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नियमों के फेर में उलझ रही तहसील में रजिस्ट्री, शर्त नहीं हो पा रही पूरी
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लॉकडाउन के बीच तहसील में रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया शर्तों के जाल में उलझने लगी है। क्योंकि सरकार की तरफ से रजिस्ट्री के लिए नगर योजनाकार विभाग से एनओसी अनिवार्य की गई है, जबकि 50 प्रतिशत शहर बिना योजना के ही बसा हुआ है। ऐसे में शर्त को पूरा करना संभव नहीं है। दूसरा, नगर निगम को अभी लॉकडाउन के चलते पब्लिक डीलिंग की अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में लोग कहां से एनओसी लेंगे। यहीं कारण है कि तीन दिन में अब तक एग्रीकल्चर व सेक्टर एरिया की ही रजिस्ट्री हो रही हैं।
प्रदेश सरकार ने 20 अप्रैल से तहसील व सब तहसील में रजिस्ट्री की अनुमति दी थी। तय किया था कि लॉकडाउन के बीच एक दिन में केवल 24 रजिस्ट्री होंगी। इसके लिए दोपहर बाद 2 से 4 बजे तक का समय रखा गया था। पहले दिन तकनीकी दिक्कत के चलते एक ही रजिस्ट्री हो सकी। जबकि वीरवार को 9 रजिस्ट्री हुई हैं, जिनमें एग्रीकल्चर व सेक्टर एरिया से जुड़ी ज्यादा हैं। बताया जा रहा है कि एक तो कोरोना महामारी का डर, ऊपर से रजिस्ट्री की कड़ी शर्तों के चलते लोग रजिस्ट्री नहीं करवा पा रहे हैं।
डीटीपी की शर्त पूरी नहीं कर पा रहा पुराना शहर
सूत्रों के मुताबिक रजिस्ट्री के सॉफ्टवेयर के अंदर जिला नगर योजनाकार विभाग से भी एनओसी अनिवार्य दर्शाई जा रही है। जबकि रोहतक का पुराना शहर बिना किसी प्लानिंग के बसा हुआ है। इसमें बाबरा मोहल्ला से लेकर गोहाना अड्डा, खोखराकोट एरिया से अनाज मंडी तक का एरिया शामिल है। ऐसी स्थिति में डीटीपी भी एनओसी नहीं दे पाएगा। क्योंकि कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
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निगम में पब्लिक डिलिंग बंद, कहां से मिलेगी विकास शुल्क व टैक्स की एनओसी
लॉकडाउन से पहले बकाया प्रॉपर्टी टैक्स व विकास शुल्क वसूलने के लिए स्थानीय स्तर पर तय किया गया था कि तहसील में रजिस्ट्री तभी होगी, जब निगम की तरफ से विकाश शुल्क, प्रॉपर्टी टैक्स व दूसरी देनदारियां पूरी होंगी। इसके लिए लिखित में निगम से एनओसी लेनी होगी। इसके लिए निगम की तरफ से तहसील में दो कर्मचारियों की ड्यूटी तय की गई थी। कर्मचारी एलओ व टैक्स ब्रांच से रिपोर्ट लेकर एनओसी देते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते निगम की सभी ब्रांच पब्लिक डीलिंग के लिए बंद हैं। अब वहीं लोग अपनी रजिस्ट्री करवा पा रहे हैं, जिन्होंने पहले एनओसी ले रखी है।
कोविड-19 के चलते नाजुक हुए हालात के समय असंवेदनशीलता दिखाई जा रही है। हर वर्ग भयंकर महामारी से लड़ रहा है। एक तो कलेक्टर रेट बढ़ा दिए गए हैं। दूसरा, जिला टाउन प्लानिंग कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र की असंवैधानिक शर्त लगाकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। तीसरा, जब निगम कार्यालय पब्लिक डीलिंग के लिए बंद है तो कैसे लोग एनओसी लेकर आएंगे। सरकार लोगों को राहत देने के लिए शर्तों में संशोधन करे।
भारत भूषण बतरा, विधायक
लॉकडाउन के चलते निगम में पब्लिक डीलिंग बंद है। ऐसे में रिकॉर्ड की जांच पड़ताल करना संभव नहीं है। रजिस्ट्री के लिए एनओसी देने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाला जाएगा। इसके लिए शासन व प्रशासन ने अनुमति अनिवार्य है। अभी आला अधिकारियों की सरकार से बातचीत चल रही है।
जगदीश चंद्र, जोनल टैक्स ऑफिसर, नगर निगम।
वीरवार को 9 रजिस्ट्री हुई हैं। इसमें जो एग्रीकल्चर व सेक्टरों से जुड़ी हैं। जिला नगर योजनाकार विभाग से एनओसी पुराने शहर के एरिया को लेकर संभव नहीं है। क्योंकि यह एरिया बिना प्लानिंग के बसा हुआ है। इस तकनीकी दिक्कत के बारे में मुख्यालय अवगत करवाया जाएगा।
राजेश कुमार, तहसीलदार।
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प्रदेश सरकार ने 20 अप्रैल से तहसील व सब तहसील में रजिस्ट्री की अनुमति दी थी। तय किया था कि लॉकडाउन के बीच एक दिन में केवल 24 रजिस्ट्री होंगी। इसके लिए दोपहर बाद 2 से 4 बजे तक का समय रखा गया था। पहले दिन तकनीकी दिक्कत के चलते एक ही रजिस्ट्री हो सकी। जबकि वीरवार को 9 रजिस्ट्री हुई हैं, जिनमें एग्रीकल्चर व सेक्टर एरिया से जुड़ी ज्यादा हैं। बताया जा रहा है कि एक तो कोरोना महामारी का डर, ऊपर से रजिस्ट्री की कड़ी शर्तों के चलते लोग रजिस्ट्री नहीं करवा पा रहे हैं।
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डीटीपी की शर्त पूरी नहीं कर पा रहा पुराना शहर
सूत्रों के मुताबिक रजिस्ट्री के सॉफ्टवेयर के अंदर जिला नगर योजनाकार विभाग से भी एनओसी अनिवार्य दर्शाई जा रही है। जबकि रोहतक का पुराना शहर बिना किसी प्लानिंग के बसा हुआ है। इसमें बाबरा मोहल्ला से लेकर गोहाना अड्डा, खोखराकोट एरिया से अनाज मंडी तक का एरिया शामिल है। ऐसी स्थिति में डीटीपी भी एनओसी नहीं दे पाएगा। क्योंकि कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
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निगम में पब्लिक डिलिंग बंद, कहां से मिलेगी विकास शुल्क व टैक्स की एनओसी
लॉकडाउन से पहले बकाया प्रॉपर्टी टैक्स व विकास शुल्क वसूलने के लिए स्थानीय स्तर पर तय किया गया था कि तहसील में रजिस्ट्री तभी होगी, जब निगम की तरफ से विकाश शुल्क, प्रॉपर्टी टैक्स व दूसरी देनदारियां पूरी होंगी। इसके लिए लिखित में निगम से एनओसी लेनी होगी। इसके लिए निगम की तरफ से तहसील में दो कर्मचारियों की ड्यूटी तय की गई थी। कर्मचारी एलओ व टैक्स ब्रांच से रिपोर्ट लेकर एनओसी देते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते निगम की सभी ब्रांच पब्लिक डीलिंग के लिए बंद हैं। अब वहीं लोग अपनी रजिस्ट्री करवा पा रहे हैं, जिन्होंने पहले एनओसी ले रखी है।
कोविड-19 के चलते नाजुक हुए हालात के समय असंवेदनशीलता दिखाई जा रही है। हर वर्ग भयंकर महामारी से लड़ रहा है। एक तो कलेक्टर रेट बढ़ा दिए गए हैं। दूसरा, जिला टाउन प्लानिंग कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र की असंवैधानिक शर्त लगाकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। तीसरा, जब निगम कार्यालय पब्लिक डीलिंग के लिए बंद है तो कैसे लोग एनओसी लेकर आएंगे। सरकार लोगों को राहत देने के लिए शर्तों में संशोधन करे।
भारत भूषण बतरा, विधायक
लॉकडाउन के चलते निगम में पब्लिक डीलिंग बंद है। ऐसे में रिकॉर्ड की जांच पड़ताल करना संभव नहीं है। रजिस्ट्री के लिए एनओसी देने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाला जाएगा। इसके लिए शासन व प्रशासन ने अनुमति अनिवार्य है। अभी आला अधिकारियों की सरकार से बातचीत चल रही है।
जगदीश चंद्र, जोनल टैक्स ऑफिसर, नगर निगम।
वीरवार को 9 रजिस्ट्री हुई हैं। इसमें जो एग्रीकल्चर व सेक्टरों से जुड़ी हैं। जिला नगर योजनाकार विभाग से एनओसी पुराने शहर के एरिया को लेकर संभव नहीं है। क्योंकि यह एरिया बिना प्लानिंग के बसा हुआ है। इस तकनीकी दिक्कत के बारे में मुख्यालय अवगत करवाया जाएगा।
राजेश कुमार, तहसीलदार।