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असंभव सिर्फ दिमाग में, प्रयास से सब संभव

Sun, 18 Aug 2019 01:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 18 Aug 2019 01:30 AM IST
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prayas
रोहतक। कोई भी काम असंभव नहीं होता, बल्कि थोड़ा कठिन होता है। असंभव शब्द केवल हमारे दिमाग में होता है। अगर प्रयास करें तो हर काम संभव है। बहुत कम लोग हैं जो करियर, पढ़ाई से बढ़कर समाजसेवा को लक्ष्य बनाते हैं। हम बात कर रहे हैं ऐसे युवाओं की जिन्होंने लीक से हटकर नई राह चुनी और एक नया कारवां बनाया। इन युवाओं ने अपने आसपास के प्रवासी मजदूरों के बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी उठाई और अपने मकसद को अंजाम तक पहुंचाया। आज से करीब 15 साल पहले शहर में दो जगहों पर गांधी नाम से स्कूल शुरू किया और जरूरतमंद बच्चों को शाम को निशुल्क शिक्षा देकर उन्हें इस समाज का अभिन्न अंग बनाया।
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दो बच्चों से शुरू किया स्कूल, आज 140 है संख्या
गांधी स्कूल के संचालक नरेश कुमार ने पीएचडी छोड़कर 15 साल पहले गांधी स्कूल शुरू किया था। उन्होंने मनोविज्ञान से एमए एमफिल किया था। नरेश बताते हैं कि एक दिन जब वह रास्ते से जा रहे थे तो एक मकान मालिक पांच साल के बच्चे को चोरी के इल्जाम में पीट रहा था। बच्चे के माता-पिता मकान मालिक के सामने गिड़गिड़ा रहे थे। इस घटना ने दिमाग पर असर किया और रातभर नींद नहीं आई। नरेश का कहना है कि इससे वजह से वे रातभर सोचते रहे कि इन बच्चों का भविष्य क्या होगा। अगले दिन ही बस्ती में जाकर मजदूरों से बच्चों को पढ़ाने की गुहार लगाई। शुरू में सबने मजाक समझा और साफ मना किया, लेकिन हर रोज वहां जाता रहा और धीरे-धीरे मेरी बच्चों के साथ दोस्ती होने लगी। वहीं उनके अभिभावकों के सामने चौक पर बैठकर बच्चों को पढ़ाता। शुरुआत में दो ही बच्चे पढ़ने आते थे। इसके बाद गांधी स्कूल खोला और आज 140 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हमारे शहीदों ने बलिदान देकर आजादी को हासिल किया है। इसका हमें सदुपयोग करना चाहिए। सबको शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार मिले और देश में भाईचारा बना रहे।
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कुछ नया करना था तो ज्वॉइन किया स्कूल
सेक्टर-4 के रहने वाले दीपक भारती ने हाल ही में बीटेक किया है। फिलहाल घर की आर्थिक जिम्मेदारी मां के कंधों पर है। दीपक एक साल से गांधी स्कूल के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोस में ही यह स्कूल चलता था तो बचपन से ही मन में एक उत्सुकता रहती थी। बड़ा होने पर इन बच्चों को कु छ नया सिखाने की ठानी, इसलिए यह स्कूल ज्वॉइन किया। ये बच्चे अपनी उम्र से ज्यादा समझदार और मेहनती है। लगन से सीखने का प्रयास करते हैं। उनकी नजर में स्वतंत्रता का मतलब सबको समान अधिकार मिलने चाहिए।
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