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प्रेरक: सास ने दिया जज्बा तो बहू ने किया कमाल, हरियाणा में जज बन नाम किया रोशन
Wed, 05 Feb 2020 12:07 AM IST
रोहतक ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
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Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2020 12:07 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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रोहतक की बेटी 30 वर्षीय गौरी नारंग की जिद ने आज उसे उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जिसे वह छह साल पहले हासिल करने से चूक गई थी। सोमवार देर शाम पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जारी न्यायिक अधिकारियों की सूची में उसे सामान्य वर्ग के चयनित 14 सफल परीक्षार्थियों में जगह मिली है। गौरी की कामयाबी में उसकी सास मधु सेठी का अहम योगदान है, जिसने बहू को कामयाब बनाने के लिए अहम सहयोग दिया।
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गौरी ने बताया कि उसके पिता गुलशन नारंग रोहतक में जिला भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान हैं। वह अपने बहन व भाइयों में सबसे छोटी है। उसने 12वीं की परीक्षा रोहतक के ही माडल स्कूल से पास की। इसके बाद उसने पंजाब यूनिवर्सिटी से बीएससी की, लेकिन उसका मन न्यायिक सेवाओं में जाने का था। इसके लिए उसने दिल्ली में कोचिंग लेकर परीक्षा दी, लेकिन 2013 में कामयाबी नहीं मिली।
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इससे वह हताश नहीं हुई। पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया। इसी बीच 2016 में उसकी शादी अंबाला सिटी में हो गई। उसने पीयू में ही एलएलएम करने का निर्णय निर्णय लिया। हालांकि 2017 में बेटे तेजस का जन्म हुआ। मां के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद लक्ष्य को ध्यान में रखा। रातभर वह पढ़ाई करती थी तो सास मधु सेठी बेटे को संभालती थी।
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दिसंबर 2018 में उसने हरियाणा से न्यायिक अधिकारी की परीक्षा दी। मार्च 2019 में मुख्य परीक्षा हुई, जिसका परिणाम लंबे समय तक रुका रहा। क्योंकि 109 परीक्षार्थियों में से मात्र 9 ही सफल बताए गए। मामला हाईकोर्ट में पहुंचा, तय हुआ कि मामले में ग्रेस दी जाए। इसके बाद सामान्य वर्ग के 38 परीक्षार्थियों को चंडीगढ़ 28 से 31 जनवरी तक साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। अब 3 फरवरी को हाईकोर्ट की तरफ से परिणाम जारी किया गया है, जिसमें सामान्य वर्ग के 14 परीक्षार्थियों को न्यायिक अधिकारी बनाया गया है।
न्याय के मंदिर में देर है, अंधेर नहीं : गौरी
गौरी का कहना है कि मुझे कामयाब बनाने में सभी परिजनों का सहयोग रहा, लेकिन सास मधु ने सबसे ज्यादा साथ दिया। निर्भया कांड में दोषियों को फांसी की सजा में देरी के सवाल पर गौरी ने कहा कि कानून सबसे के लिए बराबर है। न्याय के मंदिर में देर भले हो जाए, लेकिन अंधेर नहीं है। निर्भया कांड में चाहे दोषियों को फांसी की सजा मिली है, लेकिन उनको कानून ने अपील का अधिकार दिया हुआ है।