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बारिश न होने से पिछड़ी धान की रोपाई
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बारिश न होने से इस बार जिले में धान की रोपाई काफी पिछड़ गई है। पिछले साल की तुलना में अब तक आधे रकबे में भी धान नहीं लग सका है। किसान मानसून की उम्मीद में हैं। मौसम विभाग ने छह और सात जुलाई को बारिश की संभावना जताई है।
धान की रोपाई 15 जून से शुरू होती है। इस बार मानसून के 15 जून तक पहुंचने की संभावना जताई गई थी, जिसने किसानों को काफी राहत दी थी। लेकिन विभिन्न हवाओं से टकरा कर मानसून भटक गया और अब तक बारिश नहीं हुई है। जिले में धान का संभावित रकबा साठ हजार हेक्टेयर है। पर बारिश न होने से अब तक सिर्फ 3140 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो सकी है। जबकि, पिछले साल इस समय तक 6100 हेक्टेयर से ज्यादा रकबा कवर हो चुका था। जिले में सिंचाई के लिए नहरी पानी की ज्यादा उपलब्धता नहीं है, बिजली से चलने वाले ट्यूबवेल भी बहुत कम हैं। ज्यादातर मोटरें डीजल से चलने वाली हैं। इस समय डीजल की कीमत में हो रही बढ़ोतरी से किसान डीजल की मोटरों से सिंचाई करने में गुरेज कर रहे हैं। क्योंकि इससे उत्पादन की लागत करीब छह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ जाती है। अधिकांश किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पहले तो रोपाई के लिए मजदूरों की भी किल्लत थी। लेकिन मजदूर जीटी रोड बेल्ट और पंजाब में रोपाई करवा कर आ गए हैं। अब किसानों की सारी उम्मीदें बारिश पर टिकी हैं।
पौध को रोग लगने की आशंका
रोपाई में देरी होने से किसानों के लिए एक और समस्या खड़ी हो गई है। अब धान की पौध को रोग लगने की आशंका है। धान की रोपाई 15 जून से शुरू होती है, किसान अपने हिसाब से एक से पांच-छह जून तक पौध लगा देते हैं, जो 15 दिन में तैयार हो जाती है। 15 से 20 दिन के अंदर उसकी रोपाई हो जाती है। पर इस बार पौध को लगे हुए 30-35 दिन हो गए हैं। कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि लंबे समय तक पौध लगे रहने से उसकी जड़ों की ग्रोथ वहीं होने लगती है। उखाड़ने पर रूट हेयर टूट जाते हैं। रोपाई करने पर उसमें फंगल डिजीज बकानी रोग लग जाता है। अब किसानों को अतिरिक्त सावधानी रखनी पड़ेगी। कीटनाशक घोल का छिड़काव करना पड़ेगा।
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धान की रोपाई 15 जून से शुरू होती है। इस बार मानसून के 15 जून तक पहुंचने की संभावना जताई गई थी, जिसने किसानों को काफी राहत दी थी। लेकिन विभिन्न हवाओं से टकरा कर मानसून भटक गया और अब तक बारिश नहीं हुई है। जिले में धान का संभावित रकबा साठ हजार हेक्टेयर है। पर बारिश न होने से अब तक सिर्फ 3140 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो सकी है। जबकि, पिछले साल इस समय तक 6100 हेक्टेयर से ज्यादा रकबा कवर हो चुका था। जिले में सिंचाई के लिए नहरी पानी की ज्यादा उपलब्धता नहीं है, बिजली से चलने वाले ट्यूबवेल भी बहुत कम हैं। ज्यादातर मोटरें डीजल से चलने वाली हैं। इस समय डीजल की कीमत में हो रही बढ़ोतरी से किसान डीजल की मोटरों से सिंचाई करने में गुरेज कर रहे हैं। क्योंकि इससे उत्पादन की लागत करीब छह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर बढ़ जाती है। अधिकांश किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पहले तो रोपाई के लिए मजदूरों की भी किल्लत थी। लेकिन मजदूर जीटी रोड बेल्ट और पंजाब में रोपाई करवा कर आ गए हैं। अब किसानों की सारी उम्मीदें बारिश पर टिकी हैं।
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पौध को रोग लगने की आशंका
रोपाई में देरी होने से किसानों के लिए एक और समस्या खड़ी हो गई है। अब धान की पौध को रोग लगने की आशंका है। धान की रोपाई 15 जून से शुरू होती है, किसान अपने हिसाब से एक से पांच-छह जून तक पौध लगा देते हैं, जो 15 दिन में तैयार हो जाती है। 15 से 20 दिन के अंदर उसकी रोपाई हो जाती है। पर इस बार पौध को लगे हुए 30-35 दिन हो गए हैं। कृषि विभाग के एसडीओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि लंबे समय तक पौध लगे रहने से उसकी जड़ों की ग्रोथ वहीं होने लगती है। उखाड़ने पर रूट हेयर टूट जाते हैं। रोपाई करने पर उसमें फंगल डिजीज बकानी रोग लग जाता है। अब किसानों को अतिरिक्त सावधानी रखनी पड़ेगी। कीटनाशक घोल का छिड़काव करना पड़ेगा।
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