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परम ऐश्वर्य पाने के लिए गायत्री मंत्र का करें जाप : आचार्य विष्णु
Fri, 14 Feb 2025 04:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 14 Feb 2025 04:27 AM IST
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फोटो 17- सोनीपत के सेक्टर-14 स्थित सामुदायिक केंद्र में वैदिक यज्ञ समिति की ओर से आयोजित वार्षि
सोनीपत। उत्तरप्रदेश के बिजनौर से आचार्य विष्णु मित्र वेदार्थी ने कहा कि यदि परमपिता परमेश्वर का परम ऐश्वर्य पाना है तो गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। परमेश्वर स्व: अर्थात सुख स्वरूप है। हमें इनकी उपासना निर्विकार मन, सखा भाव व आनंद प्राप्त करने की इच्छा से करनी चाहिए।
आचार्य विष्णु सेक्टर-14 स्थित सामुदायिक केंद्र में वैदिक यज्ञ समिति की ओर से चल रहे सात दिवसीय 46वें वार्षिकोत्सव के चौथे दिन प्रवचन कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत सामवेद के पारायण यज्ञ से की गई। यज्ञ में ओडिशा के देव नगर से आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय से आए आचार्य शारदा शास्त्री ने ब्रह्माचारिणियों के साथ वेद पाठ किया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य डॉ. वेदपाल शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद ने बाल विवाह को रोकने के अनेक प्रयास किए। विधवा विवाह, पति की मृत्यु के पश्चात संतान न होने पर नियोग से संतान प्राप्ति, पति की संपत्ति में पुत्र भाग दिलवाने का प्रयास किया। सामाजिक अर्थव्यवस्था व बेरोजगारी पर भी महर्षि की दूरगामी दृष्टि रही।
उन्होंने विद्यालयों में कला कौशल की शिक्षा के अंतर्गत लकड़ी व वस्त्र पर चित्रकारी, चित्रकला की शिक्षा सहित विभिन्न माध्यम से शिक्षा के प्रशिक्षण का प्रबंध करवाया। किसानों पर चिंता व्यक्त की। नहर निर्माण के उत्तम प्रकार की योजना, गोरक्षा तथा अन्य जीवों के प्रति सुरक्षा की दृष्टि से सफल प्रयास किए। पंडित दिनेश पथिक ने प्रभु भक्ति के गीतों से वातावरण को भक्तिमय बनाया। आचार्य दीक्षा आर्य ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम में रामगोपाल भूटानी, दिनेश आर्य, सुधांशु व सुरेश बत्रा मौजूद रहे।
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आचार्य विष्णु सेक्टर-14 स्थित सामुदायिक केंद्र में वैदिक यज्ञ समिति की ओर से चल रहे सात दिवसीय 46वें वार्षिकोत्सव के चौथे दिन प्रवचन कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत सामवेद के पारायण यज्ञ से की गई। यज्ञ में ओडिशा के देव नगर से आर्ष कन्या गुरुकुल महाविद्यालय से आए आचार्य शारदा शास्त्री ने ब्रह्माचारिणियों के साथ वेद पाठ किया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य डॉ. वेदपाल शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद ने बाल विवाह को रोकने के अनेक प्रयास किए। विधवा विवाह, पति की मृत्यु के पश्चात संतान न होने पर नियोग से संतान प्राप्ति, पति की संपत्ति में पुत्र भाग दिलवाने का प्रयास किया। सामाजिक अर्थव्यवस्था व बेरोजगारी पर भी महर्षि की दूरगामी दृष्टि रही।
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उन्होंने विद्यालयों में कला कौशल की शिक्षा के अंतर्गत लकड़ी व वस्त्र पर चित्रकारी, चित्रकला की शिक्षा सहित विभिन्न माध्यम से शिक्षा के प्रशिक्षण का प्रबंध करवाया। किसानों पर चिंता व्यक्त की। नहर निर्माण के उत्तम प्रकार की योजना, गोरक्षा तथा अन्य जीवों के प्रति सुरक्षा की दृष्टि से सफल प्रयास किए। पंडित दिनेश पथिक ने प्रभु भक्ति के गीतों से वातावरण को भक्तिमय बनाया। आचार्य दीक्षा आर्य ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम में रामगोपाल भूटानी, दिनेश आर्य, सुधांशु व सुरेश बत्रा मौजूद रहे।

फोटो 17- सोनीपत के सेक्टर-14 स्थित सामुदायिक केंद्र में वैदिक यज्ञ समिति की ओर से आयोजित वार्षि
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