{"_id":"60a7fe828ebc3efa0775160e","slug":"ram-rahim-met-family-members-for-the-first-time-after-being-jailed-rohtak-news-rtk609488662","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेल में बंद होने के बाद पहली बार परिवार वालों से एक साथ मिला राम रहीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेल में बंद होने के बाद पहली बार परिवार वालों से एक साथ मिला राम रहीम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करीब चार साल से यौन शोषण के मामले में जेल में बंद गुरमीत राम रहीम एक साथ परिवार वालों से पहली बार मिला। जेल में बंद होने के बाद परिवार वाले व हनीप्रीत अलग-अलग मुलाकात करते थे। इस मुलाकात को भी कोरोना संक्रमण के कारण करीब 14 माह से बंद कर दिया गया था। 10 दिन पहले घबराहट होने पर पीजीआई में दाखिल होने के बाद राम रहीम ने परिवार वालों से मुलाकात की जिद की थी। शुक्रवार को 12 घंटे की मिली पैरोल में उसकी यह हसरत पूरी हुई। इस बात की जानकारी वीरवार शाम को पांच बजे ही परिवार वालों को मिल चुकी थी। इसके साथ ही अनुयायियों के लिए यह संदेश भी था कि वह गुरुग्राम की ओर रुख न करें। राम रहीम के परिवार वाले उससे मिलने के लिए रात में ही मानेसर स्थित उसके फार्म हाउस पर पहुंच गए थे। शुक्रवार की सुबह करीब दो घंटे में 97 किमी की दूरी तय कर मानेसर पहुंचा राम रहीम सबसे पहले अपनी मां से मिला। मां के कमरे में कुछ समय बिताने के बाद उसने परिवार के लोगों के साथ अलग-अलग मुलाकात की। उसे देखकर परिवार वाले मायूस थे। स्थिति को भांपते हुए उसने परिवार में ऐसा माहौल बनाया कि सब खुश नजर आ रहे थे। राम रहीम ने सुनारिया जेल से निकलते समय कुर्ता व पैजामा पहन रखा था। उसकी दाढ़ी का रंग काला था।
जेल में तीन बार मिली है हनीप्रीत
बता दें कि जेल प्रशासन के रिकॉर्ड में हनीप्रीत का नाम गुरमीत की पारिवारिक सूची में शामिल है। सजायाफ्ता कैदी से मिलने के लिए सप्ताह में दो दिन तय होते हैं। उनसे मिलने वाले 10 लोगों का नाम जेल प्रशासन के पास होता है। जमानत होने के बाद हनीप्रीत वर्ष 2019 में 9 दिसंबर को वह परिवार वालों के साथ राम रहीम से मिली थी। उसके बाद वह 23 दिसंबर को जेल में गुरमीत राम रहीम से मुलाकात करने पहुंची। उसके बाद 30 दिसंबर को वकीलों के साथ वह सुनारिया जेल पहुंची थी।
परिवार के साथ खाया खाना, मां के साथ बिताया अधिक समय
बहुत दिन बाद राम रहीम को पूरे परिवार के साथ खाना खाने का मौका मिला। इस दौरान दोपहर के भोजन में उसकी मनपसंद केसर की खीर भी परोसी गई थी। हालांकि खाने में परहेज व दवा खाने के चलते बहुत कम खाना खाया।
विज्ञापन
सरकार की थी पल-पल पर नजर
गुरमीत राम रहीम की सुरक्षा का सिस्टम इतना मजबूत था कि सबकी निगाहें उस पर थी। उसने 21 दिन का पैरोल मांग रखा था। उसके पैरोल पर जाने के पहले हुए आवेदन व उसकी रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए जेल अधीक्षक की ओर से केवल 12 घंटे का पैरोल दिया गया। वहीं पुलिस अधिकारियों की ओर से उसकी मूवमेंट की खबर सरकार को भेजी जा रही थी।
जेल प्रशासन की ओर से मिले पत्र के बाद राम रहीम को पुलिस सुरक्षा के साथ बीमार मां से मिलने के लिए मानेसर ले जाया गया था। मां से मुलाकात के बाद उसे निर्धारित समय पर सुनारिया जेल पहुंचा दिया गया है।
- गोरखपाल राणा, डीएसपी, मुख्यालय
विज्ञापन
जेल में तीन बार मिली है हनीप्रीत
बता दें कि जेल प्रशासन के रिकॉर्ड में हनीप्रीत का नाम गुरमीत की पारिवारिक सूची में शामिल है। सजायाफ्ता कैदी से मिलने के लिए सप्ताह में दो दिन तय होते हैं। उनसे मिलने वाले 10 लोगों का नाम जेल प्रशासन के पास होता है। जमानत होने के बाद हनीप्रीत वर्ष 2019 में 9 दिसंबर को वह परिवार वालों के साथ राम रहीम से मिली थी। उसके बाद वह 23 दिसंबर को जेल में गुरमीत राम रहीम से मुलाकात करने पहुंची। उसके बाद 30 दिसंबर को वकीलों के साथ वह सुनारिया जेल पहुंची थी।
विज्ञापन
परिवार के साथ खाया खाना, मां के साथ बिताया अधिक समय
बहुत दिन बाद राम रहीम को पूरे परिवार के साथ खाना खाने का मौका मिला। इस दौरान दोपहर के भोजन में उसकी मनपसंद केसर की खीर भी परोसी गई थी। हालांकि खाने में परहेज व दवा खाने के चलते बहुत कम खाना खाया।
विज्ञापन
सरकार की थी पल-पल पर नजर
गुरमीत राम रहीम की सुरक्षा का सिस्टम इतना मजबूत था कि सबकी निगाहें उस पर थी। उसने 21 दिन का पैरोल मांग रखा था। उसके पैरोल पर जाने के पहले हुए आवेदन व उसकी रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए जेल अधीक्षक की ओर से केवल 12 घंटे का पैरोल दिया गया। वहीं पुलिस अधिकारियों की ओर से उसकी मूवमेंट की खबर सरकार को भेजी जा रही थी।
जेल प्रशासन की ओर से मिले पत्र के बाद राम रहीम को पुलिस सुरक्षा के साथ बीमार मां से मिलने के लिए मानेसर ले जाया गया था। मां से मुलाकात के बाद उसे निर्धारित समय पर सुनारिया जेल पहुंचा दिया गया है।
- गोरखपाल राणा, डीएसपी, मुख्यालय