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Rohtak News: तिरंगे के नीचे कुश्ती नहीं खेल पाएंगे हमारे पहलवान
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- वैज्ञानिकों ने चांद पर पहुंचाया तो पहलवानों से छिन गया तिरंगा
- एशियन समेत आने वाले खेल मुकाबलों में तिरंगे के नीचे नहीं खेल सकेंगे देश के पहलवान
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक।
कुश्ती के खेल में राजनीति का खेल पहलवानों पर भारी पड़ गया है। एक ओर देश के वैज्ञानिकों ने दिन रात मेहनत कर चांद पर तिरंगा फरहाया है तो दूसरी तरफ राजनीतिक व्यूह ने पहलवानों के हाथों से तिरंगा ही छीन लिया है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) की ओर से भारतीय कुश्ती महासंघ की सदस्यता निलंबित करने के बाद हमारे पहलवान एशियन खेलों समेत आने वाले विभिन्न टूर्नामेंटों में तिरंगे के बगैर प्रदर्शन करने को विवश होंगे। इस फैसले से कोच और पहलवानों और में काफी रोष है। अमर उजाला ने विभिन्न कुश्ती कोचों से बातचीत की तो उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
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भारतीय कुश्ती महासंघ की सदस्यता निलंबित होना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कुश्ती और इससे जुड़े पहलवानों के लिए दुखद घटना है। खेल और खिलाड़ियों के बेहतर भविष्य के लिए फेडरेशन का होना अनिवार्य है। इस ओर समय रहते ध्यान देने की जरूरत है। फेडरेशन के दुरुस्त होने से ही कुश्ती और पहलवानों को बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इसके बगैर देश के पहलवान अपने ही राष्ट्रीय के नीचे खेलने से वंचित रह जाएंगे।
मनदीप, कोच, छोटूराम स्टेडियम अखाड़ा।
भारतीय कुश्ती महासंघ का भंग होना दुखद है। इसके संकेत पहले से मिल रहे थे। समय पर फेडरेशन के चुनाव नहीं होने से यह स्थिति बनी है। अब हमारे पहलवान यूडब्ल्यूडब्ल्यू के झंडे के नीचे ही खेल सकेंगे। तिरंगे के नीचे खेलने का अवसर नहीं मिलेगा। यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने फेडरेशन को पहले ही इस बारे मेंं सचेत कर दिया था। इसके बावजूद नई कार्यकारिणी चुनने में देरी हुई। इसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है।
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रणबीर ढाका, कोच, मेहर सिंह अखाड़ा।
कुश्ती संघ का जल्द चुनाव करवाया जाए : योगेश्वर दत्त
साल 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ द्वारा भारतीय कुश्ती संघ के निलंबन की खबर खिलाड़ियों के लिए और कुश्ती के खेल के लिए आघात है। युवा खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया है। यह देश का दुर्भाग्य है कि कुश्ती को आज मनचाहे तरीके से दबाया जा रहा है। वास्तव में यह समस्त कुश्ती जगत का शोषण है। खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ से निवेदन है कि कुश्ती संघ का जल्द चुनाव करवाया जाए ताकि भारतीय कुश्ती को एक बार फिर पुनर्जीवित किया जा सके।
जो हुआ वह ठीक नहीं है। उम्मीद है कि जल्द ही भारतीय कुश्ती संघ का गठन होगा और हम भारतीय झंडे के नीचे खेलेंगे। भारतीय कुश्ती संघ का जल्द गठन होना चाहिए।
अंशु मलिक, पहलवान
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- वैज्ञानिकों ने चांद पर पहुंचाया तो पहलवानों से छिन गया तिरंगा
- एशियन समेत आने वाले खेल मुकाबलों में तिरंगे के नीचे नहीं खेल सकेंगे देश के पहलवान
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक।
कुश्ती के खेल में राजनीति का खेल पहलवानों पर भारी पड़ गया है। एक ओर देश के वैज्ञानिकों ने दिन रात मेहनत कर चांद पर तिरंगा फरहाया है तो दूसरी तरफ राजनीतिक व्यूह ने पहलवानों के हाथों से तिरंगा ही छीन लिया है। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) की ओर से भारतीय कुश्ती महासंघ की सदस्यता निलंबित करने के बाद हमारे पहलवान एशियन खेलों समेत आने वाले विभिन्न टूर्नामेंटों में तिरंगे के बगैर प्रदर्शन करने को विवश होंगे। इस फैसले से कोच और पहलवानों और में काफी रोष है। अमर उजाला ने विभिन्न कुश्ती कोचों से बातचीत की तो उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
भारतीय कुश्ती महासंघ की सदस्यता निलंबित होना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कुश्ती और इससे जुड़े पहलवानों के लिए दुखद घटना है। खेल और खिलाड़ियों के बेहतर भविष्य के लिए फेडरेशन का होना अनिवार्य है। इस ओर समय रहते ध्यान देने की जरूरत है। फेडरेशन के दुरुस्त होने से ही कुश्ती और पहलवानों को बेहतर अवसर मिल सकेंगे। इसके बगैर देश के पहलवान अपने ही राष्ट्रीय के नीचे खेलने से वंचित रह जाएंगे।
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मनदीप, कोच, छोटूराम स्टेडियम अखाड़ा।
भारतीय कुश्ती महासंघ का भंग होना दुखद है। इसके संकेत पहले से मिल रहे थे। समय पर फेडरेशन के चुनाव नहीं होने से यह स्थिति बनी है। अब हमारे पहलवान यूडब्ल्यूडब्ल्यू के झंडे के नीचे ही खेल सकेंगे। तिरंगे के नीचे खेलने का अवसर नहीं मिलेगा। यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने फेडरेशन को पहले ही इस बारे मेंं सचेत कर दिया था। इसके बावजूद नई कार्यकारिणी चुनने में देरी हुई। इसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है।
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रणबीर ढाका, कोच, मेहर सिंह अखाड़ा।
कुश्ती संघ का जल्द चुनाव करवाया जाए : योगेश्वर दत्त
साल 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने फेसबुक पर पोस्ट डालकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ द्वारा भारतीय कुश्ती संघ के निलंबन की खबर खिलाड़ियों के लिए और कुश्ती के खेल के लिए आघात है। युवा खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया है। यह देश का दुर्भाग्य है कि कुश्ती को आज मनचाहे तरीके से दबाया जा रहा है। वास्तव में यह समस्त कुश्ती जगत का शोषण है। खेल मंत्रालय और भारतीय ओलंपिक संघ से निवेदन है कि कुश्ती संघ का जल्द चुनाव करवाया जाए ताकि भारतीय कुश्ती को एक बार फिर पुनर्जीवित किया जा सके।
जो हुआ वह ठीक नहीं है। उम्मीद है कि जल्द ही भारतीय कुश्ती संघ का गठन होगा और हम भारतीय झंडे के नीचे खेलेंगे। भारतीय कुश्ती संघ का जल्द गठन होना चाहिए।
अंशु मलिक, पहलवान