फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   No one has work or food grains, now it's better to go home

किसी के पास काम है न खाने का दाना, अब घर चले जाना ही बेहतर

Mon, 25 May 2020 12:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2020 12:39 AM IST
विज्ञापन
No one has work or food grains, now it's better to go home
No one has work or food grains, now it's better to go home - फोटो : RohtakCity
गर्म हवा के थपेड़े। 45 डिग्री तापमान। खाने को कुछ है न पीने को पानी। पसीने से तरबतर बच्चे। मां किसी तरह बच्चों को सुलाने का प्रयास कर रही है तो पिता साथ में गुमसुम बैठा है। यह सब देखने को मिला रविवार दोपहर को शहर के पुराने बस अड्डे पर। यहां एक प्रवासी मजदूर अपने परिवार के साथ बंद पड़ी दुकान की शेड के नीचे बैठा था। पास में पीपल के पेड़ के नीचे कुछ और प्रवासी मजदूर बैठे थे। इन सभी को अपने घर जाना है। परिवहन के साधन बंद होने के कारण वे परेशान हैं। प्रशासन के पास 20 दिन पहले पंजीकरण कराने के बावजूद अब तक उनके घर जाने की बारी नहीं आई है। अमर उजाला ने बात की तो मजदूरों का दर्द बाहर आया।
विज्ञापन

भागलपुर निवासी रामवचन ने बताया कि वह अपनी पत्नी रूबी, 13 वर्षीय बेटी पूजा, नौ वर्षीय बेटा गौतम, सात वर्षीय बेटा छोटू के साथ सैनिक कॉलोनी में रह रहा था। यहीं उसका भाई संजीत कुमार, उसकी पत्नी प्रियंका अपने चार माह के बेटे सोनू के साथ रह रहे थे। उसका साला मनोज, पत्नी पार्वती, बेटी आरती, विद्या व शिवानी के साथ रहता था। लॉकडाउन में काम बंद हो गया है। इस कारण सब बेकार हो गए हैं। किसी के पास काम है न खाने का दाना। पास के आश्रम से पहले खाना ले आते थे। अब तो वह भी बंद हो गया है। इसलिए रविवार को किराये का घर खाली कर शहर थाना पहुंचे। यहां से लोगों को ट्रेन के जरिये घर पहुंचाया गया है। घर जाने के लिए हमने भी पंजीकरण कराया है। इसे 20 दिन हो गए। अब तक कोई जवाब नहीं आया है। हम जाकर पता करते हैं तो बाद में आने या फोन आने के बाद बुलाने की बात कह कर वापस भेज देते हैं। शनिवार को भी थाने आए थे। यहां से हमें डांट कर भगा दिया। हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पुलिस कर्मचारी को बताया भी कि हमें फोन आया था। इसके बावजूद हम ट्रेन में नहीं बैठ पाए। अब सुबह यहां बैठे हैं। दिन भर से कुछ नहीं खाया है। आसपास पानी भी नहीं है। पानी मिला भी तो गर्म उबलता हुआ। इसे पी भी नहीं पाए। इधर, अनंत, श्रीराम व अन्य बताया कि हम 36 लोग हैं। कुछ सैनिक कॉलोनी तो कुछ मायना से पैदल चलकर यहां पहुंचे हैं। गर्मी में भूख-प्यास से परेशान होकर घर जाने के लिए निकलने हैं। प्रशासन मदद कर दे तो बस या ट्रेन से अपने घर पहुंच जाएंगे। यहां भूखे-प्यासे ही मर जाएंगे। अपनी परेशानी लेकर उपायुक्त कार्यालय भी गए थे। यहां रविवार के कारण अधिकारी नहीं मिले। कर्मचारी ने अवकाश होने की बात कह कर लौटा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed