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एनिमल जिलेटिन की जगह अब सैलूलोज से बनेगा कैप्सूल कवर
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 13 Apr 2016 02:45 AM IST
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दवा
- फोटो : capsule
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब कैप्सूल कवर एनिमल जिलेटिन की जगह सैलूलोज से बनाया जाए। इसके बाबत सभी को अपनी बात रखने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है। भारतीय संविधान की धारा 48 के तहत गौवध पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के लिए मंत्रालय ने यह नोटिस जारी किया है। इसी सिलसिले में सर्वोच्च न्यायालय ने 2005 में भी आदेश जारी कि या था कि गौवध के नियम को सख्ती से लागू किया जाए। बता दें कि एनिमल जिलेटिन को बनाने में जानवरों के चमड़े और हड्डी का प्रयोग किया जाता है। वहीं, सैलूलोज कवर को प्राकृतिक तरीके से पेड़-पौधों से बनाया जाता है।
रोहतक के डॉ. बेहरा के सैलूलोज कैप्सूल कवर को मिलेगा स्थान
एनिमल जिलेटिन कैप्सूल कवर बंद होने पर सैलूलोज कैप्सूल कवर का प्रयोग होगा। इसे एमडीयू (महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय) रोहतक स्थित बायोटेक्नोलाजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार बेहरा द्वारा तैयार किया गया था। अमर उजाला से विशेष बातचीत में डॉ. बेहरा ने बताया कि 2006 में उन्होंने और सुनील मुंदरा ने मिलकर बैंगलूर स्थित नैचुरल कैप्सूल लिमिटेड कंपनी के लिए सैलूलोज कैप्सूल कवर का निर्माण किया था। इसको बनाने के तरीके पर वर्ल्ड हेेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का भी पेटेंट मिल गया था। भारत में पहली बार यह लांच हुआ, अब यह जरूरी हो जाएगा। कंपनी विदेशों में सैलूलोज कैप्सूल कवर सप्लाई कर रही है, जबकि हिंदुस्तान में एनिमल जिलेटिन कैप्सूल कवर ही प्रयोग हो रहा है। भारतीय फार्माकोपिया के मुताबिक जिलेटिन कवर को दवाई में इस्तेमाल करने के लिए प्रयोग किया जाता है। बता दें कि जिलेटिन फोटोग्राफी प्लेट बनाने में, फूड इंडस्ट्रीज में और मेडिकल कैप्सूल बनाने में प्रयोग होता है।
ये है जिलेटिन और सैलूलोज कैप्सूल कवर
जिलेटिन कैप्सूल कवर गाय और सूअर की हड्डी और चमड़े से बनता है। हड्डी और चमड़े को एसिड में डुबाया जाता है। इस प्रक्रिया में जो पदार्थ नीचे बचता है, उसे जिलेटिन कहते हैं। इसे कैप्सूल कवर के रूप में तैयार किया जाता है। दवा कड़वी होती है, यदि सीधी लेते है तो उल्टी हो जाएगी। इसलिए इसका कवर के रूप में प्रयोग होता है। वहीं, सैलूलोज कैप्सूल कवर शाकाहारी है। यह पेड़ पौधों के सैलूलोज (कोशमय) से बनता है।
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जिलेटिन से होती है बीमारियां
जिलेटिन में बोबाइन, संपोजीकोरम, एन्सेफोलापकी (बीएसई) वायरस होता है। यह गाय को पागल बना देता है और उसी का प्रभाव मानव के मस्तिष्क पर पड़ने का खतरा हो सकता है। जिलेटिन कैप्सूल बनाने वाले कारखाने को अत्यधिक प्रदूषित उद्योगों में गिना जाता है, जबकि सैलूलोज कैप्सूल पूर्ण रूप से पेड़ पौधों के सैलूलोज से बनता है। इससे मानव शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। अभी भारत में दो कंपनियां सैलूलोज कैप्सूल बना रही हैं और उनकी बनाने की विधि अंतरराष्ट्रीय नियम व कानून के तहत है।
बोले सिविल सर्जन
एनिमल जिलेटिन पर 2001 में फ्रांस में प्रतिबंध लगा था। इसके बाद यूरोप के देशों में इस पर प्रतिबंध लगा। अब इसे भारत में भी प्रतिबंधित करने की तैयारी हो रही है। इसकी प्रक्रिया जारी है।
- डॉ. कुलदीप, सिविल सर्जन, रोहतक।
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रोहतक के डॉ. बेहरा के सैलूलोज कैप्सूल कवर को मिलेगा स्थान
एनिमल जिलेटिन कैप्सूल कवर बंद होने पर सैलूलोज कैप्सूल कवर का प्रयोग होगा। इसे एमडीयू (महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय) रोहतक स्थित बायोटेक्नोलाजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार बेहरा द्वारा तैयार किया गया था। अमर उजाला से विशेष बातचीत में डॉ. बेहरा ने बताया कि 2006 में उन्होंने और सुनील मुंदरा ने मिलकर बैंगलूर स्थित नैचुरल कैप्सूल लिमिटेड कंपनी के लिए सैलूलोज कैप्सूल कवर का निर्माण किया था। इसको बनाने के तरीके पर वर्ल्ड हेेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का भी पेटेंट मिल गया था। भारत में पहली बार यह लांच हुआ, अब यह जरूरी हो जाएगा। कंपनी विदेशों में सैलूलोज कैप्सूल कवर सप्लाई कर रही है, जबकि हिंदुस्तान में एनिमल जिलेटिन कैप्सूल कवर ही प्रयोग हो रहा है। भारतीय फार्माकोपिया के मुताबिक जिलेटिन कवर को दवाई में इस्तेमाल करने के लिए प्रयोग किया जाता है। बता दें कि जिलेटिन फोटोग्राफी प्लेट बनाने में, फूड इंडस्ट्रीज में और मेडिकल कैप्सूल बनाने में प्रयोग होता है।
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ये है जिलेटिन और सैलूलोज कैप्सूल कवर
जिलेटिन कैप्सूल कवर गाय और सूअर की हड्डी और चमड़े से बनता है। हड्डी और चमड़े को एसिड में डुबाया जाता है। इस प्रक्रिया में जो पदार्थ नीचे बचता है, उसे जिलेटिन कहते हैं। इसे कैप्सूल कवर के रूप में तैयार किया जाता है। दवा कड़वी होती है, यदि सीधी लेते है तो उल्टी हो जाएगी। इसलिए इसका कवर के रूप में प्रयोग होता है। वहीं, सैलूलोज कैप्सूल कवर शाकाहारी है। यह पेड़ पौधों के सैलूलोज (कोशमय) से बनता है।
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जिलेटिन से होती है बीमारियां
जिलेटिन में बोबाइन, संपोजीकोरम, एन्सेफोलापकी (बीएसई) वायरस होता है। यह गाय को पागल बना देता है और उसी का प्रभाव मानव के मस्तिष्क पर पड़ने का खतरा हो सकता है। जिलेटिन कैप्सूल बनाने वाले कारखाने को अत्यधिक प्रदूषित उद्योगों में गिना जाता है, जबकि सैलूलोज कैप्सूल पूर्ण रूप से पेड़ पौधों के सैलूलोज से बनता है। इससे मानव शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। अभी भारत में दो कंपनियां सैलूलोज कैप्सूल बना रही हैं और उनकी बनाने की विधि अंतरराष्ट्रीय नियम व कानून के तहत है।
बोले सिविल सर्जन
एनिमल जिलेटिन पर 2001 में फ्रांस में प्रतिबंध लगा था। इसके बाद यूरोप के देशों में इस पर प्रतिबंध लगा। अब इसे भारत में भी प्रतिबंधित करने की तैयारी हो रही है। इसकी प्रक्रिया जारी है।
- डॉ. कुलदीप, सिविल सर्जन, रोहतक।