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जेल में बंदियों को लघु अवधि के व्यावसायिक कोर्स कराएं : उपायुक्त
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रोहतक। जिला कारागार के बंदियों को स्वरोजगार के लिए लघु अवधि के व्यावसायिक कोर्स कराए जाएं। इससे वह कारागार से बाहर मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगे। कारागार में सफाई अभियान चला कर उत्कृष्ट कार्य करने वाले बंदियों को सम्मानित किया जाए। यह कहना है उपायुक्त सचिन गुप्ता का।
उपायुक्त मंगलवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में जिला कारागार में उपलब्ध सुविधाओं एवं आयोजित की जा रही गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी लेते हुए कहा कि हर वर्ष जिला कारागार के बंदियों की ओर से बनाए उत्पादों को सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में बिक्री के लिए भेजा जाता है। एक जेल-एक उत्पाद की दिशा में भी कार्य किया जाए। बंदियों के बनाए उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री की संभावनाएं भी तलाशी जाएं।
उपायुक्त ने कहा कि वंचित बंदियों के आधार कार्ड बनवाने के लिए पंजीकरण शिविर लगाया जाए। बंदियों की मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग कराई जाए। संचारी रोगों से पीड़ित बंदियों को अन्य बंदियों से अलग रखा जाए। निर्धारित अवधि में बंदियों के स्वास्थ्य की जांच कराई जाए। बंदियों को साक्षर बनाने के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उच्च श्रेणी की कानूनी सहायता प्रदान कर रहा है।
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बंदियों की खेल योजना तैयार कर वॉलीबॉल, फुटबॉल की खेल स्पर्धाएं कराई जाए। पुस्तकालय में पुस्तकें उपलब्ध हों। कारागार परिसर में सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन कराया जाए।
उपायुक्त ने कारागार में उपलब्ध अलार्म सिस्टम, पुस्तकालय, मेस, नियंत्रण कक्ष, अग्निशमन, शुद्ध पेयजल की समीक्षा की इस मौके पर जेल अधीक्षक सत्यवान व उपाधीक्षक चरण सिंह मौजूद रहे।
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उपायुक्त मंगलवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में जिला कारागार में उपलब्ध सुविधाओं एवं आयोजित की जा रही गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने सुरक्षा प्रबंधों की जानकारी लेते हुए कहा कि हर वर्ष जिला कारागार के बंदियों की ओर से बनाए उत्पादों को सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में बिक्री के लिए भेजा जाता है। एक जेल-एक उत्पाद की दिशा में भी कार्य किया जाए। बंदियों के बनाए उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री की संभावनाएं भी तलाशी जाएं।
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उपायुक्त ने कहा कि वंचित बंदियों के आधार कार्ड बनवाने के लिए पंजीकरण शिविर लगाया जाए। बंदियों की मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग कराई जाए। संचारी रोगों से पीड़ित बंदियों को अन्य बंदियों से अलग रखा जाए। निर्धारित अवधि में बंदियों के स्वास्थ्य की जांच कराई जाए। बंदियों को साक्षर बनाने के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उच्च श्रेणी की कानूनी सहायता प्रदान कर रहा है।
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बंदियों की खेल योजना तैयार कर वॉलीबॉल, फुटबॉल की खेल स्पर्धाएं कराई जाए। पुस्तकालय में पुस्तकें उपलब्ध हों। कारागार परिसर में सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन कराया जाए।
उपायुक्त ने कारागार में उपलब्ध अलार्म सिस्टम, पुस्तकालय, मेस, नियंत्रण कक्ष, अग्निशमन, शुद्ध पेयजल की समीक्षा की इस मौके पर जेल अधीक्षक सत्यवान व उपाधीक्षक चरण सिंह मौजूद रहे।