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अब गांवों में काबू आया कोरोना
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जिले के लोगों के लिए राहत की बात है कि आखिर अब गांवों में कोरोना लगभग काबू आ ही गया है। 14 दिन पहले गांवों में पॉजिटिविटी दर 16.8 प्रतिशत थी, जो सोमवार को घटकर 2.4 फीसदी पर पहुंच गई है। संक्रमितों के लगातार घटते ट्रेंड से अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही संक्रमण पूरी तरह नियंत्रण में होगा।
शहर में कोरोना संक्रमण से जूझ रहे जिला प्रशासन को कुछ दिन पहले गांव टिटौली में बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित और मौतें होने की सूचना मिली। इसके साथ ही कुछ और गांवों से भी ऐसी खबरें आने लगीं। इससे जिला प्रशासन से लेकर हरियाणा सरकार तक में हड़कंप मच गया। क्योंकि विशेषज्ञ पहले ही आगाह कर चुके थे कि अगर कोरोना एक बार गांवों में दाखिल हो गया तो बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। गांवों में कोरोना के हमले के साथ ही जिला प्रशासन हरकत में आया। डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने खुद कमान संभाली और सभी अधिकारियों को भी लगाया। स्वास्थ्य विभाग के साथ ग्रामीण विकास व पंचायत, राजस्व और अन्य संबंधित विभागों को भी पूरी तरह गांवों में झोंक दिया। सभी गांवों में हरेक व्यक्ति की टेस्टिंग को व्यापक अभियान चलाया गया। अब तक 75 से ज्यादा गांव कवर हो चुके हैं। इसके लिए फील्ड और हेडक्वार्टर की टीमें तैनात की गईं। फील्ड टीमों ने घर-घर जाकर कोरोना के लक्षणों वाले मरीजों की पहचान की और उनकी जांच करवाई। फिर हेडक्वार्टर टीमों ने पॉजिटिव मरीजों के लिए दवा और आइसोलेशन का प्रबंध किया। इस अभियान का नतीजा अब सामने आने लगा है, गांवों में संक्रमण दर में काफी गिरावट दर्ज की गई है। दस मई को पॉजिटिविटी रेट 16.8 प्रतिशत थी, 11 को यह 13.1 और 12 मई को 13.6 फीसदी हो गई। इसी के साथ संक्रमण दर लगातार गिरती रही। 24 मई को यह गिर कर 2.4 प्रतिशत पर पहुंच गई। जिला प्रशासन का मानना है कि जल्द ही गांवों में संक्रमण पूरी तरह नियंत्रण में होगा।
जांच और आइसोलेशन पर फोकस
सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने कहा कि गांवों में कोरोना संक्रमण को नियंत्रण के लिए एक ही रणनीति बनाई गई थी कि जल्द से जल्द हरेक की जांच की जाए। जैसे ही कोई पॉजिटिव मिले, उसे तुरंत आइसोलेट किया जाए। इसके लिए डोर-टू-डोर सर्वे कराया गया, जो अभी भी जारी है। पॉजिटिव मरीजों को तुरंत उपचार मुहैया करवाया गया। साथ ही उन्हें आइसोलेट किया गया। गांवों में कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं, पर ज्यादातर लोग होम क्वारंटीन हैं।
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52 में से 36 गांवों में कोई संक्रमित नहीं
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 24 मई को जिले के 52 गांवों में कोरोना की टेस्टिंग को अभियान चलाया, जिनमें से 36 गांवों में एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला। इनमें काहनौर, सीसर, हसनगढ़, इस्माइला, लाहली, बनियानी, कटेसरा, शिमली, मायना, खेड़ी, टिटोली, जिंदराण, फरमाना, किलोई, गढ़ी बोहर, मोखरा आदि गांव शामिल हैं। सोमवार को सबसे ज्यादा चार संक्रमित मदीना और तीन-तीन कोरोना पॉजिटिव बलंभा व आंवल में मिले। बाकी सभी गांवों में एक-दो संक्रमित ही मिले हैं।
पहले लोग टेस्ट के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। लक्षण होने के बावजूद कतराते थे। उन्हें लगता था कि यह आम बुखार है। लेकिन जैसे ही कुछ गांवों में काफी संख्या में कोरोना संक्रमित मिले, बाकी गांवों के लोग दहशत में आ गए। उसके बाद तो वे आगे बढ़ कर टेस्ट करवाने लगे। ज्यादा से ज्यादा टेस्ट कर जल्द से जल्द संक्रमितों की पहचान ही प्रशासन का लक्ष्य था। इसके चलते गांवों में संक्रमण अब काफी नियंत्रण में है।
- राकेश सैनी, एसडीएम, रोहतक
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शहर में कोरोना संक्रमण से जूझ रहे जिला प्रशासन को कुछ दिन पहले गांव टिटौली में बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित और मौतें होने की सूचना मिली। इसके साथ ही कुछ और गांवों से भी ऐसी खबरें आने लगीं। इससे जिला प्रशासन से लेकर हरियाणा सरकार तक में हड़कंप मच गया। क्योंकि विशेषज्ञ पहले ही आगाह कर चुके थे कि अगर कोरोना एक बार गांवों में दाखिल हो गया तो बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। गांवों में कोरोना के हमले के साथ ही जिला प्रशासन हरकत में आया। डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने खुद कमान संभाली और सभी अधिकारियों को भी लगाया। स्वास्थ्य विभाग के साथ ग्रामीण विकास व पंचायत, राजस्व और अन्य संबंधित विभागों को भी पूरी तरह गांवों में झोंक दिया। सभी गांवों में हरेक व्यक्ति की टेस्टिंग को व्यापक अभियान चलाया गया। अब तक 75 से ज्यादा गांव कवर हो चुके हैं। इसके लिए फील्ड और हेडक्वार्टर की टीमें तैनात की गईं। फील्ड टीमों ने घर-घर जाकर कोरोना के लक्षणों वाले मरीजों की पहचान की और उनकी जांच करवाई। फिर हेडक्वार्टर टीमों ने पॉजिटिव मरीजों के लिए दवा और आइसोलेशन का प्रबंध किया। इस अभियान का नतीजा अब सामने आने लगा है, गांवों में संक्रमण दर में काफी गिरावट दर्ज की गई है। दस मई को पॉजिटिविटी रेट 16.8 प्रतिशत थी, 11 को यह 13.1 और 12 मई को 13.6 फीसदी हो गई। इसी के साथ संक्रमण दर लगातार गिरती रही। 24 मई को यह गिर कर 2.4 प्रतिशत पर पहुंच गई। जिला प्रशासन का मानना है कि जल्द ही गांवों में संक्रमण पूरी तरह नियंत्रण में होगा।
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जांच और आइसोलेशन पर फोकस
सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने कहा कि गांवों में कोरोना संक्रमण को नियंत्रण के लिए एक ही रणनीति बनाई गई थी कि जल्द से जल्द हरेक की जांच की जाए। जैसे ही कोई पॉजिटिव मिले, उसे तुरंत आइसोलेट किया जाए। इसके लिए डोर-टू-डोर सर्वे कराया गया, जो अभी भी जारी है। पॉजिटिव मरीजों को तुरंत उपचार मुहैया करवाया गया। साथ ही उन्हें आइसोलेट किया गया। गांवों में कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं, पर ज्यादातर लोग होम क्वारंटीन हैं।
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52 में से 36 गांवों में कोई संक्रमित नहीं
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने 24 मई को जिले के 52 गांवों में कोरोना की टेस्टिंग को अभियान चलाया, जिनमें से 36 गांवों में एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला। इनमें काहनौर, सीसर, हसनगढ़, इस्माइला, लाहली, बनियानी, कटेसरा, शिमली, मायना, खेड़ी, टिटोली, जिंदराण, फरमाना, किलोई, गढ़ी बोहर, मोखरा आदि गांव शामिल हैं। सोमवार को सबसे ज्यादा चार संक्रमित मदीना और तीन-तीन कोरोना पॉजिटिव बलंभा व आंवल में मिले। बाकी सभी गांवों में एक-दो संक्रमित ही मिले हैं।
पहले लोग टेस्ट के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। लक्षण होने के बावजूद कतराते थे। उन्हें लगता था कि यह आम बुखार है। लेकिन जैसे ही कुछ गांवों में काफी संख्या में कोरोना संक्रमित मिले, बाकी गांवों के लोग दहशत में आ गए। उसके बाद तो वे आगे बढ़ कर टेस्ट करवाने लगे। ज्यादा से ज्यादा टेस्ट कर जल्द से जल्द संक्रमितों की पहचान ही प्रशासन का लक्ष्य था। इसके चलते गांवों में संक्रमण अब काफी नियंत्रण में है।
- राकेश सैनी, एसडीएम, रोहतक