैं। पहली बार रोशनी व सलीमा की मुलाकात खेल विभाग की ओर से करीब चार साल पूर्व लगाए गए शिविर में मुलाकात हुई थी। यहीं वह उससे प्रभावित हुई।
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मनदीप केरकेट्टा को मैन ऑफ द मैच
ओडिशा के मनदीप केरकेट्टा को मैन ऑफ द मैच चुने गए। इस खिलाड़ी ने प्रतियोगिता में कुल 10 गोल किए। क्वार्टर फाइनल मैच में दो व सेमीफाइनल मैच में एक गोल किया। उन्होंने बताया कि यहां का खाना-पान व मौसम शानदार है। चारों ओर हरियाली नजर आती है। यहां आकर हरियाणवी संस्कृति को करीब देखने व समझने का मौका मिला। स्पर्धा में हुआ स्वागत सत्कार भी हमेशा याद रहेगा। खेल के साथ नए दोस्त मिले। नया सीखने का मौका मिला।
झारखंड की शांति कुमारी का संघर्ष भी कम नहीं
राष्ट्रीय स्कूली हाॅकी स्पर्धा में 12 गोल दागने वाली झारखंड की शांति कुमारी का संघर्ष भी कम नहीं है। इस खिलाड़ी ने बताया कि उसके पिता उनके साथ नहीं रहते हैं। मां दूसरों के घरों में काम कर परिवार चलाती है। मां ने आर्थिक तंगी के साथ बड़ी मुश्किल से हम चार भाई बहनों को स्कूल तक पहुंचाया है। यहां पढ़ाई के साथ मैंने हॉकी खेलना शुरू किया। स्कूल से खेल का सामान मिलता है। कोच भी मदद करते हैं। शांति को हरियाणा का स्वागत सत्कार ही नहीं, खान-पान भी खूब पसंद आया।

27सीटीके25... रोशनी। संवाद

27सीटीके25... रोशनी। संवाद

27सीटीके25... रोशनी। संवाद