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Rohtak News: एक सच ने उजागर किए जीवन के विभिन्न पहलू
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रोहतक। राष्ट्रीय नाटक उत्सव के तहत मंगलवार को और एक सच नाटक का मंचन हुआ। इस पांच दिवसीय उत्सव के अंतिम दिन थियेटर ग्रुप दिल्ली के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों की वाहवाही बटोरी। हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स, पठानिया वर्ल्ड कैंपस, जेड ग्लोबल स्कूल व कला और सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा की ओर से यह आयोजन किया गया।
अजीज कुरेशी की परिकल्पना पर आधारित व काजल सूरी की ओर से निर्देशित नाटक और एक सच की कहानी जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती है। आदमी व औरत की समस्याओं को दर्शाने वाले इस नाटक की कहानी एक मास्टर व नेता के वार्तालाप की है। यह बेटियों को बचाने का संदेश देती है। इसमें दिखाया गया कि हमारे समाज में कोई औरत शादी के बाद अगर जल्द मां नहीं बनती तो आज भी उसे ताने दिए जाते हैं। लोग पीर फकीर, बाबाओं के ढोंग के चक्कर में पड़ जाते हैं। उन्हें जागरूक करते हुए नाटक दिखाता है कि कैसे ढोंगी बाबा नाड़े शाह अपने चेले नायब के साथ मिलकर गांव वालों को अपने चंगुल में फंसाता है।
नाटक में दो ऐसी बूढ़ी औरतें हैं जिन्हें समाज ने छोड़ दिया है। ये दोनों एक साथ रहती हैं व आपस में लड़ती-झगड़ती रहती हैं। लेकिन, एक-दूसरे के बिना रह भी नहीं सकती। इन दोनों की नोकझोंक नाटक को हास्य प्रधान बना देती है। झूठ व अंधविश्वास के प्रति जागरूक करता हुआ यह नाटक जिंदगी के मार्मिक पहलुओं को छूता है व दर्शकों को कभी गंभीर, तो कभी हास्य से गुदगुदाता है।
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नाटक में काजल सूरी, जसकिरन चोपड़ा, तनिषा गांधी, कृष बब्बर, हर्षित, शुभम शर्मा, प्रवीण, आशा खन्ना, नीरज तिवारी, गीता सेठी ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। नाटक में मेकअप मुहम्मद राशिद का रहा। संगीत संचालन स्पर्श रॉय ने किया। लाइट्स नीरज ने संभाली। जबकि रूबरू थिएटर ग्रुप के प्रेसिडेंट समीर खान ने प्रोडक्शन का काम बखूबी संभाला। प्रोडक्शन मैनेजर रोहित कुमार रहे। इस मौके पर डॉ. संतोष मुदगिल, सर्वजीत अहलूवालिया, सुशीला देवी, विश्वदीपक त्रिखा, नलिनी, तरुणपुष्प, नरेंद्र शर्मा, अजय गर्ग, अंकुर सैनी, दिनेश सिंह, डॉ. प्रिया कौशिक, श्रीभगवान शर्मा मौजूद रहे।
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अजीज कुरेशी की परिकल्पना पर आधारित व काजल सूरी की ओर से निर्देशित नाटक और एक सच की कहानी जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती है। आदमी व औरत की समस्याओं को दर्शाने वाले इस नाटक की कहानी एक मास्टर व नेता के वार्तालाप की है। यह बेटियों को बचाने का संदेश देती है। इसमें दिखाया गया कि हमारे समाज में कोई औरत शादी के बाद अगर जल्द मां नहीं बनती तो आज भी उसे ताने दिए जाते हैं। लोग पीर फकीर, बाबाओं के ढोंग के चक्कर में पड़ जाते हैं। उन्हें जागरूक करते हुए नाटक दिखाता है कि कैसे ढोंगी बाबा नाड़े शाह अपने चेले नायब के साथ मिलकर गांव वालों को अपने चंगुल में फंसाता है।
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नाटक में दो ऐसी बूढ़ी औरतें हैं जिन्हें समाज ने छोड़ दिया है। ये दोनों एक साथ रहती हैं व आपस में लड़ती-झगड़ती रहती हैं। लेकिन, एक-दूसरे के बिना रह भी नहीं सकती। इन दोनों की नोकझोंक नाटक को हास्य प्रधान बना देती है। झूठ व अंधविश्वास के प्रति जागरूक करता हुआ यह नाटक जिंदगी के मार्मिक पहलुओं को छूता है व दर्शकों को कभी गंभीर, तो कभी हास्य से गुदगुदाता है।
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नाटक में काजल सूरी, जसकिरन चोपड़ा, तनिषा गांधी, कृष बब्बर, हर्षित, शुभम शर्मा, प्रवीण, आशा खन्ना, नीरज तिवारी, गीता सेठी ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। नाटक में मेकअप मुहम्मद राशिद का रहा। संगीत संचालन स्पर्श रॉय ने किया। लाइट्स नीरज ने संभाली। जबकि रूबरू थिएटर ग्रुप के प्रेसिडेंट समीर खान ने प्रोडक्शन का काम बखूबी संभाला। प्रोडक्शन मैनेजर रोहित कुमार रहे। इस मौके पर डॉ. संतोष मुदगिल, सर्वजीत अहलूवालिया, सुशीला देवी, विश्वदीपक त्रिखा, नलिनी, तरुणपुष्प, नरेंद्र शर्मा, अजय गर्ग, अंकुर सैनी, दिनेश सिंह, डॉ. प्रिया कौशिक, श्रीभगवान शर्मा मौजूद रहे।