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देश की चुनिंदा माइक्रो बायाालॉजी लैबों में से होगी पीजीआईएमएस लैब
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पीजीआईएमएस की माइक्रो बायोलॉजी लैब देश की चुनिंदा लैबों में शामिल होने जा रही है। यहां डेंगू, चिकनगुनिया, हैपेटाइटिस ए, बी, सी, ई, स्वाइन फ्लू, इन्फ्लूयंजा ए, बी, स्क्रब टाइफस आदि 12 प्रमुख वायरल की जांच होती हैं। इसके अलावा संस्थान ने आईसीएमआर से 43 और वायरस की जांच करने के लिए किट की डिमांड भेजी है। इन जांचों के शुरू होते ही संस्थान की लैब देश की प्रमुख लैबों में शामिल हो जाएगी। इसके बाद संस्थान नये वायरस की जांच करने के लिए किसी अन्य लैब की रिपोर्ट का न इंतजार करेगा और न ही निर्भर होगा।
संस्थान ने वायरल मैनिंजाइटिस (दिमागी बुखार) के लगभग नौ, वायरल आंत्र शोथ के लगभग छह, श्वसन रोग जनकों के लगभग 17, उष्ण कटिबंधीय बुखार के लगभग सात व आंखों के संक्रमण के लगभग पांच नये वायरस की जांच करने के लिए किट की डिमांड भेजी है। इन जांचों के संस्थान में शुरू होते ही संस्थान की माइक्रो बायोलॉजी लैब देश में सभी प्रकार के वायरस की जांच करने में सक्षम हो जाएगा। इसके बाद संस्थान में आने वाले मरीजों को नये वायरल की जांच के लिए सैंपल दिल्ली भेजने की जरूरत नहीं होगी और मरीज को समय पर उपचार दिया जा सकेगा। वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी की ओर से इस प्रोजेक्ट को डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च की ओर से चलाया जा रहा है। इसको आईसीएमआर स्पोर्ट कर रहा है। इस तरह की लैब देश में तीन लेवल पर हैं। इसमें पहली रीजनल लैब देश में दस, स्टेट स्तर पर 15 व मेडिकल कॉलेज के स्तर पर 85 हैं। इसमें हरियाणा की बात करें तो मेडिकल कॉलेज स्तर पर पीजीआईएमएस रोहतक व खानपुर मेडिकल कॉलेज में इस लैब की सुविधा है।
पीजीआईएमएस रोहतक में लैब चला रही टीम
प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर नोडल अधिकारी डॉ. पीएस गिल, को-इंवेस्टिगेटर डॉ. अपर्णा, दो रिसर्च साइंटिस्ट (आईसीएमएस फंडिड), एक रिसर्च सहायक (आईसीएमएस फंडिड), दो लैब तकनीशियन आईसीएमएस फंडिड, दो लैब तकनीशियन (विभागीय)
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यह होगा लाभ
इस लैब से वायरल बीमारियों पर रिसर्च और डायग्नोज होता है। अभी यहां कुछ ही वायरस की जांच हो पाती है। नई किट आने पर संस्थान हर प्रकार की वायरल बीमारियों का उपचार कर सकेगा। इसके माध्यम से नये वायरल और प्रारूप बदलने वाले वायरलों की भी पहचान हो सकेगी।
यह है फंडिंग
कुल : एक करोड़ 92 लाख
सामान : 93.2 लाख
नवीनीकरण : 37 लाख
स्टाफ तनख्वाह : 39.34 लाख
रिजेंट के लिए : 22.66 लाख
अब तक फंड का प्रयोग हुआ : एक करोड़ 45 लाख रुपये लगभग 75 फीसदी। यह फंड 2014 अप्रैल में आया और 2015 में लैब शुरू कर दी गई। संस्थान में एलाइजा व पीसीआर की जांच होती है व जनवरी 2019 से प्रयोगशाला स्वाइन फ्लू की भी जांच कर रहा है।
दो साल की जांच का डाटा
साल एचबीएसएजी एचसीवी एबी स्वाइन फ्लू डेंगू चिकनगुनिया एचएवी एचईवी एचबीवी डीएनए एचसीवी आरएनए
2018 52095 48462 82 3671 194 69 219 132 28
2019 51443 51433 1147 2196 18 298 534 1140 309
नोट : संस्थान में एचबीए डीएनए व एचसीवी आरएनए जांच निशुल्क होती है। यह निजी लैब में पांच - पांच हजार रुपये में होती है। ये जांचें संस्थान में निशुल्क होती हैं।
संस्थान की माइक्रोबायोलॉजी लैब में अभी 12 विभिन्न वायरसों की जांच होती है। इसके अलावा 43 और नई जांच शुरू करने के लिए आईसीएमआर से अन्य किट मांगी गई हैं। इन किटों के आते ही संस्थान में सभी प्रकार के वायरसों की जांच शुरू हो पाएगी। इसके आते ही हम किसी अन्य लैब की रिपोर्ट के भरोसे नहीं रहेंगे। यह संस्थान की उपलब्धियों में शामिल होगा।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
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संस्थान ने वायरल मैनिंजाइटिस (दिमागी बुखार) के लगभग नौ, वायरल आंत्र शोथ के लगभग छह, श्वसन रोग जनकों के लगभग 17, उष्ण कटिबंधीय बुखार के लगभग सात व आंखों के संक्रमण के लगभग पांच नये वायरस की जांच करने के लिए किट की डिमांड भेजी है। इन जांचों के संस्थान में शुरू होते ही संस्थान की माइक्रो बायोलॉजी लैब देश में सभी प्रकार के वायरस की जांच करने में सक्षम हो जाएगा। इसके बाद संस्थान में आने वाले मरीजों को नये वायरल की जांच के लिए सैंपल दिल्ली भेजने की जरूरत नहीं होगी और मरीज को समय पर उपचार दिया जा सकेगा। वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी की ओर से इस प्रोजेक्ट को डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च की ओर से चलाया जा रहा है। इसको आईसीएमआर स्पोर्ट कर रहा है। इस तरह की लैब देश में तीन लेवल पर हैं। इसमें पहली रीजनल लैब देश में दस, स्टेट स्तर पर 15 व मेडिकल कॉलेज के स्तर पर 85 हैं। इसमें हरियाणा की बात करें तो मेडिकल कॉलेज स्तर पर पीजीआईएमएस रोहतक व खानपुर मेडिकल कॉलेज में इस लैब की सुविधा है।
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पीजीआईएमएस रोहतक में लैब चला रही टीम
प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर नोडल अधिकारी डॉ. पीएस गिल, को-इंवेस्टिगेटर डॉ. अपर्णा, दो रिसर्च साइंटिस्ट (आईसीएमएस फंडिड), एक रिसर्च सहायक (आईसीएमएस फंडिड), दो लैब तकनीशियन आईसीएमएस फंडिड, दो लैब तकनीशियन (विभागीय)
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यह होगा लाभ
इस लैब से वायरल बीमारियों पर रिसर्च और डायग्नोज होता है। अभी यहां कुछ ही वायरस की जांच हो पाती है। नई किट आने पर संस्थान हर प्रकार की वायरल बीमारियों का उपचार कर सकेगा। इसके माध्यम से नये वायरल और प्रारूप बदलने वाले वायरलों की भी पहचान हो सकेगी।
यह है फंडिंग
कुल : एक करोड़ 92 लाख
सामान : 93.2 लाख
नवीनीकरण : 37 लाख
स्टाफ तनख्वाह : 39.34 लाख
रिजेंट के लिए : 22.66 लाख
अब तक फंड का प्रयोग हुआ : एक करोड़ 45 लाख रुपये लगभग 75 फीसदी। यह फंड 2014 अप्रैल में आया और 2015 में लैब शुरू कर दी गई। संस्थान में एलाइजा व पीसीआर की जांच होती है व जनवरी 2019 से प्रयोगशाला स्वाइन फ्लू की भी जांच कर रहा है।
दो साल की जांच का डाटा
साल एचबीएसएजी एचसीवी एबी स्वाइन फ्लू डेंगू चिकनगुनिया एचएवी एचईवी एचबीवी डीएनए एचसीवी आरएनए
2018 52095 48462 82 3671 194 69 219 132 28
2019 51443 51433 1147 2196 18 298 534 1140 309
नोट : संस्थान में एचबीए डीएनए व एचसीवी आरएनए जांच निशुल्क होती है। यह निजी लैब में पांच - पांच हजार रुपये में होती है। ये जांचें संस्थान में निशुल्क होती हैं।
संस्थान की माइक्रोबायोलॉजी लैब में अभी 12 विभिन्न वायरसों की जांच होती है। इसके अलावा 43 और नई जांच शुरू करने के लिए आईसीएमआर से अन्य किट मांगी गई हैं। इन किटों के आते ही संस्थान में सभी प्रकार के वायरसों की जांच शुरू हो पाएगी। इसके आते ही हम किसी अन्य लैब की रिपोर्ट के भरोसे नहीं रहेंगे। यह संस्थान की उपलब्धियों में शामिल होगा।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस