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रोडवेज विभाग में घूसकांड का भंडाफोड़: एक साथ चार काबू
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 24 Aug 2016 02:03 AM IST
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एक साथ चार काबू
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा रोडवेज में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को लेकर भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। विजिलेंस ने रोडवेज के ट्रेनिंग स्कूल में दाखिला कराकर हैवी लाइसेंस और आठवीं पास का फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के एवज में रिश्वत मांगने पर रोडवेज वर्कशॉप स्थित ट्रेनिंग स्कूल के शिफ्ट इंचार्ज, कंप्यूटर ऑपरेटर और रोहतक कोर्ट कांप्लेक्स के टाइपिस्ट और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। विजिलेंस ने शिफ्ट इंचार्ज और कंप्यूटर ऑपरेटर को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। चारों आरोपियों को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
विजिलेंस इंस्पेक्टर ओमप्रकाश ने बताया कि मंगलवार दोपहर को गांव बैंसी निवासी पंकज विज ने शिकायत दी थी। विज ने बताया था कि उसने कुछ समय पहले हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। हैवी लाइसेंस के लिए विज को रोडवेज के ट्रेनिंग स्कूल में दाखिला लेना था। लेकिन वह आठवीं कक्षा में फेल था। उसने विभाग में जमा किये अपने दस्तावेजों में भी आठवीं फेल का ही प्रमाण लगाया था। जब यह बात रोडवेज ट्रेनिंग स्कूल के श्फ्टि इंचार्ज व रेडिएटर रिपेयर मैकेनिक मकड़ौली कलां निवासी रामकिशन के पास पहुंची तो उसने पंकज को बुलाया। रामकिशन ने काम करवाने के एवज में पंकज से 9 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। इस पर पंकज ने इनकार कर दिया।
पंकज सीधा विजिलेंस के ऑफिस में पहुंचा और शिकायत दी। फिर विजिलेंस ने पंकज को रामकिशन के पास भेजा। इसके बाद रामकिशन ने उसे कोर्ट में टाइपिस्ट लाढ़ोत रोड स्थित ऋषिनगर निवासी बिजेंद्र के पास जाने को कहा। इस पर पंकज दस्तावेज लेकर बिजेंद्र के पास पहुंच गया। यहां बिजेंद्र सिंह ने पंकज की आठवीं की फर्जी मार्कशीट तैयार कर दी और उसे रोडवेज में कंप्यूटर ऑपरेटर सवित कुमार के पास भेज दिया। सवित कुमार ने पंकज के दस्तावेजों को प्रमाणित कर दिया।
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जब पंकज रामकिशन और सवित को रिश्वत दे रहा था तो विजिलेंस ने दोनों को छापा मारकर रंगे हाथों पकड़ लिया। बाद में पता चला कि आरोपियों ने पंकज के आठवीं पास का फर्जी सर्टिफिकेट भी दस्तावेजों में शामिल कर रखा है। इस पर विजिलेंस की टीम ने कोर्ट कांप्लेक्स में कार्यरत टाइपिस्ट बिजेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया। बिजेंद्र ने बताया कि उसके सहयोगी कंप्यूटर ऑपरेटर भारत कुमार ने आठवीं का फर्जी सर्टिफिके ट तैयार किया था। इसके बाद विजिलेंस ने दोनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।
500 रुपये में बनाते थे फर्जी मार्कशीट
बिजेंद्र ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि रिश्वत की अधिकतर राशि रामकिशन और सवित कुमार के पास ही जाती थी। उन्हें तो सिर्फ 500 रुपये ही मिलते थे। इंस्पेक्टर ओमप्रकाश का कहना है कि आरोपी बिजेन्द्र को फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए आरोपियों द्वारा 500 रुपये दिये जाते थे।
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विजिलेंस इंस्पेक्टर ओमप्रकाश ने बताया कि मंगलवार दोपहर को गांव बैंसी निवासी पंकज विज ने शिकायत दी थी। विज ने बताया था कि उसने कुछ समय पहले हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। हैवी लाइसेंस के लिए विज को रोडवेज के ट्रेनिंग स्कूल में दाखिला लेना था। लेकिन वह आठवीं कक्षा में फेल था। उसने विभाग में जमा किये अपने दस्तावेजों में भी आठवीं फेल का ही प्रमाण लगाया था। जब यह बात रोडवेज ट्रेनिंग स्कूल के श्फ्टि इंचार्ज व रेडिएटर रिपेयर मैकेनिक मकड़ौली कलां निवासी रामकिशन के पास पहुंची तो उसने पंकज को बुलाया। रामकिशन ने काम करवाने के एवज में पंकज से 9 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। इस पर पंकज ने इनकार कर दिया।
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पंकज सीधा विजिलेंस के ऑफिस में पहुंचा और शिकायत दी। फिर विजिलेंस ने पंकज को रामकिशन के पास भेजा। इसके बाद रामकिशन ने उसे कोर्ट में टाइपिस्ट लाढ़ोत रोड स्थित ऋषिनगर निवासी बिजेंद्र के पास जाने को कहा। इस पर पंकज दस्तावेज लेकर बिजेंद्र के पास पहुंच गया। यहां बिजेंद्र सिंह ने पंकज की आठवीं की फर्जी मार्कशीट तैयार कर दी और उसे रोडवेज में कंप्यूटर ऑपरेटर सवित कुमार के पास भेज दिया। सवित कुमार ने पंकज के दस्तावेजों को प्रमाणित कर दिया।
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जब पंकज रामकिशन और सवित को रिश्वत दे रहा था तो विजिलेंस ने दोनों को छापा मारकर रंगे हाथों पकड़ लिया। बाद में पता चला कि आरोपियों ने पंकज के आठवीं पास का फर्जी सर्टिफिकेट भी दस्तावेजों में शामिल कर रखा है। इस पर विजिलेंस की टीम ने कोर्ट कांप्लेक्स में कार्यरत टाइपिस्ट बिजेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया। बिजेंद्र ने बताया कि उसके सहयोगी कंप्यूटर ऑपरेटर भारत कुमार ने आठवीं का फर्जी सर्टिफिके ट तैयार किया था। इसके बाद विजिलेंस ने दोनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।
500 रुपये में बनाते थे फर्जी मार्कशीट
बिजेंद्र ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि रिश्वत की अधिकतर राशि रामकिशन और सवित कुमार के पास ही जाती थी। उन्हें तो सिर्फ 500 रुपये ही मिलते थे। इंस्पेक्टर ओमप्रकाश का कहना है कि आरोपी बिजेन्द्र को फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए आरोपियों द्वारा 500 रुपये दिये जाते थे।