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लकवा और पेट रोग से परेशान बुजुर्गों की सुनने वाला कोई नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 19 Nov 2016 02:36 AM IST
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बुजुर्ग
- फोटो : अमर उजाला
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बैंकों में लोगों की भीड़ सुबह 8 बजे से ही लगनी शुरू जाती है। किसी को नोट बदलवाने की चिंता है तो किसी को पैसा निकालने और जमा कराने की। नोटबंदी की वजह से आम जन से लेकर बैंक-डाकघर के कर्मचारियों और अधिकारी तक सब परेशान हैं। इन सब में सबसे अधिक दिक्कत बीमार बुजुर्गों को हो रही है। वहीं, अधिकतर घरों की महिलाओं को भी परेशानियों से दो-चार होना पड़ा रहा है।
घंटों कतार में खड़े होने के लिए बीमार बुजुर्गों के पास समय तो है, लेकिन ताकत नहीं है। चंद कदम चलने में भी असमर्थ बुजुर्ग घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने को विवश हैं। कहने को तो सरकार की तरफ से लोगाें की सुविधा के लिए हर रोज नए-नए आदेश आ रहे हैं। सीनियर सिटीजन के लिए भी अलग लाइन बनाने के आदेश हैं, लेकिन बैंकों में ऐसी व्यवस्था बनाई नहीं की जा रही है।
स्थिति यह है कि बैंकों के बाहर और अंदर 90 साल की बुजुर्ग को भी घंटों परेशान होना पड़ रहा है। भीड़ में धक्के खाने पड़ रहे हैं। बुजुर्ग बैंक अधिकारियों से मदद की गुहार लगाते हैं तो अधिकारी हाथ जोड़ लेते हैं। अलग से लाइन बनाते हैं तो भीड़ में खड़े लोग उनके साथ झगड़ने लगते हैं। एक तरफ तो पीएम मोदी कह रहे हैं कि लोगों ने अनाथालय में पड़े अपने मां-बाप के खातों में पैसे डाल दिए हैं, लेकिन एक हकीकत यह भी है कि बैंकों के बाहर नकदी के लिए बुजुर्गों की बेकद्री अधिक हो रही है।
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आपरेशन के लिए पैसे निकालने आई छोटा देवी
प्रेम नगर निवासी छोटा देवी की उम्र करीब 90 साल है। उनका पीजीआई में पेट का आपरेशन होना है। उन्हें इलाज के लिए पैसे चाहिए इसलिए अपनी बहू प्रवीण के साथ बैंक आईं। बैंक मैनेजर से टोकन लेने के लिए बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उन्हें बाहर इंतजार करना पड़ा। कुछ देर खड़ी रहीं लेकिन जब पांवों ने जवाब दे दिए तो जमीन पर ही बैठ गईं। इस बीच सिफारिशी लोगों को टोकन मिलते देख उनका मन बहुत दुखी हो गया। उनकी बहू ने बताया कि बैंक प्रबंधक से कई बार मिन्नतें की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। करीब डेढ़ घंटे बाद जाकर टोकन मिला है। जबकि उनकी सास को बैठने में ज्यादा दिक्कत है।
आधे शरीर को लकवा, लेकिन दो घंटे बैठा फौजी
खिड़वाली से पूर्व फौजी सत्यनारायण पत्नी राजरानी के साथ बैंक आए थे। राजरानी ने बताया कि उनके पति को सात साल पहले लकवा मार गया था। वे मुश्किल से ठीक हुए हैं, लेकिन अब भी आधे शरीर का लकवा ठीक नहीं हुआ है। वे चलने, बोलने और खाने में असमर्थ हैं। उनकी पेंशन आती है। पति के साथ वह जीवन प्रमाण पत्र जमा कराने और पैसे निकालने के लिए सुबह 10 बजे बैंक आईं। दो घंटे तक लाइन में लगने के बाद उन्हें टोकन मिला। प्रबंधक से बार-बार अपील की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
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ड्यूटी छोड़कर आ रहे बैंक
सैनिक बोर्ड में कार्यरत सुरेश कुमार ने बताया कि वे पिछले चार दिनों से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन टोकन नहीं मिल रहा है। ड्यूटी छोड़कर कतार का हिस्सा इसलिए बन रहे हैं, क्योंकि उनके पास घर का खर्चा चलाने के लिए पैसे नहीं हैं। उधार लेकर काम चला रहे हैं। शादियों का सीजन चल रहा है। शगुन देने तक के लिए पैसे नहीं हैं।
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नहीं जमा हो पाया जीवन प्रमाण पत्र
डेयरी मोहल्ला से आए 75 साल के सूरज सिंह ने बताया कि वह अपनी पेंशन निकलवाने के लिए बैंक में जीवन प्रमाण पत्र लेकर आए थे। लेकिन बैंक कर्मी ने उनसे सभी पहचान पत्र लेकर आने को कहा। इस कारण उन्हें खाली हाथ जाना पड़ा। इससे पहले उनको जीवन प्रमाण पत्र से ही कैश मिल जाया करता था। वह चलने में असमर्थ है, लेकिन यहां सुनने वाला कोई नहीं है।
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एसबीआई में लोगों ने फौजी का पकड़ा गिरेबान, हंगामा
रोहतक। नोटबंदी को लेकर लोगों में इतना गुस्सा है कि वे मारपीट पर उतर आए हैं। शुक्रवार को एसबीआई की मुख्य शाखा में सुबह 11 बजे जब लोगों को टोकन मिलने बंद हो गए तो उनका सब्र जवाब देने लगा। कतार में खड़े एक फौजी ने सलाह दी कि टोकन वाली सीट पर जाकर कर्मचारी को देख आओ। इस पर लोगों ने उन्हें ही जाने के लिए कहा।
जब फौजी बैंक प्रबंधक से बातचीत करके बाहर आकर लाइन में अपनी जगह खड़े होने लगा तो लोगाें ने मना कर दिया। कतार में खड़े एक सीनियर सिटीजन ने कहा कि वह सबसे पीछे आकर आगे खड़े होना चाहते हैं। फौजी ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। इसी बीच एक सीनियर सिटीजन ने फौजी का गिरेबान पकड़कर बाहर कर दिया। इसके बाद कुछ और लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इसे संभालने के लिए पुलिस कर्मी भी नहीं आए। मामला ज्यादा न बिगड़ने इसलिए फौजी लाइन में सबसे आखिर में जाकर खड़ा हो गया।
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घंटों कतार में खड़े होने के लिए बीमार बुजुर्गों के पास समय तो है, लेकिन ताकत नहीं है। चंद कदम चलने में भी असमर्थ बुजुर्ग घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने को विवश हैं। कहने को तो सरकार की तरफ से लोगाें की सुविधा के लिए हर रोज नए-नए आदेश आ रहे हैं। सीनियर सिटीजन के लिए भी अलग लाइन बनाने के आदेश हैं, लेकिन बैंकों में ऐसी व्यवस्था बनाई नहीं की जा रही है।
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स्थिति यह है कि बैंकों के बाहर और अंदर 90 साल की बुजुर्ग को भी घंटों परेशान होना पड़ रहा है। भीड़ में धक्के खाने पड़ रहे हैं। बुजुर्ग बैंक अधिकारियों से मदद की गुहार लगाते हैं तो अधिकारी हाथ जोड़ लेते हैं। अलग से लाइन बनाते हैं तो भीड़ में खड़े लोग उनके साथ झगड़ने लगते हैं। एक तरफ तो पीएम मोदी कह रहे हैं कि लोगों ने अनाथालय में पड़े अपने मां-बाप के खातों में पैसे डाल दिए हैं, लेकिन एक हकीकत यह भी है कि बैंकों के बाहर नकदी के लिए बुजुर्गों की बेकद्री अधिक हो रही है।
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आपरेशन के लिए पैसे निकालने आई छोटा देवी
प्रेम नगर निवासी छोटा देवी की उम्र करीब 90 साल है। उनका पीजीआई में पेट का आपरेशन होना है। उन्हें इलाज के लिए पैसे चाहिए इसलिए अपनी बहू प्रवीण के साथ बैंक आईं। बैंक मैनेजर से टोकन लेने के लिए बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उन्हें बाहर इंतजार करना पड़ा। कुछ देर खड़ी रहीं लेकिन जब पांवों ने जवाब दे दिए तो जमीन पर ही बैठ गईं। इस बीच सिफारिशी लोगों को टोकन मिलते देख उनका मन बहुत दुखी हो गया। उनकी बहू ने बताया कि बैंक प्रबंधक से कई बार मिन्नतें की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। करीब डेढ़ घंटे बाद जाकर टोकन मिला है। जबकि उनकी सास को बैठने में ज्यादा दिक्कत है।
आधे शरीर को लकवा, लेकिन दो घंटे बैठा फौजी
खिड़वाली से पूर्व फौजी सत्यनारायण पत्नी राजरानी के साथ बैंक आए थे। राजरानी ने बताया कि उनके पति को सात साल पहले लकवा मार गया था। वे मुश्किल से ठीक हुए हैं, लेकिन अब भी आधे शरीर का लकवा ठीक नहीं हुआ है। वे चलने, बोलने और खाने में असमर्थ हैं। उनकी पेंशन आती है। पति के साथ वह जीवन प्रमाण पत्र जमा कराने और पैसे निकालने के लिए सुबह 10 बजे बैंक आईं। दो घंटे तक लाइन में लगने के बाद उन्हें टोकन मिला। प्रबंधक से बार-बार अपील की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
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ड्यूटी छोड़कर आ रहे बैंक
सैनिक बोर्ड में कार्यरत सुरेश कुमार ने बताया कि वे पिछले चार दिनों से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन टोकन नहीं मिल रहा है। ड्यूटी छोड़कर कतार का हिस्सा इसलिए बन रहे हैं, क्योंकि उनके पास घर का खर्चा चलाने के लिए पैसे नहीं हैं। उधार लेकर काम चला रहे हैं। शादियों का सीजन चल रहा है। शगुन देने तक के लिए पैसे नहीं हैं।
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नहीं जमा हो पाया जीवन प्रमाण पत्र
डेयरी मोहल्ला से आए 75 साल के सूरज सिंह ने बताया कि वह अपनी पेंशन निकलवाने के लिए बैंक में जीवन प्रमाण पत्र लेकर आए थे। लेकिन बैंक कर्मी ने उनसे सभी पहचान पत्र लेकर आने को कहा। इस कारण उन्हें खाली हाथ जाना पड़ा। इससे पहले उनको जीवन प्रमाण पत्र से ही कैश मिल जाया करता था। वह चलने में असमर्थ है, लेकिन यहां सुनने वाला कोई नहीं है।
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एसबीआई में लोगों ने फौजी का पकड़ा गिरेबान, हंगामा
रोहतक। नोटबंदी को लेकर लोगों में इतना गुस्सा है कि वे मारपीट पर उतर आए हैं। शुक्रवार को एसबीआई की मुख्य शाखा में सुबह 11 बजे जब लोगों को टोकन मिलने बंद हो गए तो उनका सब्र जवाब देने लगा। कतार में खड़े एक फौजी ने सलाह दी कि टोकन वाली सीट पर जाकर कर्मचारी को देख आओ। इस पर लोगों ने उन्हें ही जाने के लिए कहा।
जब फौजी बैंक प्रबंधक से बातचीत करके बाहर आकर लाइन में अपनी जगह खड़े होने लगा तो लोगाें ने मना कर दिया। कतार में खड़े एक सीनियर सिटीजन ने कहा कि वह सबसे पीछे आकर आगे खड़े होना चाहते हैं। फौजी ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। इसी बीच एक सीनियर सिटीजन ने फौजी का गिरेबान पकड़कर बाहर कर दिया। इसके बाद कुछ और लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इसे संभालने के लिए पुलिस कर्मी भी नहीं आए। मामला ज्यादा न बिगड़ने इसलिए फौजी लाइन में सबसे आखिर में जाकर खड़ा हो गया।