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फरीदाबाद के निजी मेडिकल कॉलेज के साल 2011 बैच के 99 विद्यार्थियों को सीट अलाट
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 29 May 2016 02:26 AM IST
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पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) ने शनिवार को काउंसिलिंग से फरीदाबाद के निजी मेडिकल कॉलेज गोल्ड फील्ड के साल 2011 बैच के 99 विद्यार्थियों को कालेज अलाट कर दिये। इसमें 67 पीजीआईएमएस रोहतक और 19 अग्रोहा में इंटर्नशिप करेंगे, जबकि 13, जिनकी री आई है, उन्हें निजी मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। इनमें सात अंबाला और पांच गुड़गांव के निजी मेडिकल कॉलेज हैं। दूसरे निजी कॉलेज भेजे जाने से जिन 13 छात्रों की री आई है उन्हें फीस के रूप में लाखों रुपये का पटका लगने जा रहा है।
साल 2011 बैच के नितिन मलिक ने बताया कि 13 री वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। जिनकी सप्ली आई है, उनको भारी भरकम फीस चुकानी होगी। जिस वर्ष भी विद्यार्थी की री आई है उसे उस वर्ष से आगे तक की फीस निजी कॉलेज में जमा करानी होगी और इंटर्नशिप के लिए निजी कॉलेज में पांच लाख रुपये फीस जमा करानी होगी। नितिन ने सवाल किया कि जब सरकारी और मैनेजमेंट वालों को सरकारी मेडिकल कॉलेज में रखा जा रहा है तो 13 को ही क्यों फंसाया जा रहा है? नितिन का कहना है कि हम लोग गुड़गांव के मेडिकल कॉलेज में फीस भर चुके हैं, अब दोबारा से दूसरे मेडिकल कॉलेज में भी फीस देनी होगी। नितिन का कहना है कि निजी कॉलेज प्रत्येक वर्ष के 9 लाख 30 हजार रुपये मांग रहे हैं। यदि किसी की फस्ट इयर में री आई है तो अंतिम वर्ष तक की फीस जमा करानी होगी। जबकि वह पिछले कॉलेज में अपनी फीस 5 लाख 60 हजार रुपये जमा कर चुके हैं। अब उन्हें नए कॉलेज में फिर से उसकी फीस के अनुसार पैसे देने होंगे। हैरानी की बात यह भी है कि अंबाला निजी कॉलेज से तो काउंसिलिंग के दौरान कोई नहीं आया, जिससे विद्यार्थियों को इस कॉलेज के बारे में कोई जानकारी भी नहीं मिल पाई।
फिलहाल देनी होगी सरकारी फीस
रोहतक। फरीदाबाद के निजी मेडिकल कॉलेज गोल्ड फील्ड के वर्ष 2014-15 बैच के विद्यार्थियों को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दी है। इस बैच के विद्यार्थियों को फिलहाल सरकारी फीस ही जमा करानी होगी। लेकिन इसका केस चलता रहेगा। मामले का अंतिम फैसला बाद में आएगा।
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वर्ष 2014 में जिन विद्यार्थियों का फरीदाबाद स्थित निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स के लिए नंबर पड़ा था, वह सभी सीट सरकारी थी। निजी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने के बाद इन विद्यार्थियों को चार सरकारी और दो निजी मेडिकल संस्थानों में शिक्षा जारी रखने के लिए मान्य किया गया है। हाईकोर्ट के अनुसार अब चाहे विद्यार्थी सरकारी में हो या निजी में सभी सरकारी फीस ही जमा करेंगे। सूत्रों की मानें तो इस बैच के 64 विद्यार्थियों को सरकारी कॉलेज में सेट किया जा रहा है, जबकि 36 को मैनेजमेंट की सीट में। जबकि पूरे बैच का दाखिला सरकारी सीट पर किया गया था। समस्या यह है कि इसमें से 22 को अंबाला और 14 को गुड़गांव के निजी मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। डीएमईआर के इस निर्देश को 36 विद्यार्थियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर कोर्ट ने छात्रों को अंतरिम राहत दी है, लेकिन अभिभावकों और विद्यार्थियों की मांग है कि उन्हें प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट किया जाए। वहीं, कुछ अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि यदि कुछ को मैनेजमेंट सीट पर ही भेजना था तो फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज में क्या कमी थी? जिस मुद्दे पर फरीदाबाद के निजी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द हुई उसी आधार पर विद्यार्थियों को दूसरे निजी मेडिकल कॉलेज में क्यों भेजा जा रहा है?
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साल 2011 बैच के नितिन मलिक ने बताया कि 13 री वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। जिनकी सप्ली आई है, उनको भारी भरकम फीस चुकानी होगी। जिस वर्ष भी विद्यार्थी की री आई है उसे उस वर्ष से आगे तक की फीस निजी कॉलेज में जमा करानी होगी और इंटर्नशिप के लिए निजी कॉलेज में पांच लाख रुपये फीस जमा करानी होगी। नितिन ने सवाल किया कि जब सरकारी और मैनेजमेंट वालों को सरकारी मेडिकल कॉलेज में रखा जा रहा है तो 13 को ही क्यों फंसाया जा रहा है? नितिन का कहना है कि हम लोग गुड़गांव के मेडिकल कॉलेज में फीस भर चुके हैं, अब दोबारा से दूसरे मेडिकल कॉलेज में भी फीस देनी होगी। नितिन का कहना है कि निजी कॉलेज प्रत्येक वर्ष के 9 लाख 30 हजार रुपये मांग रहे हैं। यदि किसी की फस्ट इयर में री आई है तो अंतिम वर्ष तक की फीस जमा करानी होगी। जबकि वह पिछले कॉलेज में अपनी फीस 5 लाख 60 हजार रुपये जमा कर चुके हैं। अब उन्हें नए कॉलेज में फिर से उसकी फीस के अनुसार पैसे देने होंगे। हैरानी की बात यह भी है कि अंबाला निजी कॉलेज से तो काउंसिलिंग के दौरान कोई नहीं आया, जिससे विद्यार्थियों को इस कॉलेज के बारे में कोई जानकारी भी नहीं मिल पाई।
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फिलहाल देनी होगी सरकारी फीस
रोहतक। फरीदाबाद के निजी मेडिकल कॉलेज गोल्ड फील्ड के वर्ष 2014-15 बैच के विद्यार्थियों को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दी है। इस बैच के विद्यार्थियों को फिलहाल सरकारी फीस ही जमा करानी होगी। लेकिन इसका केस चलता रहेगा। मामले का अंतिम फैसला बाद में आएगा।
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वर्ष 2014 में जिन विद्यार्थियों का फरीदाबाद स्थित निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स के लिए नंबर पड़ा था, वह सभी सीट सरकारी थी। निजी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने के बाद इन विद्यार्थियों को चार सरकारी और दो निजी मेडिकल संस्थानों में शिक्षा जारी रखने के लिए मान्य किया गया है। हाईकोर्ट के अनुसार अब चाहे विद्यार्थी सरकारी में हो या निजी में सभी सरकारी फीस ही जमा करेंगे। सूत्रों की मानें तो इस बैच के 64 विद्यार्थियों को सरकारी कॉलेज में सेट किया जा रहा है, जबकि 36 को मैनेजमेंट की सीट में। जबकि पूरे बैच का दाखिला सरकारी सीट पर किया गया था। समस्या यह है कि इसमें से 22 को अंबाला और 14 को गुड़गांव के निजी मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। डीएमईआर के इस निर्देश को 36 विद्यार्थियों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर कोर्ट ने छात्रों को अंतरिम राहत दी है, लेकिन अभिभावकों और विद्यार्थियों की मांग है कि उन्हें प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट किया जाए। वहीं, कुछ अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि यदि कुछ को मैनेजमेंट सीट पर ही भेजना था तो फरीदाबाद के मेडिकल कॉलेज में क्या कमी थी? जिस मुद्दे पर फरीदाबाद के निजी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द हुई उसी आधार पर विद्यार्थियों को दूसरे निजी मेडिकल कॉलेज में क्यों भेजा जा रहा है?