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पीजीआई की कोई लिफ्ट चला दे
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 06 Nov 2016 01:44 AM IST
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पीजीआई में इलाज के लिए आने वाले मरीज
- फोटो : अमर उजाला
पीजीआई में इलाज के लिए आने वाले अधिकतर मरीज यही कहते हैं कि कोई यहां की लिफ्ट चला दे। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) में इलाज के लिए प्रदेश भर से मरीज आते हैं।
इमरजेंसी में प्रतिदिन 1000 से 1500 मरीज पहुंचते हैं। ओपीडी में प्रतिदिन सात से 10 हजार मरीज आते हैं। करीब 1500 मरीज वार्डों में हमेशा भर्ती रहते हैं। इनमें से कइयों की हालत गंभीर होती है। इसके बावजूद संस्थान में लिफ्ट की सुविधा नहीं है। दान के स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की भी स्थिति ठीक नहीं है। इस कारण भूतल से पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर जाने वाले मरीजों को काफी परेशानी होती है।
कहने को संस्थान के हर विभाग में लिफ्ट लगी हैं, लेकिन लिफ्टमैन नहीं होने की वजह से इन्हें बंद कर दिया गया है। स्थिति यह है कि संस्थान में कुल 15 लिफ्ट हैं, लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए केवल दो लिफ्ट मैन हैं। केवल ओपीडी की पांच लिफ्ट चालू हैं, बाकी को बंद कर दिया गया है। इस कारण गंभीर मरीजों को उनके परिजन स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर घसीटते हुए इधर से उधर ले जाते हैं। ऐसे में कई बार मरीजों की हालत और खराब हो जाती है। लेकिन संस्थान के अधिकारियों को इसकी कोई चिंता नहीं है।
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वार्डों में पहुंचना पहाड़ चढ़ने जैसा
पीजीआई के वार्ड 16, 25, 26 तक पहुंचना मरीज के लिए पहाड़ चढ़ने से कम नहीं है। ओपीडी और आपात विभाग से इन वार्डों में पहुंचने के लिए मरीजों को तकरीबन एक किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इन वार्डों में हृदय रोगी, महिला रोग, एचआईवी, अस्थि रोग विभाग के मरीज आते हैं। कई मरीजों के लिए पैदल चलना मुश्किल होता है।
जिन मरीजों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर लाया जाता है, उन्हें वार्ड 14 के पास रैंप से ऊपर ले जाना पड़ता है। व्हील चेयर और स्ट्रेचर सही नहीं होने के कारण इसे खींचना परिजनों के लिए मुसीबत हो जाता है। यहां की लिफ्ट का सेंसर खराब होने के चलते इसे पिछले कई माह से नहीं चलाया जा रहा है।
हादसे के बाद जो चालू थीं उन्हें भी बंद किया
बताया जाता है कि पिछले दिनों सीआरएस ओपीडी में हुए लिफ्ट कांड के बाद संस्थान की अधिकतर लिफ्ट को बंद कर दिया गया। इसकी चपेट में पीजीआईडीएस और निदेशक कार्यालय की लिफ्ट भी आ गईं। इसका खामियाजा मरीजों के साथ दिव्यांग कर्मचारियों और डॉक्टरों को उठाना पड़ रहा है। बताया जाता है कि लिफ्ट में हादसा इसलिए हुआ क्योंकि उसे संचालित करने के लिए कोई लिफ्ट मैन नहीं था। संस्थान ने लिफ्ट मैन रखने की जगह लिफ्ट को बंद करना ही बेहतर समझा है।
सीढ़ियों से आना जाना पड़ता है मरीजों को
पीजीआई की ओपीडी में आठ लिफ्ट लगी हैं, लेकिन इसमें से चल केवल पांच रही हैं। दो को बंद कर दिया गया है। आठ लिफ्ट पर केवल दो लिफ्ट मैन हैं। प्रतिदिन 10 हजार से अधिक की ओपीडी वाले इस दो मंजिला भवन में पहली और दूसरी मंजिल पर जाने के लिए मरीजों को खासी परेशानी होती है। इसके बाद लिफ्ट की सबसे अधिक जरूरत वार्डों में होती है।
वार्डों में चार लिफ्ट लगाई तो गई हैं, लेकिन लिफ्ट मैन नहीं होने की वजह से सभी को बंद कर दिया गया है। इससे वार्डों में भर्ती मरीजों को दिक्कत होती है। गंभीर मरीजों को सीढ़ियों से लाने ले जाने में परिजनों को परेशानी होती है। इसी तरह पीजीआईडीएस की तीन मंजिला भवन में दो लिफ्ट लगी हैं, लेकिन सभी बंद रहती हैं। निदेशक कार्यालय की एक लिफ्ट को भी बंद कर दिया गया है।
बोले परिजन
आपात विभाग से दूसरी मंजिल तक मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाना फिर अन्य जांचों के लिए नीचे लाना मुसीबत भरा होता है। स्ट्रेचर के पहिये तक सही नहीं होते, ऊपर से रास्ता खराब होता है। लिफ्ट खराब पड़ी है। कोई सुनने वाला नहीं है। परिजनों को काफी समस्या होती है।
- देवेंद्र, मकड़ौली
हार्ट अटैक के मरीज के साथ काफी सामान ले जाना होता है। कई बार बीयरर भी नहीं होते, मरीज के परिजनों को स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। सबसे अधिक समस्या उस समय होती है जब मरीज को जल्द से जल्द आईसीसीयू तक पहुंचाना होता है। यदि लिफ्ट सही हो तो समस्या का समाधान हो जाए।
- अनिल, डेयरी मोहल्ला
बोले अधिकारी
लिफ्ट मैन की कमी के चलते कुछ जरूरी जगह सुरक्षा कर्मचारियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। बाकी लिफ्ट चालू करने के लिए संपर्क किया जा रहा है। जल्द मरीजों को यह सुविधा मिलेगी। - डॉ. प्रशांत, प्रोफेसर इंचार्ज जन संपर्क, पीजीआईएमएस
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इमरजेंसी में प्रतिदिन 1000 से 1500 मरीज पहुंचते हैं। ओपीडी में प्रतिदिन सात से 10 हजार मरीज आते हैं। करीब 1500 मरीज वार्डों में हमेशा भर्ती रहते हैं। इनमें से कइयों की हालत गंभीर होती है। इसके बावजूद संस्थान में लिफ्ट की सुविधा नहीं है। दान के स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की भी स्थिति ठीक नहीं है। इस कारण भूतल से पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर जाने वाले मरीजों को काफी परेशानी होती है।
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कहने को संस्थान के हर विभाग में लिफ्ट लगी हैं, लेकिन लिफ्टमैन नहीं होने की वजह से इन्हें बंद कर दिया गया है। स्थिति यह है कि संस्थान में कुल 15 लिफ्ट हैं, लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए केवल दो लिफ्ट मैन हैं। केवल ओपीडी की पांच लिफ्ट चालू हैं, बाकी को बंद कर दिया गया है। इस कारण गंभीर मरीजों को उनके परिजन स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर घसीटते हुए इधर से उधर ले जाते हैं। ऐसे में कई बार मरीजों की हालत और खराब हो जाती है। लेकिन संस्थान के अधिकारियों को इसकी कोई चिंता नहीं है।
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वार्डों में पहुंचना पहाड़ चढ़ने जैसा
पीजीआई के वार्ड 16, 25, 26 तक पहुंचना मरीज के लिए पहाड़ चढ़ने से कम नहीं है। ओपीडी और आपात विभाग से इन वार्डों में पहुंचने के लिए मरीजों को तकरीबन एक किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इन वार्डों में हृदय रोगी, महिला रोग, एचआईवी, अस्थि रोग विभाग के मरीज आते हैं। कई मरीजों के लिए पैदल चलना मुश्किल होता है।
जिन मरीजों को व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर लाया जाता है, उन्हें वार्ड 14 के पास रैंप से ऊपर ले जाना पड़ता है। व्हील चेयर और स्ट्रेचर सही नहीं होने के कारण इसे खींचना परिजनों के लिए मुसीबत हो जाता है। यहां की लिफ्ट का सेंसर खराब होने के चलते इसे पिछले कई माह से नहीं चलाया जा रहा है।
हादसे के बाद जो चालू थीं उन्हें भी बंद किया
बताया जाता है कि पिछले दिनों सीआरएस ओपीडी में हुए लिफ्ट कांड के बाद संस्थान की अधिकतर लिफ्ट को बंद कर दिया गया। इसकी चपेट में पीजीआईडीएस और निदेशक कार्यालय की लिफ्ट भी आ गईं। इसका खामियाजा मरीजों के साथ दिव्यांग कर्मचारियों और डॉक्टरों को उठाना पड़ रहा है। बताया जाता है कि लिफ्ट में हादसा इसलिए हुआ क्योंकि उसे संचालित करने के लिए कोई लिफ्ट मैन नहीं था। संस्थान ने लिफ्ट मैन रखने की जगह लिफ्ट को बंद करना ही बेहतर समझा है।
सीढ़ियों से आना जाना पड़ता है मरीजों को
पीजीआई की ओपीडी में आठ लिफ्ट लगी हैं, लेकिन इसमें से चल केवल पांच रही हैं। दो को बंद कर दिया गया है। आठ लिफ्ट पर केवल दो लिफ्ट मैन हैं। प्रतिदिन 10 हजार से अधिक की ओपीडी वाले इस दो मंजिला भवन में पहली और दूसरी मंजिल पर जाने के लिए मरीजों को खासी परेशानी होती है। इसके बाद लिफ्ट की सबसे अधिक जरूरत वार्डों में होती है।
वार्डों में चार लिफ्ट लगाई तो गई हैं, लेकिन लिफ्ट मैन नहीं होने की वजह से सभी को बंद कर दिया गया है। इससे वार्डों में भर्ती मरीजों को दिक्कत होती है। गंभीर मरीजों को सीढ़ियों से लाने ले जाने में परिजनों को परेशानी होती है। इसी तरह पीजीआईडीएस की तीन मंजिला भवन में दो लिफ्ट लगी हैं, लेकिन सभी बंद रहती हैं। निदेशक कार्यालय की एक लिफ्ट को भी बंद कर दिया गया है।
बोले परिजन
आपात विभाग से दूसरी मंजिल तक मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाना फिर अन्य जांचों के लिए नीचे लाना मुसीबत भरा होता है। स्ट्रेचर के पहिये तक सही नहीं होते, ऊपर से रास्ता खराब होता है। लिफ्ट खराब पड़ी है। कोई सुनने वाला नहीं है। परिजनों को काफी समस्या होती है।
- देवेंद्र, मकड़ौली
हार्ट अटैक के मरीज के साथ काफी सामान ले जाना होता है। कई बार बीयरर भी नहीं होते, मरीज के परिजनों को स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। सबसे अधिक समस्या उस समय होती है जब मरीज को जल्द से जल्द आईसीसीयू तक पहुंचाना होता है। यदि लिफ्ट सही हो तो समस्या का समाधान हो जाए।
- अनिल, डेयरी मोहल्ला
बोले अधिकारी
लिफ्ट मैन की कमी के चलते कुछ जरूरी जगह सुरक्षा कर्मचारियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। बाकी लिफ्ट चालू करने के लिए संपर्क किया जा रहा है। जल्द मरीजों को यह सुविधा मिलेगी। - डॉ. प्रशांत, प्रोफेसर इंचार्ज जन संपर्क, पीजीआईएमएस