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Rohtak News: बिना कोचिंग, परिवार के मार्गदर्शन से जज बनीं निशा
Thu, 17 Oct 2024 05:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 17 Oct 2024 05:00 AM IST
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16सीटीके25..निशा। संवाद
रोहतक। हरियाणा सिविल सेवा न्यायिक शाखा की परीक्षा पास कर निशा ने सिविल जज का पद प्राप्त किया है। निशा ने बीसीए में रैंक-3 हासिल की।
निशा ने बताया यह उनके पापा का सपना था और प्रेरणा खुद से ली। निशा लक्ष्मी नगर, जींद की रहने वाली हैं। फिलहाल निशा एमडीयू में पीएचडी कर रही हैं। पीएचडी में उनके गाइड डॉ. जितेंद्र ढुल हैं। उन्होंने ने भी पूरा सपोर्ट किया। निशा ने तीसरी बार में परीक्षा पास की। पहले प्रयास में मेंस की परीक्षा और दूसरे प्रयास में साक्षात्कार पास नहीं कर पाई थीं।
निशा ने बताया कि उनके पिता विजिलेंस में सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हैं। उनकी मां हाउस वाइफ और भाई-बहन दोनों एडीए के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उनके मेंटर भाई सुरेंद्र हैं। निशा ने बिना किसी कोचिंग के तैयारी की और परीक्षा पास की।
उन्हाेंने कहा कि 2018 में एलएलबी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से की और एलएलएम एमडीयू से की। एलएलबी करने के बाद तैयारी करनी शुरू की। साथ ही एलएलएम भी की और तैयारी भी।
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निशा ने बताया कि 8 से 10 घंटे तैयारी करती थी। दूसरे प्रयास में विफल होने पर थोड़ी निराशा हुई थी, लेकिन परिवार ने पूरा सपोर्ट किया और कहा कि तैयारी करती रहो, एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी। निशा ने बताया कि परिवार का मार्गदर्शन काम आया।
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निशा ने बताया यह उनके पापा का सपना था और प्रेरणा खुद से ली। निशा लक्ष्मी नगर, जींद की रहने वाली हैं। फिलहाल निशा एमडीयू में पीएचडी कर रही हैं। पीएचडी में उनके गाइड डॉ. जितेंद्र ढुल हैं। उन्होंने ने भी पूरा सपोर्ट किया। निशा ने तीसरी बार में परीक्षा पास की। पहले प्रयास में मेंस की परीक्षा और दूसरे प्रयास में साक्षात्कार पास नहीं कर पाई थीं।
निशा ने बताया कि उनके पिता विजिलेंस में सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हैं। उनकी मां हाउस वाइफ और भाई-बहन दोनों एडीए के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उनके मेंटर भाई सुरेंद्र हैं। निशा ने बिना किसी कोचिंग के तैयारी की और परीक्षा पास की।
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उन्हाेंने कहा कि 2018 में एलएलबी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से की और एलएलएम एमडीयू से की। एलएलबी करने के बाद तैयारी करनी शुरू की। साथ ही एलएलएम भी की और तैयारी भी।
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निशा ने बताया कि 8 से 10 घंटे तैयारी करती थी। दूसरे प्रयास में विफल होने पर थोड़ी निराशा हुई थी, लेकिन परिवार ने पूरा सपोर्ट किया और कहा कि तैयारी करती रहो, एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी। निशा ने बताया कि परिवार का मार्गदर्शन काम आया।

16सीटीके25..निशा। संवाद