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साल के अंतिम दिन नगर निगम में एक करोड़ 10 लाख रुपये जमा हुआ पॉपर्टी टैक्स
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Rohtak Property Tax last get one cror ten lac
रोहतक। नगर निगम में प्रॉपर्टी टैक्स जमा करवाने पर ब्याज माफी छूट के आखिरी दिन सिटीजन की रात आठ बजे तक लाइन लगी रही। इसके चलते पूरे दिन में रिकॉर्ड तोड़ 1 करोड़ 10 लाख रुपये का टैक्स जमा हुआ। जबकि ऑनलाइन राशि इससे अलग है। जबकि सोमवार को 90 लाख रुपये की राशि जमा हुई थी। बकायादारों में शामिल एक निजी स्कूल ने साढ़े 20 लाख रुपये का टैक्स जमा कराया। इतना ही नहीं, डेयरी मालिकों की तो टैक्स दर कम होने के कारण लंबी लाइन लगी रही। करीब 150 डेयरी मालिक अपना बकाया टैक्स जमा कराने पहुंचे।
सरकार की पॉलिसी के तहत पहले दुग्ध डेयरियों से कॉमर्शियल टैक्स वसूला जाता था, जिसकी दर 18 से 45 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक शामिल है। जबकि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने डेयरियों को कॉमर्शियल श्रेणी से निकाल कर इंडस्ट्री की श्रेणी में डाल दिया, जहां की दर मात्र साढ़े 4 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। ऊपर से सरकार ने 31 दिसंबर तक बकाया जमा कराने पर टैक्स माफी की छूट दे रखी थी। इसके चलते डेयरी मालिकों को दोहरा फायदा हो गया। इसके चलते योजना के आखिरी दिन सैकड़ों डेयरी मालिक पहली बार टैक्स की राशि जमा कराने पहुंचे।
निगम की सख्ती बेअसर, बड़े बकायेदार कम ही आए
नगर निगम की सूची में प्रॉपर्टी टैक्स के एक हजार से ज्यादा बड़े बकायेदार हैं, जिनमें 27 करोड़ की राशि फंसी है। साथ ही सरकारी विभागों की तरफ भी 14 करोड़ से ज्यादा की राशि बकाया है। निगम बार-बार बिल्डिंग सील करने की धमकी देता रहा। बावजूद इसके ब्याज माफी का फायदा उठाने के लिए चंद बड़े बकायेदार ही टैक्स जमा कराने आए हैं। अब निगम बचे बकायेदारों की नए सिरे से सूची तैयार कर रहा है।
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सरकार की पॉलिसी के तहत पहले दुग्ध डेयरियों से कॉमर्शियल टैक्स वसूला जाता था, जिसकी दर 18 से 45 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक शामिल है। जबकि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने डेयरियों को कॉमर्शियल श्रेणी से निकाल कर इंडस्ट्री की श्रेणी में डाल दिया, जहां की दर मात्र साढ़े 4 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। ऊपर से सरकार ने 31 दिसंबर तक बकाया जमा कराने पर टैक्स माफी की छूट दे रखी थी। इसके चलते डेयरी मालिकों को दोहरा फायदा हो गया। इसके चलते योजना के आखिरी दिन सैकड़ों डेयरी मालिक पहली बार टैक्स की राशि जमा कराने पहुंचे।
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निगम की सख्ती बेअसर, बड़े बकायेदार कम ही आए
नगर निगम की सूची में प्रॉपर्टी टैक्स के एक हजार से ज्यादा बड़े बकायेदार हैं, जिनमें 27 करोड़ की राशि फंसी है। साथ ही सरकारी विभागों की तरफ भी 14 करोड़ से ज्यादा की राशि बकाया है। निगम बार-बार बिल्डिंग सील करने की धमकी देता रहा। बावजूद इसके ब्याज माफी का फायदा उठाने के लिए चंद बड़े बकायेदार ही टैक्स जमा कराने आए हैं। अब निगम बचे बकायेदारों की नए सिरे से सूची तैयार कर रहा है।
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