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Rohtak News: अभिभावकों और पुराने विद्यार्थियों ने अनुबंध पर उठाए सवाल

Tue, 08 Aug 2023 01:53 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 08 Aug 2023 01:53 AM IST
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Parents and old students raised questions on the contract
रोहतक।
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प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की प्रवेश प्रक्रिया शुरू होते ही बॉन्ड पॉलिसी विवाद फिर उठ खड़ा हुआ है। दाखिला प्रक्रिया के तहत पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) में चल रही काउंसिलिंग में शामिल होने पहुंचे विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों ने इस पर एतराज जताया है। इस मुद्दे को लेकर संस्थान के पुराने विद्यार्थियों से चर्चा के बाद सभी कुलपति प्रो. अनिता सक्सेना से उनके कार्यालय मिलने पहुंचे। यहां सभी ने बॉन्ड पॉलिसी की शर्तें और अनुबंध (एग्रीमेंट) दोनों के भिन्न होने व विद्यार्थियों से अभी एग्रीमेंट जमा नहीं कराने की राहत के साथ समस्या के समाधान की अपील की है। सरकार ने समाधान नहीं किया तो पिछले वर्ष की तरह काउंसिलिंग फिर बीच में अटक सकती है।
अभिभावकों वे विद्यार्थियों ने कहा कि त्रिपक्षीय समझौते की शर्तें सरकार की बॉन्ड पॉलिसी से मेल नहीं खा रही हैं। इस समझौते में बदलाव किया जाए। समस्या का समाधान कराया जाए। समाधान नहीं होने तक विद्यार्थियाें से एग्रीमेंट जमा न कराया जाए। इस बारे में स्थिति स्पष्ट की जाए। विद्यार्थियों ने कहा कि कुलपति से हुई बातचीत में उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कुलपति ने कहा कि आपकी बात अधिकारियाें तक पहुंचाई जाएगी। फैसला उन्हें ही करना है। यह सरकार व मुख्यालय के स्तर का मामला है। इसके बाद सभी विद्यार्थी व अभिभावक वापस लौट आए। अब विद्यार्थी प्रशासन का इंतजार करने के बाद अपनी बैठक में विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद अगला कदम उठाएंगे।
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त्रिपक्षीय समझौता बन चिंता का सबब
विद्यार्थियों ने कहा कि पीजीआईएमएस में 2023 बैच की दाखिला प्रक्रिया जारी है। इसमें विद्यार्थियों को दाखिले के लिए बॉन्ड पॉलिसी के अनुसार एक त्रिपक्षीय समझौता जमा करना है। यह विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यह एग्रीमेंट पिछले वर्ष 21 दिसंबर 2022 को अधिसूचित की गई चिकित्सा शिक्षा विभाग की बॉन्ड पॉलिसी के तहत मांगा जा रहा है। इसकी शर्तें बॉन्ड पॉलिसी की शर्तों से अलग हैं। इसलिए वर्ष 2020, 2021 और 2022 बैच के विद्यार्थियों ने डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को पत्र लिखकर इस एग्रीमेंट में बॉन्ड पॉलिसी के अनुसार बदलाव करने की मांग की गई है। साथ ही सरकार के वित्त विभाग और निजी बैंक के बीच हुए एमओयू का जिक्र एग्रीमेंट में किया जा रहा है। यह विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को दिखाया जाए ताकि विद्यार्थी एमओयू को समझ सकें। समस्या का जल्द समाधान नहीं होने पर वह अगला कदम उठाने के लिए विवश होंगे।
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