{"_id":"57683a4f4f1c1b1d48b482ee","slug":"rohtak-mdu-third-eye-letter-bum-officers-university-investigation-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमडीयू में ‘थर्ड आई’ के लेटर बम से हड़कंप, 15 अधिकारी घेरे में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमडीयू में ‘थर्ड आई’ के लेटर बम से हड़कंप, 15 अधिकारी घेरे में
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 21 Jun 2016 01:41 AM IST
विज्ञापन
एमडीयू
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में थर्ड आई ने लेटर बम फोड़कर हड़कंप मचा दिया है। विश्वविद्यालय में जाति विशेष के अधिकारियों को पद से हटाने का मामला थमा भी नहीं था कि एक और गुमनाम पत्र ने खलबली मचा दी है। इस बार यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों समेत अन्य विभागों के करीब 15 अधिकारियों पर संगीन आरोप लगाए गए हैं। आरोप भी ऐसे कि जिन पर विश्वास करना मुश्किल है। गुमनाम पत्र भेजने वाले ने खुद को यूनिवर्सिटी की ‘थर्ड आई’ बताया है।
कुछ दिन पहले सीएम सेल में एक गुमनाम शिकायत करके आरोपों की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने यूनिवर्सिटी के करीब 15 अधिकारियों पर अलग-अलग तरह के आरोप लगाए हैं। पत्र में एक अधिकारी की डिग्री पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि वह एक कांग्रेसी नेता का नजदीकी है। इसीलिए उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। एक प्रोफेसर पर किताबों में हेरफेर तो एक शिक्षक को एक मंत्री का नजदीकी बताते हुए लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। सबसे गंभीर आरोप लड़कियों की सप्लाई का है। कई ऐसे अधिकारियों पर भी आरोप हैं, जो यूनिवर्सिटी में काफी पुराने हैं। यही वजह है कि इस पत्र पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, पत्र को लेकर यूनिवर्सिटी में हड़कंप है और हर तरफ इसी की चर्चा है। गुमनाम पत्र की एक प्रति अमर उजाला के पास भी है।
गुमनाम पत्र पर एक प्रोफेसर शक के दायरे में
गुमनाम पत्र के संबंध में यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर पर शक किया जा रहा है। चर्चा है कि जिन लोगों पर आरोप लगाया गया है उनमें से कुछ ऐसे हैं जिनके खिलाफ एक प्रोफेसर अक्सर शिकायत करते रहते हैं। पुरानी शिकायतें और वर्तमान में भेजे गए पत्र को लिखने का तरीका भी एक समान बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सभी में एक जैसा फॉन्ट का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा भी कई ऐसे तथ्य हैं, जिससे शिकायतकर्ता प्रोफेसर पर शक की सुई घूम रही है। जिन पर शक किया जा रहा है वह किसी ने किसी वजह से विवादों में रहते हैं। हालांकि, इस समय वह एक बड़े पद पर विराजमान हैं। सच क्या है यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा।
विज्ञापन
पहले भी गुमनाम पत्र से मच चुका है हड़कंप
एमडीयू में गुमनाम पत्र का यह पहला मामला नहीं है। कुछ माह पहले एक गुमनाम पत्र ने यूनिवर्सिटी में हड़कंप मचाया था। उसमें आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी के सभी बड़े पदों पर एक जाति विशेष के अधिकारियों को लगाया गया है। इस पत्र पर भी यूनिवर्सिटी में काफी हंगामा हुआ था, जिसमें भाजपा के एक स्थानीय नेता का नाम सामने आया था। इस पत्र केे बाद जाति विशेष के कई अधिकारियों को पद से हटा दिया गया था।
गुमनाम पत्र से उठ रहे कई सवाल
गुमनाम पत्र में जिस तरह से यूनिवर्सिटी के कई बड़े अधिकारियों को लपेटा गया है, उससे कई सवाल उठ रहे हैं। पहला तो यही कि यदि शिकायतकर्ता के पास इनके खिलाफ प्रमाण हैं तो वह सामने क्यों नहीं आया? दूसरा सवाल यह कि ऐसे ही अधिकारियों को निशाना क्यों बनाया गया है जो या तो प्रशासन से जुड़े हैं या अपने डिपार्टमेंट में अच्छी गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं? तीसरा सवाल यह कि अधिकारियों को लपेटकर शिकायतकर्ता खुद का स्वार्थ तो पूरा नहीं करना चाहता? चौथा सवाल यह कि यदि शिकायतकर्ता यूनिवर्सिटी का ही है तो संगीन आरोप लगाकर यूनिवर्सिटी की छवि क्यों धूमिल करना चाहता है।
बोले वीसी
मेरी जानकारी में ऐसा कोई पत्र नहीं आया है। यदि शिकायतकर्ता के पास उसके आरोपों के प्रमाण हैं तो वह खुलकर सामने आए। गुमनाम पत्र के कारण यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल नहीं होने दी जाएगी।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, वीसी एमडीयू
विज्ञापन
कुछ दिन पहले सीएम सेल में एक गुमनाम शिकायत करके आरोपों की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने यूनिवर्सिटी के करीब 15 अधिकारियों पर अलग-अलग तरह के आरोप लगाए हैं। पत्र में एक अधिकारी की डिग्री पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि वह एक कांग्रेसी नेता का नजदीकी है। इसीलिए उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। एक प्रोफेसर पर किताबों में हेरफेर तो एक शिक्षक को एक मंत्री का नजदीकी बताते हुए लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। सबसे गंभीर आरोप लड़कियों की सप्लाई का है। कई ऐसे अधिकारियों पर भी आरोप हैं, जो यूनिवर्सिटी में काफी पुराने हैं। यही वजह है कि इस पत्र पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, पत्र को लेकर यूनिवर्सिटी में हड़कंप है और हर तरफ इसी की चर्चा है। गुमनाम पत्र की एक प्रति अमर उजाला के पास भी है।
विज्ञापन
गुमनाम पत्र पर एक प्रोफेसर शक के दायरे में
गुमनाम पत्र के संबंध में यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर पर शक किया जा रहा है। चर्चा है कि जिन लोगों पर आरोप लगाया गया है उनमें से कुछ ऐसे हैं जिनके खिलाफ एक प्रोफेसर अक्सर शिकायत करते रहते हैं। पुरानी शिकायतें और वर्तमान में भेजे गए पत्र को लिखने का तरीका भी एक समान बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सभी में एक जैसा फॉन्ट का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा भी कई ऐसे तथ्य हैं, जिससे शिकायतकर्ता प्रोफेसर पर शक की सुई घूम रही है। जिन पर शक किया जा रहा है वह किसी ने किसी वजह से विवादों में रहते हैं। हालांकि, इस समय वह एक बड़े पद पर विराजमान हैं। सच क्या है यह तो जांच के बाद ही सामने आएगा।
विज्ञापन
पहले भी गुमनाम पत्र से मच चुका है हड़कंप
एमडीयू में गुमनाम पत्र का यह पहला मामला नहीं है। कुछ माह पहले एक गुमनाम पत्र ने यूनिवर्सिटी में हड़कंप मचाया था। उसमें आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी के सभी बड़े पदों पर एक जाति विशेष के अधिकारियों को लगाया गया है। इस पत्र पर भी यूनिवर्सिटी में काफी हंगामा हुआ था, जिसमें भाजपा के एक स्थानीय नेता का नाम सामने आया था। इस पत्र केे बाद जाति विशेष के कई अधिकारियों को पद से हटा दिया गया था।
गुमनाम पत्र से उठ रहे कई सवाल
गुमनाम पत्र में जिस तरह से यूनिवर्सिटी के कई बड़े अधिकारियों को लपेटा गया है, उससे कई सवाल उठ रहे हैं। पहला तो यही कि यदि शिकायतकर्ता के पास इनके खिलाफ प्रमाण हैं तो वह सामने क्यों नहीं आया? दूसरा सवाल यह कि ऐसे ही अधिकारियों को निशाना क्यों बनाया गया है जो या तो प्रशासन से जुड़े हैं या अपने डिपार्टमेंट में अच्छी गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं? तीसरा सवाल यह कि अधिकारियों को लपेटकर शिकायतकर्ता खुद का स्वार्थ तो पूरा नहीं करना चाहता? चौथा सवाल यह कि यदि शिकायतकर्ता यूनिवर्सिटी का ही है तो संगीन आरोप लगाकर यूनिवर्सिटी की छवि क्यों धूमिल करना चाहता है।
बोले वीसी
मेरी जानकारी में ऐसा कोई पत्र नहीं आया है। यदि शिकायतकर्ता के पास उसके आरोपों के प्रमाण हैं तो वह खुलकर सामने आए। गुमनाम पत्र के कारण यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल नहीं होने दी जाएगी।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, वीसी एमडीयू