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पुलिस ने मीसा लगा पिता को जेल में डाला, भाई को खो दिया, कारोबार भी करना पड़ा बंद
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25-26 जून 1975 में लगा आपातकाल को हम कैसे भूल सकते हैं। आपातकाल ने हमारे परिवार के जीवन में बेड़िया डाल दी थी, यही वजह है कि 45 साल पहले हुई घटना को आज भी भूल पाना मुश्किल है। 25 जून 1975 को पिता लक्ष्मीचंद गुप्ता को मीसा (आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम) के तहत 21 महीने जेल में नजरबंद कर दिया था। इस दौरान पिता को किडनी तक खोनी पड़ गई थी। इसी समय छोटे भाई प्रेम को भी खो दिया था। मजबूरी में कपड़े की होल सेल की दुकान भी बंद करनी पड़ी थी। अतीत को याद करते हुए विजय गुप्ता बताते हैं कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने की अवधि तक देश में आपातकाल घोषित था।
विजय ने बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूदीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा की थी। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक काल था। आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए और नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया। इस दौरान इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को कैद कर लिया गया और प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने जयप्रकाश के आंदोलन से घबराकर देश में आपातकाल की घोषणा की थी। उस समय कई राजनेताओं व स्वतंत्र विचार रखने वाले लोगों को रात के अंधेरे में उनके घरों से पुलिस ने जबरन उठाया और जेल में मीसा के तहत नजरबंद किया था।
आपातकाल के दिन हरियाणा के अंदर डॉ. मंगल सैन के बाद रात को दो बजे उनके दिल्ली बाइपास रोड स्थित फार्म हाउस से तत्कालीन सिटी एसएचओ चंदू लाल ने भारी पुलिस बल के साथ स्व. लक्ष्मी चंद गुप्ता को गिरफ्तार किया था। उस समय वह जनसंघ के प्रदेश महामंत्री थे और लोक नायक जय प्रकाश नारायण द्वारा जन आंदोलन के हरियाणा के महामंत्री भी थे। उन्होंने रोहतक, करनाल, अंबाला, संगरूर, पटियाला ओर नासिक जैसी जेलों की यातनाएं भी सही जेल में उनके साथ लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, पूर्व उपप्रधान मंत्री देवीलाल, बीजू पटनायक, डॉ. मंगल सैन, हरद्वारी लाल, मधु दंडवते, सिकंदर, मनोहर लाल सैनी, पीलू मोदी भी रहे। स्व गुप्ता ने करीब 26 बार जेल यात्रा कीं।
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विजय ने बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूदीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा की थी। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक काल था। आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए और नागरिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया। इस दौरान इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को कैद कर लिया गया और प्रेस को प्रतिबंधित कर दिया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने जयप्रकाश के आंदोलन से घबराकर देश में आपातकाल की घोषणा की थी। उस समय कई राजनेताओं व स्वतंत्र विचार रखने वाले लोगों को रात के अंधेरे में उनके घरों से पुलिस ने जबरन उठाया और जेल में मीसा के तहत नजरबंद किया था।
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आपातकाल के दिन हरियाणा के अंदर डॉ. मंगल सैन के बाद रात को दो बजे उनके दिल्ली बाइपास रोड स्थित फार्म हाउस से तत्कालीन सिटी एसएचओ चंदू लाल ने भारी पुलिस बल के साथ स्व. लक्ष्मी चंद गुप्ता को गिरफ्तार किया था। उस समय वह जनसंघ के प्रदेश महामंत्री थे और लोक नायक जय प्रकाश नारायण द्वारा जन आंदोलन के हरियाणा के महामंत्री भी थे। उन्होंने रोहतक, करनाल, अंबाला, संगरूर, पटियाला ओर नासिक जैसी जेलों की यातनाएं भी सही जेल में उनके साथ लाल कृष्ण आडवाणी, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, पूर्व उपप्रधान मंत्री देवीलाल, बीजू पटनायक, डॉ. मंगल सैन, हरद्वारी लाल, मधु दंडवते, सिकंदर, मनोहर लाल सैनी, पीलू मोदी भी रहे। स्व गुप्ता ने करीब 26 बार जेल यात्रा कीं।
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