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Rohtak News: बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में तीन घंटे बंद रही ओपीडी, बैरंग लौटे मरीज

Wed, 23 Nov 2022 06:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 23 Nov 2022 06:00 AM IST
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OPD remained closed for three hours in protest against the bond policy, patients returned
विद्यार्थियों को सम्बोधित करते एमएस डॉ. ईश्वर सिंह। अमर उजाला
रोहतक। बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में एमबीबीएस विद्यार्थियों का धरना-प्रदर्शन 22वें दिन में प्रवेश गया। मंगलवार को पीजीआई की ओपीडी तीन घंटे बंद रही। इस कारण बड़ी संख्या में मरीजों को बगैर इलाज ही लौटना पड़ा।
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ओपीडी में मंगलवार को आठ हजार के बजाय करीब पांच हजार मरीज ही पहुंचे। इनमें 2400 नए मरीज रहे। पीजीआई के सुरक्षा कर्मचारियों व प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के बीच ओपीडी में प्रवेश को लेकर खूब जोर आजमाइश हुई। इसके बावजूद किसी को भी ओपीडी में प्रवेश नहीं करने दिया गया। आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता अशोक तंवर को भी बाहर ही रखा। दोपहर को विद्यार्थियों ने एमएस कार्यालय में नारेबाजी कर ओपीडी में प्रवेश से रोके जाने का विरोध किया।
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एमबीबीएस विद्यार्थियों के धरने का समर्थन करते हुए आरडीए (रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) ने मंगलवार को तीन घंटे ओपीडी में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रखी। पेन डाउन हड़ताल के जरिये अपना विरोध जताया। इसके चलते मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ी। मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा, वहीं बड़ी संख्या में मरीज बगैर इलाज की बैरंग लौट गए। उधर, गार्डों ने विद्यार्थियों से अंदर आने की अनुमति दिखाने की बात कही तो विद्यार्थियों ने उनसे उन्हें रोकने के आदेश की प्रति मांगी। इसे लेकर दोनों ओर से धक्का-मुक्की भी हुई। हालात बिगड़ने से पहले पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ईश्वर व डीएमएस सुरक्षा अधिकारियों के साथ वहां पहुंचे। इसके बाद विद्यार्थियों को ओपीडी के प्रवेश द्वार से अलग कर दिया गया। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने यहीं बैठकर नारेबाजी के जरिये विरोध जताया।
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इधर, सुबह 11 बजते ही आरडीए ने मरीजों की जांच का काम बंद कर दिया। उनके काम नहीं करने के कारण ओपीडी में मौजूद मरीजों की भीड़ बाहर आ गई। इनमें से कोई घर चला गया तो कोई हड़ताल समाप्त होने के इंतजार में वहीं धूप सेंकने लगा। वरिष्ठ चिकित्सक काम करते रहे। उनके पास जितने मरीज पहुंचे उनकी जांच की गई। जबकि अनेक मरीज चिकित्सक की सलाह पर एक्सरे व अन्य जांच ही करा पाए। उन्हें डॉक्टर के कमरे खाली मिले। आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता अशोक तंवर व अन्य एक बार फिर विद्यार्थियों के बीच पहुंचे। उन्हें दोबारा अपना समर्थन देने के साथ हर संभव मदद का आश्वासन दिया। विद्यार्थियों के साथ उन्होंने ओपीडी में जाने का प्रयास किया तो उन्हें भी सुरक्षा कर्मचारियों ने रोक दिया।
ओपीडी में प्रदर्शन के बाद विद्यार्थियों ने एमएस कार्यालय की ओर कूच किया। यहां भी गार्डों ने उन्हें कार्यालय में जाने से रोक दिया। काफी देर तक एमएस कार्यालय के बाहर नारेबाजी करने के बाद एमएस डॉ. ईश्वर सिंह बाहर आए और विद्यार्थियों से बातचीत की। विद्यार्थियों ने ओपीडी में जाने से रोकने पर नाराजगी जताते हुए इसका कारण जाना। साथ ही लोगों को जागरूक बनाने के लिए उन्हें ओपीडी में जाने देने की अपील की। इस पर एमएस ने उन्हें अंदर जाने से साफ इनकार कर दिया। एमएस ने कहा कि विद्यार्थियों का ओपीडी में कोई काम नहीं है। वे लोगों को जागरूक करना चाहते हैं तो बाहर कर सकते हैं।
कोट्स-
पैर में फ्रैक्चर है। इलाज के लिए सुबह आठ बजे ओपीडी में आया था। मेरे से आगे 50 मरीज थे। जब मेरी बारी आई तो 11 बजे हड़ताल शुरू हो गई। हड़ताल दो बजे तक है। इसके बाद शायद बात बन जाए। डॉक्टर नहीं मिले तो दोबारा आना पड़ेगा।
- रामचंद्र, सुखपुरा चौक
पैर में फ्रैक्चर है। डॉक्टर ने जांच के लिए बुलाया था। इसके अलावा सुबह ओपीडी में आ गया था। डॉक्टर ने एक्सरे कराने को कहा था। एक्सरे करा कर लौटा तो डॉक्टर नहीं मिले। वे हड़ताल पर चले गए। इसलिए वापस जा रहा हूं।
- सुरेंद्र, शीतल नगर
पीजीआई की ओपीडी में इलाज के लिए आया था। पैर की हड्डी में लोहे का शिकंजा लगा है। इस कारण 600 रुपये किराए पर एंबुलेंस लेकर आया हूं। यहां आठ बजे पहुंचा था। डॉक्टर नौ बजे के बाद आए। मेरे टेस्ट व एक्सरे लिखने के बाद हड़ताल हो गई। अब दोबारा आना पड़ेगा।

- राजेश, सिंहपुरा खुर्द
गुर्दे में पथरी है। सोमवार देर रात इमरजेंसी आई थी। यहां से सुबह ओपीडी में भेज दिया। पहले आधार कार्ड में नाम गलत मिला। अब हड़ताल हो गई। इसलिए सुबह 8:30 बजे आने के बावजूद इलाज नहीं मिला है। इलाज के लिए किराए की गाड़ी करके यहां आए थे।
- धन्नी, बहुअकबरपुर
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