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किसान होंगे हाईटेक, मोबाइल पर जानेंगे खेत का हाल
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 19 Oct 2015 02:08 AM IST
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खेत में सूखे की क्या स्थिति है और कितने दिन के अंदर उसमें पानी देना चाहिए आदि की जानकारी के लिए अब किसानों को खेत में नहीं जाना पड़ेगा। वह हजारों मील दूर बैठकर भी खेत की स्थिति के बारे में जान सकेंगे। यह सब संभव होगा जीपीआररएस डिवाइस से। जी हां, एमडीयू का यूआईईटी डिपार्टमेंट यह डिवाइस तैयार कर रहा है। अभी तक किसान यह नहीं जान पाते कि खेत में पानी की जरूरत है या फिर नहीं। वह एक अनुमान के अनुसार ही खेत में पानी देते हैं, लेकिन यूआईईटी डिपार्टमेंट जो डिवाइस तैयार कर रहा है उससे बस एक मैसेज के जरिए उन्हें खेत के सूखे की स्थिति के साथ-साथ बारिश की संभावना का भी पता चलेगा।
इस तरह करेगी डिवाइस कार्य
प्लेसमेंट ऑफिसर अरुण हुड्डा ने बताया कि डिवाइस में सबसे पहले स्वाइल सेंसर लगाया जाएगा। डिवाइस में एक सिमकार्ड सेट किया जाएगा, जिसके बाद इस डिवाइस को खेत में जमीन के अंदर दबा दिया जाएगा। यह डिवाइस प्रति स्कवायर के हिसाब से जमीन की नमी की गणना करेगा, जिसके बाद इस डिवाइस को जीपीआरएस से जोड़ा जाएगा। जीपीआरएस वहां के नजदीकी टावर से सिग्नल लेगा। आखिर में एक सर्वर तैयार किया जाएगा। इस सर्वर के माध्यम से यूजर के मोबाइल को जोड़ा जाएगा। यह सर्वर मौसम विभाग से भी कनेक्ट रहेगा।
यूजर को डालनी होगी खेत की लोकेशन
इस पूरी प्रक्रिया के बाद एक एप्लीकेशन तैयार की जाएगी, जो यूजर के मोबाइल में डाउनलोड रहेगी। यूजर इस एप्लीकेशन को ओपन कर अपने खेत की लोकेशन यानि स्थान का नाम डालेगा, जिसके बाद अपनी आईडी डालते ही उसके खेत में नमी की स्थिति और मौसम विभाग के अनुसार बारिश की क्या संभावना रहेगी आदि की उसे पूरी जानकारी मिलेगी।
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15-20 दिन चलेगी डिवाइस की बैटरी
इस डिवाइस का प्रयोग बेहद कम खर्च पर होगा। डिवाइस को जिस तरीके से तैयार किया जा रहा है उसके हिसाब से डिवाइस की बैटरी लगभग 15-20 दिन चलेगी और इंटरनेट के लिए कोई भी सामान्य पैक डलवाना होगा। बैटरी खत्म होने के बाद किसान उसे चार्ज कर सकेगा। हालांकि डिवाइस पूरी होने के बाद इसकी लागत कितनी आएगी यह अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन डिवाइस तैयार करने वाले युवा इंजीनियरों का दावा है कि यह बेहद कम खर्च पर उपलब्ध हो सकेगी।
इस तरीके से चलेगा सूखे के मानकों का पता
प्लेसमेंट ऑफिसर अरुण हुड्डा के अनुसार, यदि खेत में गहराई तक सूखा है तो 100 प्रतिशत का मैसेज आएगा, यदि इससे कम है तो यह प्रतिशत नीचे की तरफ आता रहेगा। इसके अलावा यदि खेत की गहराई में नमी है और ऊपर सूखा तो यह एक एवरेज के अनुसार प्रतिशत की गणना करेगा।
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इस तरह करेगी डिवाइस कार्य
प्लेसमेंट ऑफिसर अरुण हुड्डा ने बताया कि डिवाइस में सबसे पहले स्वाइल सेंसर लगाया जाएगा। डिवाइस में एक सिमकार्ड सेट किया जाएगा, जिसके बाद इस डिवाइस को खेत में जमीन के अंदर दबा दिया जाएगा। यह डिवाइस प्रति स्कवायर के हिसाब से जमीन की नमी की गणना करेगा, जिसके बाद इस डिवाइस को जीपीआरएस से जोड़ा जाएगा। जीपीआरएस वहां के नजदीकी टावर से सिग्नल लेगा। आखिर में एक सर्वर तैयार किया जाएगा। इस सर्वर के माध्यम से यूजर के मोबाइल को जोड़ा जाएगा। यह सर्वर मौसम विभाग से भी कनेक्ट रहेगा।
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यूजर को डालनी होगी खेत की लोकेशन
इस पूरी प्रक्रिया के बाद एक एप्लीकेशन तैयार की जाएगी, जो यूजर के मोबाइल में डाउनलोड रहेगी। यूजर इस एप्लीकेशन को ओपन कर अपने खेत की लोकेशन यानि स्थान का नाम डालेगा, जिसके बाद अपनी आईडी डालते ही उसके खेत में नमी की स्थिति और मौसम विभाग के अनुसार बारिश की क्या संभावना रहेगी आदि की उसे पूरी जानकारी मिलेगी।
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15-20 दिन चलेगी डिवाइस की बैटरी
इस डिवाइस का प्रयोग बेहद कम खर्च पर होगा। डिवाइस को जिस तरीके से तैयार किया जा रहा है उसके हिसाब से डिवाइस की बैटरी लगभग 15-20 दिन चलेगी और इंटरनेट के लिए कोई भी सामान्य पैक डलवाना होगा। बैटरी खत्म होने के बाद किसान उसे चार्ज कर सकेगा। हालांकि डिवाइस पूरी होने के बाद इसकी लागत कितनी आएगी यह अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन डिवाइस तैयार करने वाले युवा इंजीनियरों का दावा है कि यह बेहद कम खर्च पर उपलब्ध हो सकेगी।
इस तरीके से चलेगा सूखे के मानकों का पता
प्लेसमेंट ऑफिसर अरुण हुड्डा के अनुसार, यदि खेत में गहराई तक सूखा है तो 100 प्रतिशत का मैसेज आएगा, यदि इससे कम है तो यह प्रतिशत नीचे की तरफ आता रहेगा। इसके अलावा यदि खेत की गहराई में नमी है और ऊपर सूखा तो यह एक एवरेज के अनुसार प्रतिशत की गणना करेगा।