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Rohtak News: पीजीआई में दो घंटे तक लाइन में कंपकंपाते रहे मरीज

Wed, 03 Jan 2024 12:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Wed, 03 Jan 2024 12:54 AM IST
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Patients kept shivering in line for two hours in PGI
रोहतक। पीजीआईएमएस में मंगलवार को मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किडनी और चेस्ट के मरीजों से ओपीडी में भीड़ बनी रही। नए ओपीडी कार्ड बनाने और दवा काउंटर पर भी लंबी लाइन लगी रही। हिसार, बहादुरगढ़, भिवानी के दूर-दराज गांव से आए मरीजों को ठिठुरती ठंड में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रतिबंधित अवकाश के कारण मरीजों को जांचने के लिए आवश्यकता से कम डॉक्टर मिले। वहीं सामान्य अस्पताल में बच्चों को टीका लगाने के लिए लाइन लगी रही। पिछले दस दिन की तुलना में ओपीडी में बढ़ोतरी रही। बीते कुछ दिनों मरीजों की ओपीडी 4000 से 4500 तक रह रही थी जो मंगलवार को बढ़कर 6000 से 7000 के बीच रहा। दो डॉक्टरों का काम एक डॉक्टर ने संभाला। चेस्ट, किडनी व पथरी के मरीजों को दो घंटे तक लाइन में खड़े रहकर इंतजार करना पड़ा।
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बच्चे का इलाज करवाने के लिए आया हूं। पिछले कई सालों से इलाज चल रहा है। बच्चे को दौरे की दिक्कत है। इसलिए महीने में एक दो बार यहां आना पड़ता है। दो घंटे से लाइन में लगा हूं। अभी तक नंबर नहीं आया है।
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सुरेंद्र, नारनौंद, हिसार

112 नंबर कमरे में पहले जांच होती थी, लेकिन मंगलवार को 120 नंबर में भेजा है। पिछले नौ साल से मां का पथरी और हार्ट का इलाज चल रहा है। जब भी आते हैं तो काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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सुरेंद्र, बहादुरगढ़

ठंड बढ़ने की वजह से शरीर जकड़ सा गया है। कल से ही सीने में दर्द हो रहा है। कमजोरी सी महसूस हो रही हे। डॉक्टर को दिखाने आया हूं। एक घंटे से लाइन में खड़ा हूं। अगर इलाज मिल जाता है तो राहत मिलेगी।
मंदीप, जटवाड़ी, भिवानी


प्रतिबंधित अवकाश चिकित्सकों का निजी विषय है। डॉक्टर चाहें तो ले सकते हैं और नहीं भी ले सकते हैं। मरीजों के इलाज के लिए ओपीडी कोई न कोई डॉक्टर जांच करते मिलेगा ही। मरीजों की हमें चिंता है। कोई भी मरीज बिना इलाज कराए वापस नहीं जा रहा है।

कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस।


सामान्य अस्पताल में शिशुओं को लगे टीके
सामान्य अस्पताल में 24 घंटे के भीतर नवजातों को हेपेटाइटिस व अन्य टीका लगाया गया। डॉ. कुल प्रतिभा ने बताया कि नवजातों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में समय-समय पर निर्धारित टीके जरूर लगाने चाहिए। इससे बीमारियों का खतरा कम रहता है।
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