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पीजीआई के डेंटल कॉलेज में बायलर फटने से दो महिला बीडीएस इंटर्न घायल
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 10 Jul 2016 02:46 AM IST
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हादसे के बाद सभी बीडीएस इंटर्न गए हड़ताल पर, तीन घंटे नहीं किया काम
- फोटो : amar ujala
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पीजीआई के डेंटल कॉलेज में शनिवार दोपहर अचानक बायलर फट गया। इससे अंदर काम कर रही दो महिला बीडीएस इंटर्न घायल हो गईं। उनके सिर और हाथों में चोट आई है। उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया। घटना के बाद इंटर्न ने हड़ताल कर दी। उनका आरोप है कि कालेज प्रशासन पर पुराना उपकरण उपलब्ध करवाता है और सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। विरोध में सभी इंटर्न कॉलेज के बाहर इकट्ठा हो गये। करीब तीन घंटे तक विरोध करने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने बीडीएस इंटर्न से बातचीत की। उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद सभी काम पर लौटे।
पीजीआई के मेडिकल कॉलेज के ऑटोक्लेव रूम में दोपहर को दो महिला ट्रेनी डॉक्टर (बीडीएस इंटर्न) सहित अन्य इंटर्न काम कर रहे थे। इसी कमरे में बायलर रखा था। उसमें पानी गर्म हो रहा था। इसी बीच बायलर में अधिक भाप बन गई। बायलर का ढक्कन खराब होने के कारण अधिक भाप बनने पर सीटी नहीं बजी। इस कारण काम कर रहे इंटर्न का ध्यान उसकी तरफ नहीं गया। क्षमता से अधिक भाप बनने की वजह से बायलर फट गया। उसका ढक्कन और अन्य हिस्से वहां मौजूद महिला बीडीएस इंटर्न पालकी और दीपिका के सिर और हाथों पर जा लगा। इससे दोनों को चोट लग गई और खून बहने लगा। आनन-फानन में दोनों घायल इंटर्न को पीजीआई की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। अब उनकी हालत में सुधार है। दोनों को छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल वह अपने हास्टल में हैं।
बीडीएस इंटर्न बोले, जान जोखिम में
घटना के बाद गुस्साए बीडीएस इंटर्न हड़ताल पर चले गये। सभी कालेज प्रशासन पर सुरक्षा में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर बाहर पार्क में बैठ गये। उनका कहना था कि कालेज प्रशासन एक बायलर का ढक्कन तक नहीं बदलवा सकता है। भले ही डॉक्टरों व मरीजों की जान को खतरा हो। इनका आरोप है कि उन्हें कई-कई साल पुराने उपकरणों से काम चलाना पड़ रहा है। इस कारण संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इंटर्न ने यह भी आरोप लगाया कि कालेज प्रशासन सरकार से उपकरणों और सुविधाओं के लिए मिलने वाले पैसों को भी खर्च नहीं कर रहा है। मांगों के समर्थन में बीडीएस इंटर्न करीब तीन घंटे तक हड़ताल पर रहे। मामला बढ़ता देख कालेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय तिवारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने इंटर्न से बातचीत करके उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया तो सभी काम पर लौट आए।
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इसलिए होता है बायलर
मेडिकल कालेज के बायलर में पानी को गर्म किया जाता है। इसी से मेडिकल उपकरणों को धोया जाता है, ताकि उनमें किसी तरह का जर्म आदि न लगें। मेडिकल उपकरणों का इस्तेमाल एक मरीज के साथ एक ही बार किया जाता है उसके बाद उसे गर्म पानी से धोया जाता है, ताकि उपकरणों के इस्तेमाल से किसी मरीज को संक्रमण न हो।
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पीजीआई के मेडिकल कॉलेज के ऑटोक्लेव रूम में दोपहर को दो महिला ट्रेनी डॉक्टर (बीडीएस इंटर्न) सहित अन्य इंटर्न काम कर रहे थे। इसी कमरे में बायलर रखा था। उसमें पानी गर्म हो रहा था। इसी बीच बायलर में अधिक भाप बन गई। बायलर का ढक्कन खराब होने के कारण अधिक भाप बनने पर सीटी नहीं बजी। इस कारण काम कर रहे इंटर्न का ध्यान उसकी तरफ नहीं गया। क्षमता से अधिक भाप बनने की वजह से बायलर फट गया। उसका ढक्कन और अन्य हिस्से वहां मौजूद महिला बीडीएस इंटर्न पालकी और दीपिका के सिर और हाथों पर जा लगा। इससे दोनों को चोट लग गई और खून बहने लगा। आनन-फानन में दोनों घायल इंटर्न को पीजीआई की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। अब उनकी हालत में सुधार है। दोनों को छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल वह अपने हास्टल में हैं।
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बीडीएस इंटर्न बोले, जान जोखिम में
घटना के बाद गुस्साए बीडीएस इंटर्न हड़ताल पर चले गये। सभी कालेज प्रशासन पर सुरक्षा में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर बाहर पार्क में बैठ गये। उनका कहना था कि कालेज प्रशासन एक बायलर का ढक्कन तक नहीं बदलवा सकता है। भले ही डॉक्टरों व मरीजों की जान को खतरा हो। इनका आरोप है कि उन्हें कई-कई साल पुराने उपकरणों से काम चलाना पड़ रहा है। इस कारण संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इंटर्न ने यह भी आरोप लगाया कि कालेज प्रशासन सरकार से उपकरणों और सुविधाओं के लिए मिलने वाले पैसों को भी खर्च नहीं कर रहा है। मांगों के समर्थन में बीडीएस इंटर्न करीब तीन घंटे तक हड़ताल पर रहे। मामला बढ़ता देख कालेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय तिवारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने इंटर्न से बातचीत करके उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया तो सभी काम पर लौट आए।
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इसलिए होता है बायलर
मेडिकल कालेज के बायलर में पानी को गर्म किया जाता है। इसी से मेडिकल उपकरणों को धोया जाता है, ताकि उनमें किसी तरह का जर्म आदि न लगें। मेडिकल उपकरणों का इस्तेमाल एक मरीज के साथ एक ही बार किया जाता है उसके बाद उसे गर्म पानी से धोया जाता है, ताकि उपकरणों के इस्तेमाल से किसी मरीज को संक्रमण न हो।