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पीजीआई : जच्चा-बच्चा वार्ड के पास ऑक्सीजन प्लांट में लगी आग, दो बैटरी फटी
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पीजीआईएमएस के जच्चा-बच्चा वार्ड से करीब 15 कदम दूर ऑक्सीजन प्लांट की बैटरियों में शुक्रवार सुबह आग लग गई। प्लांट से धुआं उठते देख सुरक्षाकर्मियों ने 11 फायर इस्टिंग्यूसर से आग पर काबू पाने का प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिली। सूचना पर पहुंची दमकल ने आग पर काबू पाया। वहीं, हादसे की गंभीरता को देख जच्चा-बच्चा वार्ड की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई, जो करीब 25 मिनट बाद चालू हुई।
क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल और जच्चा-बच्चा वार्ड के नजदीक ऑक्सीजन प्लांट हैं। प्लांट के सुचारु संचालन के लिए 35 बैटरी की सीरीज लगी हुई हैं। चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ईश्वर शर्मा के अनुसार सुबह करीब छह बजे प्लांट के अंदर से तेजी से धुआं निकलने लगा। आसपास ड्यूटी पर तैनात गार्ड जब तक दौड़कर प्लांट के पास पहुंचे तब तक एक-एक करके दो बैटरी फटने के धमाके हुए। इससे प्लांट के अंदर पूरी तरह से धुआं छा गया। प्लांट के अंदर बैटरी के धमाकों से ऑक्सीजन सिलिंडरों के फटने की आशंका पर सुरक्षाकर्मियों ने जान की बाजी लगा दी और मुंह पर कपड़ा बांधकर प्लांट के अंदर घुस गए। पहले सुरक्षाकर्मियों ने फायर इस्टिंग्यूसर से आग बुझाने का प्रयास किया। 11 फायर इस्टिंग्यूसर इस्तेमाल होने के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इस बीच पहुंची दमकल की गाड़ी ने आग पर काबू पाया। इस दरम्यान आसपास के वार्ड की करीब 25 मिनट के लिए बिजली आपूर्ति बाधित कर दी गई। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने प्लांट में लगी बैटरियों को कनेक्शन काटकर बाहर निकाला तब कहीं जाकर हालात पर काबू पाया जा सका।
पीजीआईएमएस में नहीं हो सकी दमकल की स्थायी व्यवस्था
चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ईश्वर शर्मा ने बताया कि काफी प्रयास के बावजूद पीजीआईएमएस में दमकल की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। न तो फायर ऑफिसर की तैनाती की गई है और न फायर मैन की। नगर निगम को दमकल की गाड़ी खड़ी करने के लिए कहा जा चुका है। दमकल की गाड़ियां खड़ी करने के लिए निगम को जगह भी चिह्नित की जा चुकी है मगर अभी तक व्यवस्था नहीं हुई है।
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फट सकते थे ऑक्सीजन सिलिंडर
चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की वजह से गंभीरता हादसा होने से बचा है। दो बैटरी फटने के बाद भी गार्ड ऑक्सीजन प्लांट में घुसे। 11 फायर इस्टिंग्यूसर का इस्तेमाल करके आग को काबू में रखा। कनेक्शन काटकर बैटरियों को अलग किया और फिर बाहर रखा। ऐसा नहीं करते तो बैटरियां फटने से ऑक्सीजन सिलिंडर भी फट सकते थे, जिससे गंभीर हादसा हो सकता था। गंभीर हादसा रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले सुरक्षाकर्मी सुपरवाइजर राजकुमार, रमेश चंद्र, प्रीतम, राजकुमार, सुनील, गार्ड सुनील, धर्मवीर, वेदप्रकाश, पवन, विनोद, योगेश, सतीश व प्रवीन को सम्मानित किया जाएगा।
चिकित्साधीक्षक को पूरे हालात से कराया अवगत
ऑक्सीजन प्लांट में आग की गंभीरता को देख चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने पीजीआईएमएस की चिकित्साधीक्षक डॉ. पुष्पा दहिया को पूरे मामले की जानकारी दी। आग बुझाने के लिए दमकल की व्यवस्था करने, फायर ऑफिसर की तैनाती करने के लिए कहा। उन्होंने जान जोखिम में डालकर आग बुझाने वाले गार्डों के बारे में भी बताया।
ऑक्सीजन प्लांट के अंदर करीब 35 बैटरी लगी है, जो एक-दूसरे से कनेक्ट हैं। शुक्रवार सुबह स्पार्किंग से आग लगी। दो बैटरी आग की वजह से पिघल गई। सुरक्षाकर्मियों ने आग पर काबू पाया। आगे हादसा नहीं है, इसलिए बैटरियों को बाहर रखवाया जाएगा।
- डॉ. पुष्पा दहिया, चिकित्साधीक्षक, पीजीआईएमएस
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क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल और जच्चा-बच्चा वार्ड के नजदीक ऑक्सीजन प्लांट हैं। प्लांट के सुचारु संचालन के लिए 35 बैटरी की सीरीज लगी हुई हैं। चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ईश्वर शर्मा के अनुसार सुबह करीब छह बजे प्लांट के अंदर से तेजी से धुआं निकलने लगा। आसपास ड्यूटी पर तैनात गार्ड जब तक दौड़कर प्लांट के पास पहुंचे तब तक एक-एक करके दो बैटरी फटने के धमाके हुए। इससे प्लांट के अंदर पूरी तरह से धुआं छा गया। प्लांट के अंदर बैटरी के धमाकों से ऑक्सीजन सिलिंडरों के फटने की आशंका पर सुरक्षाकर्मियों ने जान की बाजी लगा दी और मुंह पर कपड़ा बांधकर प्लांट के अंदर घुस गए। पहले सुरक्षाकर्मियों ने फायर इस्टिंग्यूसर से आग बुझाने का प्रयास किया। 11 फायर इस्टिंग्यूसर इस्तेमाल होने के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। इस बीच पहुंची दमकल की गाड़ी ने आग पर काबू पाया। इस दरम्यान आसपास के वार्ड की करीब 25 मिनट के लिए बिजली आपूर्ति बाधित कर दी गई। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने प्लांट में लगी बैटरियों को कनेक्शन काटकर बाहर निकाला तब कहीं जाकर हालात पर काबू पाया जा सका।
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पीजीआईएमएस में नहीं हो सकी दमकल की स्थायी व्यवस्था
चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ईश्वर शर्मा ने बताया कि काफी प्रयास के बावजूद पीजीआईएमएस में दमकल की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। न तो फायर ऑफिसर की तैनाती की गई है और न फायर मैन की। नगर निगम को दमकल की गाड़ी खड़ी करने के लिए कहा जा चुका है। दमकल की गाड़ियां खड़ी करने के लिए निगम को जगह भी चिह्नित की जा चुकी है मगर अभी तक व्यवस्था नहीं हुई है।
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फट सकते थे ऑक्सीजन सिलिंडर
चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की वजह से गंभीरता हादसा होने से बचा है। दो बैटरी फटने के बाद भी गार्ड ऑक्सीजन प्लांट में घुसे। 11 फायर इस्टिंग्यूसर का इस्तेमाल करके आग को काबू में रखा। कनेक्शन काटकर बैटरियों को अलग किया और फिर बाहर रखा। ऐसा नहीं करते तो बैटरियां फटने से ऑक्सीजन सिलिंडर भी फट सकते थे, जिससे गंभीर हादसा हो सकता था। गंभीर हादसा रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले सुरक्षाकर्मी सुपरवाइजर राजकुमार, रमेश चंद्र, प्रीतम, राजकुमार, सुनील, गार्ड सुनील, धर्मवीर, वेदप्रकाश, पवन, विनोद, योगेश, सतीश व प्रवीन को सम्मानित किया जाएगा।
चिकित्साधीक्षक को पूरे हालात से कराया अवगत
ऑक्सीजन प्लांट में आग की गंभीरता को देख चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने पीजीआईएमएस की चिकित्साधीक्षक डॉ. पुष्पा दहिया को पूरे मामले की जानकारी दी। आग बुझाने के लिए दमकल की व्यवस्था करने, फायर ऑफिसर की तैनाती करने के लिए कहा। उन्होंने जान जोखिम में डालकर आग बुझाने वाले गार्डों के बारे में भी बताया।
ऑक्सीजन प्लांट के अंदर करीब 35 बैटरी लगी है, जो एक-दूसरे से कनेक्ट हैं। शुक्रवार सुबह स्पार्किंग से आग लगी। दो बैटरी आग की वजह से पिघल गई। सुरक्षाकर्मियों ने आग पर काबू पाया। आगे हादसा नहीं है, इसलिए बैटरियों को बाहर रखवाया जाएगा।
- डॉ. पुष्पा दहिया, चिकित्साधीक्षक, पीजीआईएमएस