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सरहद पर लड़ने वाले फौजियों का दम निकाल रहा निगम, छूट के बावजूद भेज रहे बिल
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 08 Aug 2015 02:19 AM IST
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सेक्टर-3 में रहने वाले शिव नारायण ने पूरी जिंदगी देश की रक्षा में लगा दी।
वे फौज से रिटायर्ड हुए तो लगा कि अब कुछ आराम मिलेगा। लेकिन उनका यह आराम नगर निगम के अधिकारियों ने हाउस टैक्स का बिल भेजकर छीन लिया है।
अब वे टैक्स माफ कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं है।
यह कहानी अकेले शिव नारायण की नहीं है, बल्कि निगम अधिकारी ऐसे सैकड़ों फौजियों को रुला रहे हैं। दरअसल मौजूदा और सेवानिवृत्त फौजियों को सरकार की ओर से हाउस टैक्स में 300 वर्ग गज तक छूट दी जाती है।
इसके बावजूद नगर निगम की ओर से उनको हाउस टैक्स का बिल भेज दिया गया। मॉडल टाउन वासी रिटायर्ड फौजी धीरेंद्र सिंह पहले कई बार फौजी होने के प्रमाण निगम कार्यालय में जमा कर चुके हैं, लेकिन हर बार उनको हाउस टैक्स बिल भेज दिया जाता है। धीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके एक फौजी साथी से बिल जमा भी करा लिया गया, लेकिन उनके जानकारी देने के बाद वह वापस लेने के लिए धक्के खा रहे हैं। निगम कार्यालय में शुक्रवार को ऐसे एक भी रिटायर्ड फौजी नहीं मिले, जिनकी समस्या का समाधान किया गया हो। उनको यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि संबंधित कागजात जमा कराए और उसके बाद ही कुछ हो सकेगा।
वर्जन....
फौजी व रिटायर्ड फौजियों को अपने प्रमाण पत्र जमा कराने होते हैं, जिससे उनको सरकार की ओर से मिलने वाली छूट का फायदा मिल सके। कार्यालय में अपने प्रमाण पत्र जमा कराने वालों को छूट जरूर मिलती है।
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- जसवंत सिंह, जेडटीओ
प्रॉपर्टी बेच दी, फिर भी पुराने मालिक के घर पहुंच रहे बिल
सोनीपत रोड निवासी श्यामलाल ने एक साल पहले अपना प्लाट रामलाल को बेच दिया था और उसकी रजिस्ट्री भी करा दी गई। अब उसी प्लाट का हाउस टैक्स श्यामलाल के पास पहुंच गया। इस तरह ही प्रॉपर्टी बेचने के बावजूद पुराने मालिकों को ही हाउस टैक्स भेजा जा रहा है, जिसे रजिस्ट्री कराने के बावजूद अपडेट नहीं किया गया है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने निगम कार्यालय में दर्ज प्रॉपर्टी में अपना नाम नहीं बदलवाया है। इस तरह प्लॉट व मकान बेचने के बाद भी समस्या पीछा नहीं छोड़ रही है।
छूट पर भी डाका
शहरवासियों को अलग से मिलने वाली 10 की जगह केवल 5 प्रतिशत छूट दी जा रही है। बिल जमा करने पर 30 प्रतिशत के अलावा भी 10 प्रतिशत छूट मिल रही है, लेकिन उस दस प्रतिशत छूट में किसी को पूरी मिल रही है तो किसी को आधी।
बिल नहीं आने के कारण भी बढ़ रही टेंशन
ऐसे भी बहुत लोग हैं, जिनको बिल नहीं भेजे गए हैं। उनकी टेंशन बढ़ने का कारण यह भी है कि वह पहले बिल जमा करा चुके हैं और कहीं उनको दोबारा से पुराना बिल भी न भेज दिया जाए। अब वे पुराने बिल उठाकर पहले से ही चक्कर काटने लगे हैं। विजयनगर में अभी तक बिल नहीं पहुंचे हैं, लेकिन मोहल्लावासी अभी से दौड़ लगा रहे हैं। बजरंग लाल के अलावा विकास कुमार भी बिना बिल आए निगम कार्यालय में पहुंच गए।
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वे फौज से रिटायर्ड हुए तो लगा कि अब कुछ आराम मिलेगा। लेकिन उनका यह आराम नगर निगम के अधिकारियों ने हाउस टैक्स का बिल भेजकर छीन लिया है।
अब वे टैक्स माफ कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं है।
यह कहानी अकेले शिव नारायण की नहीं है, बल्कि निगम अधिकारी ऐसे सैकड़ों फौजियों को रुला रहे हैं। दरअसल मौजूदा और सेवानिवृत्त फौजियों को सरकार की ओर से हाउस टैक्स में 300 वर्ग गज तक छूट दी जाती है।
इसके बावजूद नगर निगम की ओर से उनको हाउस टैक्स का बिल भेज दिया गया। मॉडल टाउन वासी रिटायर्ड फौजी धीरेंद्र सिंह पहले कई बार फौजी होने के प्रमाण निगम कार्यालय में जमा कर चुके हैं, लेकिन हर बार उनको हाउस टैक्स बिल भेज दिया जाता है। धीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके एक फौजी साथी से बिल जमा भी करा लिया गया, लेकिन उनके जानकारी देने के बाद वह वापस लेने के लिए धक्के खा रहे हैं। निगम कार्यालय में शुक्रवार को ऐसे एक भी रिटायर्ड फौजी नहीं मिले, जिनकी समस्या का समाधान किया गया हो। उनको यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि संबंधित कागजात जमा कराए और उसके बाद ही कुछ हो सकेगा।
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फौजी व रिटायर्ड फौजियों को अपने प्रमाण पत्र जमा कराने होते हैं, जिससे उनको सरकार की ओर से मिलने वाली छूट का फायदा मिल सके। कार्यालय में अपने प्रमाण पत्र जमा कराने वालों को छूट जरूर मिलती है।
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- जसवंत सिंह, जेडटीओ
प्रॉपर्टी बेच दी, फिर भी पुराने मालिक के घर पहुंच रहे बिल
सोनीपत रोड निवासी श्यामलाल ने एक साल पहले अपना प्लाट रामलाल को बेच दिया था और उसकी रजिस्ट्री भी करा दी गई। अब उसी प्लाट का हाउस टैक्स श्यामलाल के पास पहुंच गया। इस तरह ही प्रॉपर्टी बेचने के बावजूद पुराने मालिकों को ही हाउस टैक्स भेजा जा रहा है, जिसे रजिस्ट्री कराने के बावजूद अपडेट नहीं किया गया है। ऐसा नहीं है कि उन्होंने निगम कार्यालय में दर्ज प्रॉपर्टी में अपना नाम नहीं बदलवाया है। इस तरह प्लॉट व मकान बेचने के बाद भी समस्या पीछा नहीं छोड़ रही है।
छूट पर भी डाका
शहरवासियों को अलग से मिलने वाली 10 की जगह केवल 5 प्रतिशत छूट दी जा रही है। बिल जमा करने पर 30 प्रतिशत के अलावा भी 10 प्रतिशत छूट मिल रही है, लेकिन उस दस प्रतिशत छूट में किसी को पूरी मिल रही है तो किसी को आधी।
बिल नहीं आने के कारण भी बढ़ रही टेंशन
ऐसे भी बहुत लोग हैं, जिनको बिल नहीं भेजे गए हैं। उनकी टेंशन बढ़ने का कारण यह भी है कि वह पहले बिल जमा करा चुके हैं और कहीं उनको दोबारा से पुराना बिल भी न भेज दिया जाए। अब वे पुराने बिल उठाकर पहले से ही चक्कर काटने लगे हैं। विजयनगर में अभी तक बिल नहीं पहुंचे हैं, लेकिन मोहल्लावासी अभी से दौड़ लगा रहे हैं। बजरंग लाल के अलावा विकास कुमार भी बिना बिल आए निगम कार्यालय में पहुंच गए।