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Rohtak News: संगठन कार्यकर्ताओं ने आसौदा गांव में किसानों को दिया महापंचायत का न्योता
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-फोटो 58 : 23 सितंबर की महापंचायत का न्यौता देते संगठन सदस्य।
बहादुरगढ़। 9 दिसंबर 2021 को दिल्ली बार्डर से घर वापसी के समय सरकार ने एसकेएम को एमएसपी समेत कुछ मांगें पूरा करने का एक आश्वासन दिया था। किसान संगठनों ने उस आश्वासन को पूरा करने के लिए सरकार को बार-बार याद दिलाई, परंतु देश भर में उठी किसानों की जोरदार आवाज को सरकार ने अनदेखा कर दिया। उन मांगों को पूरा कराने के लिए
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन ने 23 सितंबर को तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली में देशभर के किसानों और भूमिहीन गरीबों की महापंचायत बुलाई है। महापंचायत को सफल बनाने के लिए संगठन कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र के गांवों में जा रहे हैं और हैंडबिल बांटकर लोगों को पंचायत में भाग लेने का निमंत्रण दे रहे हैं। इसी कड़ी में संगठन कार्यकर्ताओं ने जिले के आसौदा और अन्य गांवों का दौरा किया। घर-घर जाकर जनसंपर्क किया।
12 गांव के खाप प्रधान कपूर सिंह दलाल ने बताया कि गेहूं, धान और एकाध फसल को छोड़कर अन्य फसलों व सब्जियों आदि का कोई एमएसपी नहीं मिलता। फसल के समय इनके भाव पिट जाते हैं। किसान भीम सिंह भारद्वाज ने कहा कि डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक व कृषि औजार बहुत महंगे हैं, इससे खेती में लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। किसान रामचंद्र ने कहा कि ओलावृष्टि व जल भराव से हमारी फसलें बर्बाद हो जाती हैं, उनका मुआवजा भी नहीं मिलता।
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किसान रोहतास सिंह उर्फ हरि सिंह और अन्य कई किसानों ने कहा कि उनके खेतों से बगैर मुआवजा दिए जबरन अडानी कंपनी की 765 केवी की टावर लाइन निकाली जा रही है। यदि बिजली बिल संशोधन 2023 कानून बन गया तो बिजली किसानों और अन्य गरीब उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर हो जाएगी। किसान दिलबाग सिंह ने कहा कि छोटे किसानों व भूमिहीन ग्रामीण गरीबों के पास साल भर कोई काम नहीं है। उन्हें पूरे साल काम चाहिए। संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी ने बताया कि गांव में छोटे तथा सीमांत किसान अधिक हैं। केवल खेती पर गुजारा करना बिल्कुल संभव नहीं है। उनके नौजवान बेटे-बेटियां रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। उनके घर के हालात बहुत खराब हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के अलावा किसान-मजदूरों की मुक्ति का कोई रास्ता नहीं है। इस अभियान में संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी, रामकिशन तथा अन्य कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन ने 23 सितंबर को तालकटोरा स्टेडियम, नई दिल्ली में देशभर के किसानों और भूमिहीन गरीबों की महापंचायत बुलाई है। महापंचायत को सफल बनाने के लिए संगठन कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र के गांवों में जा रहे हैं और हैंडबिल बांटकर लोगों को पंचायत में भाग लेने का निमंत्रण दे रहे हैं। इसी कड़ी में संगठन कार्यकर्ताओं ने जिले के आसौदा और अन्य गांवों का दौरा किया। घर-घर जाकर जनसंपर्क किया।
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12 गांव के खाप प्रधान कपूर सिंह दलाल ने बताया कि गेहूं, धान और एकाध फसल को छोड़कर अन्य फसलों व सब्जियों आदि का कोई एमएसपी नहीं मिलता। फसल के समय इनके भाव पिट जाते हैं। किसान भीम सिंह भारद्वाज ने कहा कि डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक व कृषि औजार बहुत महंगे हैं, इससे खेती में लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। किसान रामचंद्र ने कहा कि ओलावृष्टि व जल भराव से हमारी फसलें बर्बाद हो जाती हैं, उनका मुआवजा भी नहीं मिलता।
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किसान रोहतास सिंह उर्फ हरि सिंह और अन्य कई किसानों ने कहा कि उनके खेतों से बगैर मुआवजा दिए जबरन अडानी कंपनी की 765 केवी की टावर लाइन निकाली जा रही है। यदि बिजली बिल संशोधन 2023 कानून बन गया तो बिजली किसानों और अन्य गरीब उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर हो जाएगी। किसान दिलबाग सिंह ने कहा कि छोटे किसानों व भूमिहीन ग्रामीण गरीबों के पास साल भर कोई काम नहीं है। उन्हें पूरे साल काम चाहिए। संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी ने बताया कि गांव में छोटे तथा सीमांत किसान अधिक हैं। केवल खेती पर गुजारा करना बिल्कुल संभव नहीं है। उनके नौजवान बेटे-बेटियां रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। उनके घर के हालात बहुत खराब हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के अलावा किसान-मजदूरों की मुक्ति का कोई रास्ता नहीं है। इस अभियान में संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडौठी, रामकिशन तथा अन्य कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।