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Rohtak News: जिला परिषद की बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, पार्षदों ने फोन नहीं उठाने का भी लगाया आरोप
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रोहतक। बुधवार को विकास भवन के कॉफ्रेंस हाल में जिला परिषद की बैठक आयोजित की गई। सभी पार्षद, ब्लॉक समितियों के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सदस्य भी उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन मंजू हुड्डा व सीईओ विजय मलिक ने की। बैठक में विभाग के आधे से ज्यादा अधिकारी नदारद रहे। कुछ विभागों के अधिकारी पहुंचे तो शिकायत से संबंधित अधिकारी नहीं पहुंचे, जिनमें कुछ का ट्रांसफर हो गया है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारी उनके फोन तक नहीं उठा रहे हैं।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय सिंह मलिक ने कहा कि सरकार द्वारा पंचायती राज अधिनियम के तहत तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई है। इनमें जिला परिषद, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत शामिल है। गांव के किसी भी विकास कार्य के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव अनिवार्य है। सरकार द्वारा अधिनियम के तहत प्रत्येक संस्था के अधिकार निर्धारित किए गए हैं। बैठक में अनुपस्थित रहे अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। बैठक में 6 एजेंडे शामिल थे। बैठक में पार्षदों द्वारा छह करोड़ 47 लाख रुपये की राशि के कार्यों की स्वीकृति के लिए जिला परिषद की चेयरपर्सन को अधिकृत किया गया है। चेयरपर्सन मंजू हुड्डा ने कहा कि सभी अधिकारी, पार्षदों व अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की समस्याओं का यथाशीघ्र निपटारा करवाए। अधिकारी जिला परिषद की हाउस मीटिंग को गंभीरता से लेते हुए उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि पार्षदों की समस्याओं का समाधान हो सके। बैठक में ई-लाइब्रेरी, महिला सांस्कृतिक केंद्र, इनडोर जिम व अन्य विकास कार्यों के बारे में अधिकारियों से विचार-विमर्श किया गया।
11:30 बजे शुरू हुई बैठक में 12 बजे तक पहुंचते रहे
परिषद की बैठक सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई और ब्लाक समिति के चेयरमैन व पार्षद 12:30 बजे तक आते रहे। कुछ विभागों के अधिकारी न आने के कारण पार्षद चेयरमैन समेत सभी में काफी रोष देखने को मिला। बैठक में पार्षद अपनी समस्याएं बता रहे थे, लेकिन शिकायत से संबंधित कुछ अधिकारी नदारद रहे तो कुछ का ट्रांसफर हो चुका था। पार्षदों ने सीईओ विजय कुमार के सामने आरोप लगाया कि अधिकारी उनके फोन तक नहीं उठाते हैं। न ही शिकायतों की सुनवाई हो रही है। ठेकेदार गांव में आकर सीधा अपना काम शुरू कर देते हैं, हमें पता तक नहीं होता। अधिकारियों की लापरवाही के चलते ठेकेदार हमारा आमना सामना तक करते हैं। बैठक में पार्षद जयदेव डागर, अनिल, सोनू पिलाना, अमित रांगी, मांगे राम, सीमा फोगाट, सुमन मलिक, दीपिका, नीलम खत्री, अनिल, धीरज मलिक, सतीश मलिक समेत सभी पार्षद मौजूद रहे।
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सीईओ ने जिला परिषद के प्रतिनिधियों को पीछे बैठने का किया आग्रह, लेकिन सीट से नहीं उठे
जिला परिषद के सीईओ विजय कुमार ने कानून का हवाला देते हुए पार्षद प्रतिनिधियों को पीछे बैठने का आग्रह किया, लेकिन पांच पार्षद प्रतिनिधियों में से एक भी पीछे नहीं बैठा। सीईओ ने सख्त हिदायत दी कि बैठक में आप लोग कुछ नहीं बोलेंगे। सिर्फ चुने गए पार्षद ही अपनी बात रख सकते हैं।
सबसे ज्यादा समस्या जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से संबंधित रही
जिला परिषद की बैठक में सबसे ज्यादा समस्या पानी, सीवरेज व पानी की डिग्गी से संबंधित रही। लेकिन संबंधित अधिकारी एक भी मौके पर नहीं पहुंचा। जो अधिकारी मौके पर पहुंचे उनके पास समस्याओं का कोई जवाब नहीं था। मौके पर पहुंचे एसडीओ वीके जैन ने कहा कि समस्याओं से संबंधित अधिकारी का ट्रांसफर हो गया है। कुछ मौके पर ही नहीं पहुंचे। बिजली निगम से संबंधित समस्या उठी तो बिजली निगम के मौके पर पहुंचे दो एसडीओ जा चुके थे। इस पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
अधिकारी नहीं दे पा रहे जवाब
जिला पार्षदों की शिकायतों का अधिकारियों के पास नहीं मिला जवाब कबूलपुर से पार्षद जयदेव डागर ने बताया कि उनके गांव में पानी का एक रजवाहा बनाया जाना था। जो कि 2013 में उसकी शुरूआत हुई थी, लेकिन आज उसे दस साल हो गए हैं। आज तक उसका कोई समाधान नहीं हुआ है। मौके पर पहुंचे अधिकारी द्वारा कोई संतुष्ट जवाब नहीं दिया गया। महम हलके में भी सबसे ज्यादा समस्याएं रही, लेकिन मौके पर अधिकारियों के न पहुंचने से शिकायत धरी की धरी रह गई।
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जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय सिंह मलिक ने कहा कि सरकार द्वारा पंचायती राज अधिनियम के तहत तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई है। इनमें जिला परिषद, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत शामिल है। गांव के किसी भी विकास कार्य के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव अनिवार्य है। सरकार द्वारा अधिनियम के तहत प्रत्येक संस्था के अधिकार निर्धारित किए गए हैं। बैठक में अनुपस्थित रहे अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जाएगी। बैठक में 6 एजेंडे शामिल थे। बैठक में पार्षदों द्वारा छह करोड़ 47 लाख रुपये की राशि के कार्यों की स्वीकृति के लिए जिला परिषद की चेयरपर्सन को अधिकृत किया गया है। चेयरपर्सन मंजू हुड्डा ने कहा कि सभी अधिकारी, पार्षदों व अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की समस्याओं का यथाशीघ्र निपटारा करवाए। अधिकारी जिला परिषद की हाउस मीटिंग को गंभीरता से लेते हुए उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि पार्षदों की समस्याओं का समाधान हो सके। बैठक में ई-लाइब्रेरी, महिला सांस्कृतिक केंद्र, इनडोर जिम व अन्य विकास कार्यों के बारे में अधिकारियों से विचार-विमर्श किया गया।
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11:30 बजे शुरू हुई बैठक में 12 बजे तक पहुंचते रहे
परिषद की बैठक सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई और ब्लाक समिति के चेयरमैन व पार्षद 12:30 बजे तक आते रहे। कुछ विभागों के अधिकारी न आने के कारण पार्षद चेयरमैन समेत सभी में काफी रोष देखने को मिला। बैठक में पार्षद अपनी समस्याएं बता रहे थे, लेकिन शिकायत से संबंधित कुछ अधिकारी नदारद रहे तो कुछ का ट्रांसफर हो चुका था। पार्षदों ने सीईओ विजय कुमार के सामने आरोप लगाया कि अधिकारी उनके फोन तक नहीं उठाते हैं। न ही शिकायतों की सुनवाई हो रही है। ठेकेदार गांव में आकर सीधा अपना काम शुरू कर देते हैं, हमें पता तक नहीं होता। अधिकारियों की लापरवाही के चलते ठेकेदार हमारा आमना सामना तक करते हैं। बैठक में पार्षद जयदेव डागर, अनिल, सोनू पिलाना, अमित रांगी, मांगे राम, सीमा फोगाट, सुमन मलिक, दीपिका, नीलम खत्री, अनिल, धीरज मलिक, सतीश मलिक समेत सभी पार्षद मौजूद रहे।
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सीईओ ने जिला परिषद के प्रतिनिधियों को पीछे बैठने का किया आग्रह, लेकिन सीट से नहीं उठे
जिला परिषद के सीईओ विजय कुमार ने कानून का हवाला देते हुए पार्षद प्रतिनिधियों को पीछे बैठने का आग्रह किया, लेकिन पांच पार्षद प्रतिनिधियों में से एक भी पीछे नहीं बैठा। सीईओ ने सख्त हिदायत दी कि बैठक में आप लोग कुछ नहीं बोलेंगे। सिर्फ चुने गए पार्षद ही अपनी बात रख सकते हैं।
सबसे ज्यादा समस्या जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से संबंधित रही
जिला परिषद की बैठक में सबसे ज्यादा समस्या पानी, सीवरेज व पानी की डिग्गी से संबंधित रही। लेकिन संबंधित अधिकारी एक भी मौके पर नहीं पहुंचा। जो अधिकारी मौके पर पहुंचे उनके पास समस्याओं का कोई जवाब नहीं था। मौके पर पहुंचे एसडीओ वीके जैन ने कहा कि समस्याओं से संबंधित अधिकारी का ट्रांसफर हो गया है। कुछ मौके पर ही नहीं पहुंचे। बिजली निगम से संबंधित समस्या उठी तो बिजली निगम के मौके पर पहुंचे दो एसडीओ जा चुके थे। इस पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
अधिकारी नहीं दे पा रहे जवाब
जिला पार्षदों की शिकायतों का अधिकारियों के पास नहीं मिला जवाब कबूलपुर से पार्षद जयदेव डागर ने बताया कि उनके गांव में पानी का एक रजवाहा बनाया जाना था। जो कि 2013 में उसकी शुरूआत हुई थी, लेकिन आज उसे दस साल हो गए हैं। आज तक उसका कोई समाधान नहीं हुआ है। मौके पर पहुंचे अधिकारी द्वारा कोई संतुष्ट जवाब नहीं दिया गया। महम हलके में भी सबसे ज्यादा समस्याएं रही, लेकिन मौके पर अधिकारियों के न पहुंचने से शिकायत धरी की धरी रह गई।