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धरती की प्यास बुझाएंगी बारिश की बूंदें
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प्यासी धरती की प्यास अब बारिश की बूंदें बुझाएंगी। गांवों की सरकारी इमारतों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जाएंगे। इसके लिए खंड स्तर पर इमारतों की पहचान की जा चुकी है। पहले चरण में 25 फीसदी इमारतों में प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। जहां भूजल स्तर कम है, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले जल शक्ति अभियान के तहत कैच द रेन प्रोजेक्ट लांच किया था। इसमें रेनवाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि री-चार्जिंग से भूजल स्तर बढ़ाया जा सके। जिले में भी गांवों की सरकारी इमारतों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग शुरू करने की तैयारी की गई है। खंड स्तर पर बीडीपीओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जिन्होंने इमारतें चिह्नित कर जिला परिषद को भेज दी हैं। अब इनमें से 25 फीसदी इमारतों को पहले चरण में लिया जाएगा, जहां भूजल स्तर कम है। प्लांट स्थापित करने के लिए फंड कई माध्यम से जुटाया जाएगा, जिनमें मनरेगा, 15वां वित्त आयोग, ग्रामीण विकास, सिंचाई विभाग और पंचायत के फंड शामिल हैं। जिले के 26 गांवों में इंटिग्रेटेड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट चल रहा है, वहां इसी के तहत काम करवाए जाएंगे। मानसून से पहले काम मुकम्मल करने का लक्ष्य रखा गया है।
जगह के हिसाब से लगेंगे प्लांट
सरकारी इमारत की जगह के हिसाब से रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जाएंगे। जिला परिषद के परियोजना अधिकारी दर्शन राठी ने बताया कि इसके लिए 100 वर्ग मीटर से कम और उससे ज्यादा की कैटेगरी बनाई गई है। 100 वर्ग मीटर से कम जगह वाले प्लांट पर 29 हजार और इससे ज्यादा वाले पर 2.20 लाख का खर्च आएगा। इन प्लांट का डिजाइन पंचायती राज विभाग ने बनाया है, पूरे हरियाणा में उसे ही लागू किया गया है। इसमें बारिश के पानी को छत से एक पाइप के जरिये नीचे लाया जाएगा। छोटे प्लांट में एक सोकपिट बनाया जाएगा, जिसमें छोटी और बड़ी रोड़ी और रेत की कई पर्तें होंगी। बारिश का पानी उसमें डाला जाएगा जो छनकर नीचे चला जाएगा। बड़े प्लांट में नीचे एक बड़ा स्ट्रक्चर बनाया जाएगा। उसमें भी पानी कई परतों से छनने के बाद एक पाइप के जरिये सीधे भूजल में मिल जाएगा।
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जहां भी भूजल स्तर काफी कम है, वहां रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट में कई विभाग शामिल होंगे। एसई सिंचाई विभाग कार्यालय को जल सूचना केंद्र बनाया गया है।
- सुनील हुड्डा, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
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पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले जल शक्ति अभियान के तहत कैच द रेन प्रोजेक्ट लांच किया था। इसमें रेनवाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि री-चार्जिंग से भूजल स्तर बढ़ाया जा सके। जिले में भी गांवों की सरकारी इमारतों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग शुरू करने की तैयारी की गई है। खंड स्तर पर बीडीपीओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जिन्होंने इमारतें चिह्नित कर जिला परिषद को भेज दी हैं। अब इनमें से 25 फीसदी इमारतों को पहले चरण में लिया जाएगा, जहां भूजल स्तर कम है। प्लांट स्थापित करने के लिए फंड कई माध्यम से जुटाया जाएगा, जिनमें मनरेगा, 15वां वित्त आयोग, ग्रामीण विकास, सिंचाई विभाग और पंचायत के फंड शामिल हैं। जिले के 26 गांवों में इंटिग्रेटेड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट चल रहा है, वहां इसी के तहत काम करवाए जाएंगे। मानसून से पहले काम मुकम्मल करने का लक्ष्य रखा गया है।
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जगह के हिसाब से लगेंगे प्लांट
सरकारी इमारत की जगह के हिसाब से रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जाएंगे। जिला परिषद के परियोजना अधिकारी दर्शन राठी ने बताया कि इसके लिए 100 वर्ग मीटर से कम और उससे ज्यादा की कैटेगरी बनाई गई है। 100 वर्ग मीटर से कम जगह वाले प्लांट पर 29 हजार और इससे ज्यादा वाले पर 2.20 लाख का खर्च आएगा। इन प्लांट का डिजाइन पंचायती राज विभाग ने बनाया है, पूरे हरियाणा में उसे ही लागू किया गया है। इसमें बारिश के पानी को छत से एक पाइप के जरिये नीचे लाया जाएगा। छोटे प्लांट में एक सोकपिट बनाया जाएगा, जिसमें छोटी और बड़ी रोड़ी और रेत की कई पर्तें होंगी। बारिश का पानी उसमें डाला जाएगा जो छनकर नीचे चला जाएगा। बड़े प्लांट में नीचे एक बड़ा स्ट्रक्चर बनाया जाएगा। उसमें भी पानी कई परतों से छनने के बाद एक पाइप के जरिये सीधे भूजल में मिल जाएगा।
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जहां भी भूजल स्तर काफी कम है, वहां रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट में कई विभाग शामिल होंगे। एसई सिंचाई विभाग कार्यालय को जल सूचना केंद्र बनाया गया है।
- सुनील हुड्डा, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग