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पीएचडी में टॉपर छात्राओं को आरक्षित श्रेणी में मिला प्रवेश, अर्थशास्त्र की आठ में से चार सामान्य वर्ग को दी
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रोहतक। एमडीयू का नाम एक बार फिर चर्चा में है। इस बार पीएचडी की काउंसिलिंग के चलते विवि चर्चा में है। कैंपस में एमफिल व पीएचडी के प्रवेश के लिए काउंसिलिंग चल रही है। बुधवार को अर्थशास्त्र विभाग की आठ सीटों के लिए काउंसिलिंग हुई। यहां टॉपर छात्राओं को आरक्षित श्रेणी में दाखिला मिला। आरक्षित वर्ग को तीन ही सीटें मिली। इससे नाराज छात्र संगठनों ने विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर काउंसिलिंग रुकवा दी। काउंसिलिंग करीब एक घंटे रुकी रही।
बुधवार को एमडीयू के दूसरे विभागों की तरह अर्थशास्त्र विभाग में भी पीएचडी में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग हुई। यहां आठ सीटों के लिए विद्यार्थियों को बुलाया गया। इन सीटों के निर्धारण को लेकर कुछ विद्यार्थियों ने गड़बड़ी की आशंका जाहिर की। इसमें आठ में एक सीट आल इंडिया व चार सीटें समान्य वर्ग को देने के बाद तीन ही सीटें आरक्षित वर्ग के लिए रही। इन सीटों के लिए लगाए गए गणित को गलत ठहराते हुए विद्यार्थियों ने आपत्ति जताई। मामला छात्र संगठनों तक पहुंचा तो छात्र युवा संघर्ष समिति, अखिल भारतीय वाल्मीकि छात्र महासभा, छात्र एकता मंच के सदस्य अर्थशास्त्र विभाग पहुंचे। यहां विद्यार्थियों से उनकी समस्या जानने के बाद छात्र संगठनों ने विरोध शुरू किया। विवि प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए विद्यार्थियों ने सीट निर्धारण के तरीके को गलत ठहराया।
उनका कहना था कि सीटों नियमानुसर आल इंडिया कोटे के तहत 15 प्रतिशत, 85 प्रतिशत हरियाणा स्टेट, 50 प्रतिशत सामान्य वर्ग, 50 प्रतिशत में से 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 16 प्रतिशत बीसीए, 11 प्रतिशत बीसीबी व 6 प्रतिशत शारीरिक विकलांग के लिए होता है। इसी हिसाब से सीटें बंटनी चाहिए।
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नियमानुसार, आठ में से 1.20 सीटें आल इंडिया की, 6.80 सीटें हरियाणा स्टेट, 3.40 सीट सामान्य वर्ग की बनती है। सामान्य वर्ग 3.40 में से .34 सीटें ईसीडब्लू की बनती है। इसके अलावा 1.36 अनुसूसिचत जाति, 1.09 सीटें बीसी-ए, .75 बीसी-बी व .20 सीटें शारीरिक विकलांग की बनती है।
विद्यार्थियों का कहना है कि आठ में से एक सीट आल इंडिया की जाने के बाद शेष सात सीटों को दो 3.5 के हिसाब से दो हिस्सों में बांट दिया। पहले सामान्य वर्ग के हिस्से को 3.5 से चार सीटों में बदल दिया गया। ऐसे में आरक्षित वर्ग के लिए तीन सीटें ही शेष रही। इससे लाभार्थी दाखिले से वंचित रह गया। जबकि सामान्य वर्ग का खास चहेता कम प्रतिशत अंक होने पर भी पीएचडी में प्रवेश ले गया।
विद्यार्थियों का कहना है कि काउंसिलिंग में दो छात्राएं मेरिट में रही। इन्हें नियमानुसार मेरिट सूची के हिसाब से सामान्य वर्ग में ही प्रवेश दिया जाना था। जबकि इन्हें आरक्षित वर्ग में प्रवेश दिया गया। इससे आरक्षित वर्ग के कम विद्यार्थियों को प्रवेश मिला। यही नहीं पहली बार काउंसिलिंग के लिए बुलाए गए विद्यार्थियों के हस्ताक्षर नहीं लिए गए। इस मौके पर लोकेश, मंजीत, नवनीत, रमन, अरुण, राकेश चौपड़ा, मोनिका, जसमेर, प्रदीप, आकाश, जसमिंदर, प्रवीण समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।
पीएचडी में प्रवेश के लिए काउंसिग बुलाई गई। यह विवि के नियमों के तहत आयोजित की गई। विभाग की कुल आठ सीटों में से एक आल इंडिया व सात में से 3.5 सामान्य वर्ग के लिए रही। इस 3.5 को राउंड फिगर में चार सीटों में बदला गया। इस हिसाब से तीन सीटें आरक्षित वर्ग के लिए शेष रहती हैं। फिर भी कहीं कोई गड़बड़ी रहती है तो विद्यार्थी संपर्क कर सकते हैं।
- प्रो. नीलम चौधरी, एचओडी, अर्थशास्त्र विभाग, एमडीयू।
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बुधवार को एमडीयू के दूसरे विभागों की तरह अर्थशास्त्र विभाग में भी पीएचडी में प्रवेश के लिए काउंसिलिंग हुई। यहां आठ सीटों के लिए विद्यार्थियों को बुलाया गया। इन सीटों के निर्धारण को लेकर कुछ विद्यार्थियों ने गड़बड़ी की आशंका जाहिर की। इसमें आठ में एक सीट आल इंडिया व चार सीटें समान्य वर्ग को देने के बाद तीन ही सीटें आरक्षित वर्ग के लिए रही। इन सीटों के लिए लगाए गए गणित को गलत ठहराते हुए विद्यार्थियों ने आपत्ति जताई। मामला छात्र संगठनों तक पहुंचा तो छात्र युवा संघर्ष समिति, अखिल भारतीय वाल्मीकि छात्र महासभा, छात्र एकता मंच के सदस्य अर्थशास्त्र विभाग पहुंचे। यहां विद्यार्थियों से उनकी समस्या जानने के बाद छात्र संगठनों ने विरोध शुरू किया। विवि प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए विद्यार्थियों ने सीट निर्धारण के तरीके को गलत ठहराया।
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उनका कहना था कि सीटों नियमानुसर आल इंडिया कोटे के तहत 15 प्रतिशत, 85 प्रतिशत हरियाणा स्टेट, 50 प्रतिशत सामान्य वर्ग, 50 प्रतिशत में से 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 16 प्रतिशत बीसीए, 11 प्रतिशत बीसीबी व 6 प्रतिशत शारीरिक विकलांग के लिए होता है। इसी हिसाब से सीटें बंटनी चाहिए।
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नियमानुसार, आठ में से 1.20 सीटें आल इंडिया की, 6.80 सीटें हरियाणा स्टेट, 3.40 सीट सामान्य वर्ग की बनती है। सामान्य वर्ग 3.40 में से .34 सीटें ईसीडब्लू की बनती है। इसके अलावा 1.36 अनुसूसिचत जाति, 1.09 सीटें बीसी-ए, .75 बीसी-बी व .20 सीटें शारीरिक विकलांग की बनती है।
विद्यार्थियों का कहना है कि आठ में से एक सीट आल इंडिया की जाने के बाद शेष सात सीटों को दो 3.5 के हिसाब से दो हिस्सों में बांट दिया। पहले सामान्य वर्ग के हिस्से को 3.5 से चार सीटों में बदल दिया गया। ऐसे में आरक्षित वर्ग के लिए तीन सीटें ही शेष रही। इससे लाभार्थी दाखिले से वंचित रह गया। जबकि सामान्य वर्ग का खास चहेता कम प्रतिशत अंक होने पर भी पीएचडी में प्रवेश ले गया।
विद्यार्थियों का कहना है कि काउंसिलिंग में दो छात्राएं मेरिट में रही। इन्हें नियमानुसार मेरिट सूची के हिसाब से सामान्य वर्ग में ही प्रवेश दिया जाना था। जबकि इन्हें आरक्षित वर्ग में प्रवेश दिया गया। इससे आरक्षित वर्ग के कम विद्यार्थियों को प्रवेश मिला। यही नहीं पहली बार काउंसिलिंग के लिए बुलाए गए विद्यार्थियों के हस्ताक्षर नहीं लिए गए। इस मौके पर लोकेश, मंजीत, नवनीत, रमन, अरुण, राकेश चौपड़ा, मोनिका, जसमेर, प्रदीप, आकाश, जसमिंदर, प्रवीण समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।
पीएचडी में प्रवेश के लिए काउंसिग बुलाई गई। यह विवि के नियमों के तहत आयोजित की गई। विभाग की कुल आठ सीटों में से एक आल इंडिया व सात में से 3.5 सामान्य वर्ग के लिए रही। इस 3.5 को राउंड फिगर में चार सीटों में बदला गया। इस हिसाब से तीन सीटें आरक्षित वर्ग के लिए शेष रहती हैं। फिर भी कहीं कोई गड़बड़ी रहती है तो विद्यार्थी संपर्क कर सकते हैं।
- प्रो. नीलम चौधरी, एचओडी, अर्थशास्त्र विभाग, एमडीयू।