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पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज

Tue, 19 Oct 2021 01:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 19 Oct 2021 01:30 AM IST
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Review petition filed against former Chief Minister dismissed
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके यादव की अदालत में सोमवार को जाट समेत पांच जातियों को आरक्षण देने के मामले के दायर पुनर्विचार याचिकापर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने आरक्षण मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत तीन अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए याचिका दायर की थी। अदालत ने याचिका खारिज कर दी है।
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अदालत में मूल रूप से झज्जर की बाढ़सा हाल चरखी दादरी के बधवाना गांव में रहने वाली राजबाला ने 24 अप्रैल 2019 को पीजीआईएमएस थाने में शिकायत दी थी। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार की ओर से जाट समेत पांच जातियों को आरक्षण देने के लिए कराए गए सर्वे को गलत बताया गया था। सर्वे की जिम्मेदारी एमडीयू के पूर्व कुलपति रामफल हुड्डा व प्रो. खजान सिंह की देखरेख में बनाई गई कमेटी को सौंपी गई थी। कमेटी ने अपनी सर्वे रिपोर्ट जारी करते हुए जाट जाति के लोगों को आरक्षण की जरूरत वाला बताया। इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए शिकायतकर्ता ने कहा कि बगैर सर्वे किए ही फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार किए गए हैं। यही नहीं, सर्वे दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। राजनीतिक लाभ लेने के लिए फर्जी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण दिया गया है। शिकायतकर्ता ने पूर्व मुख्यमंत्री समेत तीनों लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज नहीं किया। इसके चलते दो मई 2019 को एसपी से शिकायत की गई। यहां भी कार्रवाई होने नहीं देख शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अब अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही करार देते हुए पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। अदालत ने 28 सितंबर को फैसला सुरक्षित कर दिया था।
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निचली अदालत ने खारिज कर दी थी अपील
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व प्रो. खजान सिंह के अधिवक्ता नसीब पंघाल का कहना है कि शिकायतकर्ता राजबाला ने आरक्षण मामले में पुलिस को केस दर्ज करने की शिकायत दी थी। केस दर्ज नहीं होने पर उसने 18 जुलाई 2019 को जेएमआईसी भरत की कोर्ट में अपील की। अदालत ने इस अपील को 13 सितंबर 2019 को खारिज कर दिया। इसके बाद 31 अक्तूूबर 2019 को निचली अदालत के फैसले को लेकर सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी।
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