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15 साल बाद हत्यारा गिरफ्तार: नाम बदल कर छुपाई पहचान, मजदूरी की, पर नहीं छूटा परिवार से मोह, यही गलती ले डूबी

Tue, 14 Jan 2025 09:17 PM IST
अंकेश ठाकुर माई सिटी रिपोर्टर, रोहतक
माई सिटी रिपोर्टर, रोहतक Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 14 Jan 2025 09:17 PM IST
सार

21 साल पहले युवक की हत्या मामले में फरार चल रहा दोषी 15 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा है। हत्यारा चंद्रभान ने अपनी पहचान छुपाने के लिए नाम बदला, यहां तक कि मजदूरी भी की, लेकिन परिवार से मोह नहीं छूटा और पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

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Rohtak police arrested the murder accused after 15 years
पुलिस हिरासत में दोषी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के रोहतक पुलिस ने हत्या के दोषी को 15 साल बाद गिरफ्तार किया है। शहर की जनता कॉलोनी में 21 साल पहले बेटी से छेड़छाड़ के शक में जींद के युवक नरेंद्र की हत्या करने का दोषी पांच हजार के इनामी चंद्रभान को 15 साल बाद गिरफ्तार किया है। दोषी हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद 2009 में फरार हो गया था, जिसे अब सीआईए प्रथम ने गिरफ्तार किया है। वह यूपी के वाराणसी शहर में दलबीर सिंह के नाम से रह रहा था। परिवार से मोह नहीं छूटा और इसी गलती ने चंद्रभान को दोबारा सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। 
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एसपी नरेंद्र बिजारणिया ने बताया कि अक्तूबर 2003 में जनता कॉलोनी निवासी चंद्रभान ने सिटी थाने में हत्या का मामला दर्ज किया। चंद्रभान का आरोप था कि पड़ोसी प्रमोद, समुंद्र व बालकिशन के साथ उसका झगड़ा था। पहले तो दोनों पक्षों में पंचायती तौर पर समझौता हो गया। इसके बावजूद आरोपियों ने उसके बेटे संजय की पीट-पीट कर हत्या कर दी। साथ ही शव में आग लगा दी। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच की। इसी बीच 13वीं के बाद तुरंत बाद चंद्रभान का परिवार जनता कॉलोनी स्थित मकान को बेचकर भिवानी के जुई में जाकर रहने लगा। दूसरी तरफ पुलिस को जांच में पता चला कि संजय तो जिंदा है। दिसंबर 2003 में पुलिस ने संजय को काबू कर पूछताछ की तो हत्याकांड की असली कहानी खुलकर सामने आई।
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बेटी से छेड़छाड़ के शक में की थी युवक की हत्या
पुलिस के मुताबिक जींद के गांव गतौली निवासी नरेंद्र जनता कॉलोनी में चंद्रभान के मकान के सामने फलों की रेहड़ी लगाता था। चंद्रभान को शक था की नरेंद्र उसकी बेटी से छेड़खानी करता है। इससे नाराज होकर चंद्रभान ने योजना के तहत नरेंद्र को अपने घर बुलाया। पत्नी व बेटे के साथ मिलकर नरेंद्र को दूध में नींद को गोलियां दे दी। इसके बाद नरेंद्र की बेहोशी की हालत में बिजली की डोरी से गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव में आग लगा दी। बचने के लिए नरेंद्र के शव के बेटे संजय का शव बताकर पड़ोसियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करवा दिया।
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हाईकोर्ट से अपील खारिज होने के बाद हुआ था फरार
पुलिस ने हत्या के आरोप में चंद्रभान, उसकी पत्नी व बेटे संजय को गिरफ्तार किया। जिला अदालत ने तीनों को सजा सुनाई। चंद्रभान ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। साथ ही जमानत की अर्जी लगाई। हाईकोर्ट से चंद्रभान को जमानत मिल गई, लेकिन सजा के खिलाफ अपील खारिज हो गई। इसके बाद चंद्रभान अपने दोस्त बिहार निवासी नरेंद्र के साथ यूपी के वाराणसी चला गया। दोनों वहां मजदूरी करने लगे। चंद्रभान ने अपना नाम दलबीर सिंह रख दिया। इधर, सजा पूरी करके चंद्रभान की पत्नी व बेटा संजय जेल से बाहर आ गए। जबकि चंद्रभान को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया। पुलिस ने उसके ऊपर पांच हजार रुपये का इनाम था।


पुलिस ने दबिश देकर दबोचा
पुलिस के मुताबिक चंद्रभान ने लंबे समय तक परिवार से संपर्क नहीं किया। छह माह पहले वह हरियाणा में आ गया। अब पत्नी के साथ भिवानी में रह रहा था। पुलिस ने दबिश देकर उसे रेवाड़ी से धर दबोचा। मंगलवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत के चलते जेल भेज दिया गया।
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