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लंबी चली प्लानिंग, 11 लाख हुए खर्च, अब नतीजा जीरो
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 01 May 2016 02:51 AM IST
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रोहतक। प्रोजेक्ट के लिए लंबी प्लानिंग, 11 लाख रुपये खर्च और अब नतीजा जीरो। एमडीयू के साथ फिलहाल कुछ ऐसा ही हुआ है। संबद्ध कॉलेजों पर निगरानी रखने के लिए जिस पोर्टल पर पिछले एक साल से काम चल रहा और अब वह रन होना वाला भी था, लेकिन इससे पहले ही सरकार ने एमडीयू से बीएड कॉलेज छीनकर बड़ा झटका दे डाला।
एमडीयू के अधीन लगभग 500 से अधिक कॉलेज हैं, जिसमें बीएड कॉलेजों की संख्या करीब 327 है। इन कॉलेजों पर निगरानी के लिए यूनिवर्सिटी की टीम का सभी जगह पहुंचना मुनासिब नहीं होता था। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पिछले वर्ष कॉलेज पोर्टल बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसके लिए लंबी प्लानिंग चली और कमेटी तक भी बनाई गई। खासकर बीएड कालेजों के लिए यह पोर्टल बनाया गया है। पोर्टल को तैयार करने में अब तक लगभग 11 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन इस पोर्टल का ट्रायल कर चुका है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन की तैयारी थी कि आने वाले सत्र से यह पोर्टल लागू कर दिया जाएगा। इससे पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन कॉलेज पोर्टल को रन करता, सरकार ने बड़ा झटका दे डाला। जिस पोर्टल को इतने कॉलेजों के मुताबिक तैयार किया था अब बीएड के 327 कॉलेज छिनने के बाद लगभग 200 कॉलेजों पर ही लागू हो पाएगा। इससे न केवल यूनिवर्सिटी को आर्थिक तौर पर झटका लगा है, बल्कि उसकी प्लानिंग भी धरी रह गई।
ऐसे काम करेगा कॉलेज पोर्टल
कॉलेज पोर्टल वेबसाइट की ही तरह काम करेगा। जिस पर सभी कॉलेजों का डाटा अपलोड होगा। इसमें कॉलेज की फैकल्टी, संसाधन और विद्यार्थियों की हर गतिविधियों का रिकार्ड रहेगा। यहां तक कि कॉलेजों में लगे कैमरे भी इस पोर्टल से जुड़ेंगे। इसका यह फायदा होगा कि यूनिवर्सिटी में बैठे अधिकारी मात्र एक क्लिक पर न केवल कॉलेज का पूरा रिकार्ड देख पाएंगे, बल्कि कैमरों के माध्यम से यह भी देख सकेंगे कॉलेज खुला है या नहीं, कितने बच्चे हैं।
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वर्जन
कॉलेजों पर निगरानी के लिए यह पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें लगभग 11 लाख रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि बीएड कॉलेज हटने के बाद यह दूसरे कॉलेजों पर ही लागू होगा।
- प्रो. सेवा सिंह दहिया, डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल एमडीयू।
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एमडीयू के अधीन लगभग 500 से अधिक कॉलेज हैं, जिसमें बीएड कॉलेजों की संख्या करीब 327 है। इन कॉलेजों पर निगरानी के लिए यूनिवर्सिटी की टीम का सभी जगह पहुंचना मुनासिब नहीं होता था। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पिछले वर्ष कॉलेज पोर्टल बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसके लिए लंबी प्लानिंग चली और कमेटी तक भी बनाई गई। खासकर बीएड कालेजों के लिए यह पोर्टल बनाया गया है। पोर्टल को तैयार करने में अब तक लगभग 11 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन इस पोर्टल का ट्रायल कर चुका है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन की तैयारी थी कि आने वाले सत्र से यह पोर्टल लागू कर दिया जाएगा। इससे पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन कॉलेज पोर्टल को रन करता, सरकार ने बड़ा झटका दे डाला। जिस पोर्टल को इतने कॉलेजों के मुताबिक तैयार किया था अब बीएड के 327 कॉलेज छिनने के बाद लगभग 200 कॉलेजों पर ही लागू हो पाएगा। इससे न केवल यूनिवर्सिटी को आर्थिक तौर पर झटका लगा है, बल्कि उसकी प्लानिंग भी धरी रह गई।
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ऐसे काम करेगा कॉलेज पोर्टल
कॉलेज पोर्टल वेबसाइट की ही तरह काम करेगा। जिस पर सभी कॉलेजों का डाटा अपलोड होगा। इसमें कॉलेज की फैकल्टी, संसाधन और विद्यार्थियों की हर गतिविधियों का रिकार्ड रहेगा। यहां तक कि कॉलेजों में लगे कैमरे भी इस पोर्टल से जुड़ेंगे। इसका यह फायदा होगा कि यूनिवर्सिटी में बैठे अधिकारी मात्र एक क्लिक पर न केवल कॉलेज का पूरा रिकार्ड देख पाएंगे, बल्कि कैमरों के माध्यम से यह भी देख सकेंगे कॉलेज खुला है या नहीं, कितने बच्चे हैं।
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कॉलेजों पर निगरानी के लिए यह पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें लगभग 11 लाख रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि बीएड कॉलेज हटने के बाद यह दूसरे कॉलेजों पर ही लागू होगा।
- प्रो. सेवा सिंह दहिया, डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल एमडीयू।