{"_id":"6a3c3b98945aa51f4e04da94","slug":"pgi-denies-allegations-regarding-rabies-vaccine-administration-inquiry-report-released-rohtak-news-c-17-roh1019-877806-2026-06-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: रेबीज वैक्सीन ने देने के आरोपों को पीजीआई ने नकारा, जांच रिपोर्ट जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: रेबीज वैक्सीन ने देने के आरोपों को पीजीआई ने नकारा, जांच रिपोर्ट जारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआई में 10 वर्षीय बच्चे को निर्धारित समय पर रेबीज वैक्सीन न लगाए जाने और वैक्सीन देने से इन्कार के आरोपों को लेकर संस्थान की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। संस्थान ने अपनी जांच में आपातकालीन इलाज से इन्कार किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। हालांकि, परिजन अब भी जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
राज्यपाल के सहायक सचिव से प्राप्त पत्र का संज्ञान लेते हुए पीजीआई निदेशक डॉ. एसके सिंघल की अध्यक्षता में 21 मई को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। इसमें डॉ. नीलम कुमार, डॉ. सुखबीर और डॉ. कपिल भल्ला शामिल हुए थे। जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ता डॉ. रेनू को डाक के माध्यम से भेजी गई है।
जांच के मिनट्स के अनुसार 10 वर्षीय बच्चे को 5 फरवरी की शाम 6:55 बजे इमरजेंसी में जांच और इलाज दिया गया था। नियमों के अनुसार परिवार को वैक्सीन के शेड्यूल की जानकारी भी दी गई थी। बच्चे को अगली खुराकें 8, 12 फरवरी और 5 मार्च को दी जानी थीं।
विज्ञापन
इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार परिवार निर्धारित समय का पालन करने के बजाय सीधे इमरजेंसी में दूसरी खुराक लगवाने पहुंच गया। इसके बाद परिवार ने स्वयं लापरवाही बरती जिसके कारण 12 फरवरी को तीसरी वैक्सीन नहीं लग सकी।
परिवार अगले दिन अस्पताल पहुंचा। कमेटी का कहना है कि अस्पताल की ओर से इलाज से इन्कार नहीं किया गया था और यह पूरा विवाद परिवार की गलतफहमी का परिणाम है।
परिजनों का पक्ष
मां डॉ. रेनू ने कहा कि पत्र में एसओपी देने की बात लिखी गई है लेकिन कोई एसओपी पत्र के साथ नहीं भेजा गया है। केवल मिनट्स की जानकारी दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा अस्पताल प्रशासन एक 10 वर्षीय बच्चे के खिलाफ खड़ा हो गया है। अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। वहीं, पति सुनील ने कहा कि मिनट्स का पत्र अधूरा है। इसमें एसओपी भी संलग्न नहीं है जिससे मामले को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका यह भी आरोप है कि डॉक्टर अल्का को बचाने की कोशिश की जा रही है।
वर्जन
मामले की जांच में संबंधित डॉक्टरों को शामिल किया गया है। तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर शिकायतकर्ता को भेज दी गई है। -डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआई
विज्ञापन
रोहतक। पीजीआई में 10 वर्षीय बच्चे को निर्धारित समय पर रेबीज वैक्सीन न लगाए जाने और वैक्सीन देने से इन्कार के आरोपों को लेकर संस्थान की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। संस्थान ने अपनी जांच में आपातकालीन इलाज से इन्कार किए जाने के आरोपों को खारिज किया है। हालांकि, परिजन अब भी जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
राज्यपाल के सहायक सचिव से प्राप्त पत्र का संज्ञान लेते हुए पीजीआई निदेशक डॉ. एसके सिंघल की अध्यक्षता में 21 मई को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी। इसमें डॉ. नीलम कुमार, डॉ. सुखबीर और डॉ. कपिल भल्ला शामिल हुए थे। जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ता डॉ. रेनू को डाक के माध्यम से भेजी गई है।
विज्ञापन
जांच के मिनट्स के अनुसार 10 वर्षीय बच्चे को 5 फरवरी की शाम 6:55 बजे इमरजेंसी में जांच और इलाज दिया गया था। नियमों के अनुसार परिवार को वैक्सीन के शेड्यूल की जानकारी भी दी गई थी। बच्चे को अगली खुराकें 8, 12 फरवरी और 5 मार्च को दी जानी थीं।
विज्ञापन
इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार परिवार निर्धारित समय का पालन करने के बजाय सीधे इमरजेंसी में दूसरी खुराक लगवाने पहुंच गया। इसके बाद परिवार ने स्वयं लापरवाही बरती जिसके कारण 12 फरवरी को तीसरी वैक्सीन नहीं लग सकी।
परिवार अगले दिन अस्पताल पहुंचा। कमेटी का कहना है कि अस्पताल की ओर से इलाज से इन्कार नहीं किया गया था और यह पूरा विवाद परिवार की गलतफहमी का परिणाम है।
परिजनों का पक्ष
मां डॉ. रेनू ने कहा कि पत्र में एसओपी देने की बात लिखी गई है लेकिन कोई एसओपी पत्र के साथ नहीं भेजा गया है। केवल मिनट्स की जानकारी दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा अस्पताल प्रशासन एक 10 वर्षीय बच्चे के खिलाफ खड़ा हो गया है। अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। वहीं, पति सुनील ने कहा कि मिनट्स का पत्र अधूरा है। इसमें एसओपी भी संलग्न नहीं है जिससे मामले को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका यह भी आरोप है कि डॉक्टर अल्का को बचाने की कोशिश की जा रही है।
वर्जन
मामले की जांच में संबंधित डॉक्टरों को शामिल किया गया है। तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर शिकायतकर्ता को भेज दी गई है। -डॉ. वरुण अरोड़ा, जनसंपर्क अधिकारी, पीजीआई